ऋषिकांत सिंह चनंबम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता रजत, स्नैच में बनाया नया रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारत के वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने 26 जुलाई 2026 को ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 60 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत को टूर्नामेंट के चौथे दिन का पहला पदक दिलाया। मणिपुर के 28 वर्षीय इस खिलाड़ी ने कुल 264 किलोग्राम (स्नैच 121 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 143 किग्रा) भार उठाया और स्नैच राउंड में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
मुकाबले का घटनाक्रम
स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन क्रमबद्ध और आत्मविश्वास से भरा रहा। उन्होंने पहले प्रयास में 116 किग्रा, दूसरे में 119 किग्रा और तीसरे प्रयास में 121 किग्रा उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड दर्ज किया। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 143 किग्रा सफलतापूर्वक उठाया, लेकिन 148 किग्रा और 151 किग्रा के दोनों प्रयास असफल रहे।
स्वर्ण पदक मलेशिया के बिन कसदन मोहम्मद अनीक ने जीता, जिन्होंने कुल 273 किग्रा उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्नैच में ऋषिकांत के रिकॉर्ड की बराबरी भी की। केन्या के जोशुआ अमुंगा म्बोया 260 किग्रा के साथ कांस्य पदक विजेता रहे।
ऋषिकांत का परिचय और शुरुआती सफर
ऋषिकांत सिंह चनंबम का जन्म 5 जुलाई 1998 को मणिपुर के इम्फाल पश्चिम जिले के न्गाइरांगबाम माखा मानिंग लेइकाई में हुआ था। उन्होंने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत खुमान लम्पक स्थित नेशनल स्पोर्ट्स अकादमी से की। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके शुरुआती प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
इसके बाद उन्हें पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण का मौका मिला। फिर पटियाला के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NIS) में उन्होंने अपनी तकनीक को परिष्कृत किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए उन्होंने बुल्गारिया की नेशनल स्पोर्ट्स अकादमी वासिल लेव्स्की में भी विशेष प्रशिक्षण लिया। भारतीय सेना ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ
ऋषिकांत ने 2016 जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा की पहचान बनाई। 2019 सीनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2025 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में आया, जहाँ 60 किग्रा वर्ग में कुल 271 किग्रा (स्नैच 120 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 151 किग्रा) उठाकर स्वर्ण पदक और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज किया।
यह ग्लासगो 2026 ऋषिकांत का दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स था। इससे पहले वह बर्मिंघम 2022 में 55 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। अंतरराष्ट्रीय भारवर्ग में बदलाव के बाद उन्होंने 60 किग्रा वर्ग में जगह बनाई और 2024 राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 61 किग्रा स्नैच में 124 किग्रा उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया।
ग्लासगो से पहले की तैयारी
कॉमनवेल्थ गेम्स से पूर्व ऋषिकांत ने उत्तर प्रदेश के मोदीनगर स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास किया। इसके अलावा गांधीनगर में आयोजित एशियन सीनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भाग लिया और अंतिम तैयारी के लिए बर्मिंघम के वार्ले वेटलिफ्टिंग क्लब में एक्लीमेटाइजेशन कैंप में प्रशिक्षण लिया।
भारतीय वेटलिफ्टिंग में ऋषिकांत का महत्व
गौरतलब है कि भारतीय वेटलिफ्टिंग में मणिपुर का योगदान दशकों से अग्रणी रहा है और ऋषिकांत इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 28 वर्ष की उम्र में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप स्वर्ण, कॉमनवेल्थ गेम्स रजत, राष्ट्रीय रिकॉर्ड और अब स्नैच में कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड — यह उपलब्धियाँ उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग के सबसे भरोसेमंद चेहरों में स्थापित करती हैं। आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में उनसे और भी बड़ी सफलताओं की उम्मीद है।