31 जुलाई 2026
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लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, स्नैच में 176 किलो से बनाया नया रिकॉर्ड

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लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, स्नैच में 176 किलो से बनाया नया रिकॉर्ड

सारांश

दर्जी पिता और सब्जी बेचने वाले दादा के परिवार से निकले लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 388 किलोग्राम उठाकर सिल्वर मेडल जीता और स्नैच में 176 किलो से नया रिकॉर्ड बनाया। गोल्ड से मात्र 1 किलो की दूरी रह गई — लेकिन यह प्रदर्शन संघर्ष से उठान की सच्ची कहानी है।

मुख्य बातें

लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 388 किलोग्राम (स्नैच 176 + क्लीन एंड जर्क 212) उठाकर रजत पदक जीता।
स्नैच राउंड में 176 किलोग्राम उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
तीसरे प्रयास में 217 किलोग्राम उठाने से चूके; मात्र 1 किलो के अंतर से स्वर्ण पदक हाथ से गया।
पिता दर्जी और दादा सब्जी विक्रेता — आर्थिक संघर्ष के बावजूद परिवार ने ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं आने दी।
2015 में भारतीय नौसेना में भर्ती; पटियाला के राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण के बाद कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य जीता।

भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 109 किलोग्राम भारवर्ग में कुल 388 किलोग्राम भार उठाकर देश के लिए रजत पदक हासिल किया। स्नैच राउंड में 176 किलोग्राम का भार उठाकर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। पंजाब के एक साधारण परिवार से आने वाले इस खिलाड़ी की यह उपलब्धि आर्थिक संघर्ष और अदम्य मेहनत की मिसाल है।

मुख्य प्रदर्शन

लवप्रीत ने स्नैच राउंड में 176 किलोग्राम उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड तोड़ा। क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने 212 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। तीसरे और अंतिम प्रयास में वे 217 किलोग्राम उठाने से चूक गए — यदि वह प्रयास सफल होता, तो लवप्रीत एक और रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक भी जीत लेते। अंततः वे मात्र 1 किलोग्राम के अंतर से गोल्ड मेडल से वंचित रह गए।

संघर्ष से चमके: परिवार की पृष्ठभूमि

लवप्रीत का परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण है। उनके पिता दर्जी का काम करते हैं, जबकि दादा सब्जी बेचकर घर चलाते हैं। परिवार की सीमित आय के बावजूद माता-पिता ने लवप्रीत की ट्रेनिंग और खानपान में कभी कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने बेटे के हाथ में सुई-धागा थमाने की बजाय देश के लिए पदक जीतने का सपना देखने की छूट दी — यह निर्णय आज सार्थक साबित हुआ।

करियर का सफर

लवप्रीत ने मात्र 13 वर्ष की आयु में वेटलिफ्टिंग में कदम रखा। 2015 में उन्हें भारतीय नौसेना में नौकरी मिली, जिसके बाद पटियाला स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में उन्हें अभ्यास का अवसर मिला। दो वर्षों के भीतर ही उन्होंने कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके बाद से वे भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम के एक विश्वसनीय लिफ्टर के रूप में उभरे।

आगे की राह

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इस यादगार प्रदर्शन के बाद लवप्रीत सिंह भारतीय वेटलिफ्टिंग के उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक बनकर उभरे हैं। गौरतलब है कि यह उनके करियर की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में से एक है। स्नैच में रिकॉर्ड तोड़ने और रजत पदक जीतने के बाद अब उनकी नज़रें आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर होंगी, जहाँ वे उस एक किलोग्राम की कसर पूरी करने का लक्ष्य रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो एक दर्जी का बेटा शायद कभी इस मंच तक नहीं पहुँचता। 217 किलो के तीसरे प्रयास की विफलता तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देने की ज़रूरत रेखांकित करती है। भारतीय वेटलिफ्टिंग को ऐसे और लवप्रीत तैयार करने के लिए जमीनी स्तर पर निवेश और खोज की प्रणाली को मज़बूत करना होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कितना भार उठाया?
लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 388 किलोग्राम भार उठाया — स्नैच में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 212 किलोग्राम। इस प्रदर्शन से उन्होंने रजत पदक जीता और स्नैच में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।
लवप्रीत सिंह गोल्ड मेडल से क्यों चूक गए?
लवप्रीत सिंह क्लीन एंड जर्क के तीसरे प्रयास में 217 किलोग्राम उठाने में असफल रहे। यदि यह प्रयास सफल होता, तो वे एक और रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीत लेते। अंततः वे मात्र 1 किलोग्राम के अंतर से गोल्ड से वंचित रहे।
लवप्रीत सिंह का परिवार किस पृष्ठभूमि से है?
लवप्रीत सिंह एक साधारण परिवार से आते हैं जहाँ उनके पिता दर्जी का काम करते हैं और दादा सब्जियाँ बेचते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने लवप्रीत की ट्रेनिंग और खानपान में कभी कोई कमी नहीं आने दी।
लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग कब शुरू की?
लवप्रीत सिंह ने मात्र 13 वर्ष की आयु में वेटलिफ्टिंग शुरू की। 2015 में भारतीय नौसेना में नौकरी मिलने के बाद उन्हें पटियाला के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास का अवसर मिला, जिसके बाद उनका करियर तेज़ी से आगे बढ़ा।
लवप्रीत सिंह ने जूनियर स्तर पर कौन-से पदक जीते हैं?
लवप्रीत सिंह ने जूनियर स्तर पर कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। ये उपलब्धियाँ पटियाला के राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण शुरू करने के दो वर्षों के भीतर ही आईं।
राष्ट्र प्रेस
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