संजू सैमसन का विश्वास: भारत भविष्य में और भी वर्ल्ड कप जीतेगा
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नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की शानदार जीत के नायक और 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे संजू सैमसन ने कहा कि वह आज भी हर सुबह उठकर यह सोचते हैं कि क्या सच में उनकी टीम ने अपनी ज़मीन पर यह ट्रॉफी जीती है। हालांकि, उन्हें पूरा विश्वास है कि देश में जिस तेजी से नए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का उदय हो रहा है, उसे देखते हुए भविष्य में भारत को और भी कई बार ट्रॉफी जीतने का अवसर मिलेगा।
रविवार को नई दिल्ली में बीसीसीआई अवॉर्ड्स के दौरान सैमसन ने ब्रॉडकास्टर्स से चर्चा करते हुए कहा, "मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है। जब मैं सुबह उठता हूँ, तो यही सोचता हूँ कि क्या वास्तव में ऐसा हुआ है? सच में, मेरे मन में यही भावना है। लेकिन, मुझे लगता है कि आने वाले वर्षों में हमारे देश में बेहतरीन खिलाड़ी जिस तरह से उभर रहे हैं, यह सिलसिला बार-बार दोहराया जाएगा। भारत में नए खिलाड़ियों का इतना तेजी से आना निश्चित रूप से हमें और जीत दिलाएगा।"
संजू सैमसन का प्रदर्शन टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अपूर्व रहा। उन्हें प्रारंभिक मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में खेलने का अवसर नहीं मिला था। हालांकि, जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने उसे बेहतरीन तरीके से भुनाया। वेस्टइंडीज के खिलाफ 'करो या मरो' मुकाबले में सैमसन ने 97 रनों की पारी खेलकर भारतीय टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी संजू ने 89 रनों की नाबाद पारी खेली। फाइनल में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने 46 गेंदों में 89 रनों की नाबाद पारी खेली। टी20 विश्व कप में संजू ने केवल 5 पारियों में 199 के स्ट्राइक रेट से 321 रन बनाए।
सैमसन ने आगे बताया, "आप केवल यह सपना देख सकते हैं कि आप कहाँ पहुँचना चाहते हैं, लेकिन आप उस रास्ते पर कैसे चलेंगे, यह आप नहीं तय कर सकते। इस मामले में मेरी जिंदगी और मेरा करियर एक अद्भुत मिसाल है। मैं निश्चित रूप से कुछ साल पहले यह उपलब्धि हासिल करना चाहता था। मैं अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहता था, लेकिन किस्मत की अपनी योजना थी। इसी कारण मुझे यह सब किसी फिल्म जैसा लगता है। मैंने इस पूरे सफर का भरपूर आनंद लिया।"
संजू सैमसन ने कहा कि शुरुआत में उनका पूरा ध्यान केवल अपने प्रदर्शन पर था, विशेषकर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज के दौरान। लेकिन अचानक उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। बाद में जब टीम को उनकी आवश्यकता महसूस हुई, तो उन्हें वापस बुलाया गया। इसी समय उनके सोचने का तरीका बदल गया।
उन्होंने बताया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में ध्यान सिर्फ अपने प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि टीम की जरूरतों पर भी होना चाहिए। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि टीम को उनसे योगदान की उम्मीद है और उनकी भूमिका खास है। संजू ने कहा कि यहीं से उनके अंदर बदलाव आया और उनका आत्मविश्वास जागा कि टीम को उनकी जरूरत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मानसिक और शारीरिक रूप से खुद पर बहुत काम किया था, इसलिए उन्हें विश्वास था कि वह तैयार हैं। उन्हें केवल वही करना था जो वह सबसे अच्छा कर सकते हैं।