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सात्विक ने खेल की हर जीत का जश्न मनाने की अपील की, निजी शोहरत की बात नहीं: बैडमिंटन स्टार का स्पष्टीकरण

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सात्विक ने खेल की हर जीत का जश्न मनाने की अपील की, निजी शोहरत की बात नहीं: बैडमिंटन स्टार का स्पष्टीकरण

सारांश

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने थॉमस कप कांस्य पदक पर सार्वजनिक स्वागत की कमी को लेकर अपनी टिप्पणी को स्पष्ट किया। यह निजी प्रशंसा की माँग नहीं, बल्कि भारत में एक ऐसी खेल संस्कृति बनाने की पुकार है जो हर एथलीट की कुर्बानी और मेहनत को मान्यता दे, चाहे वह बड़ी हो या छोटी उपलब्धि।

मुख्य बातें

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने 2026 थॉमस कप में भारतीय टीम के कांस्य पदक पर सार्वजनिक स्वागत की कमी पर टिप्पणी की।
रंकीरेड्डी का संदेश निजी शोहरत के लिए नहीं, बल्कि सभी खेलों और एथलीटों को समान समर्थन देने की अपील है।
उन्होंने कहा कि भारत की जर्सी पहनने वाले हर एथलीट की वर्षों की कुर्बानी और मेहनत को मान्यता दी जानी चाहिए।
चिराग शेट्टी ने पहले कहा था कि थॉमस कप की जीत को उसके महत्व के अनुरूप जश्न नहीं मनाया गया ।
रंकीरेड्डी ने पैसे या बड़ी परेड की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मान्यता और समर्थन की माँग की है।

नई दिल्ली, 8 मई (राष्ट्र प्रेस)। भारत के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने अपने हाल के बयान पर स्पष्टीकरण दिया है, जिसे सोशल मीडिया पर निजी उपलब्धि की माँग के रूप में व्याख्यायित किया गया था। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनका संदेश सभी भारतीय एथलीटों की छोटी-बड़ी सफलताओं को मान्यता देने की राष्ट्रीय संस्कृति बनाने के बारे में है, न कि व्यक्तिगत प्रशंसा के लिए।

2022 में थॉमस कप जीतने वाली भारतीय टीम ने 2026 संस्करण में कांस्य पदक हासिल किया, लेकिन घर लौटने पर औपचारिक स्वागत का अभाव रहा। रंकीरेड्डी ने इस बात को रेखांकित करने के लिए टीम की प्रस्थान और वापसी की तस्वीरें साझा की थीं, जिसे कुछ दर्शकों ने गलतफहमी के साथ लिया।

निजी शोहरत की नहीं, राष्ट्रीय संस्कृति की बात

रंकीरेड्डी ने अपने विस्तृत बयान में कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे अक्सर ओलंपिक या विश्व कप के समान मीडिया और जनता का समर्थन नहीं मिलता। यह केवल बैडमिंटन की समस्या नहीं है — टेबल टेनिस, तीरंदाज़ी, और अन्य खेलों में भी यही पैटर्न दिखता है। रंकीरेड्डी का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 'लोकप्रियता-आधारित समर्थन' की संकीर्ण सोच को चुनौती देता है। यदि भारत को खेल महाशक्ति बनना है, तो हर पदक, हर विश्व रैंकिंग, हर क्वालिफिकेशन को एक ही भावुकता से मनाना होगा। यह न केवल खिलाड़ियों के मनोबल को प्रभावित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी संदेश देता है कि अपने देश का प्रतिनिधित्व करना मूल्यवान है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी का हाल का विवाद क्या था?
रंकीरेड्डी ने 2026 थॉमस कप में भारतीय टीम के कांस्य पदक पर सार्वजनिक स्वागत की कमी पर टिप्पणी की थी। उन्होंने टीम की प्रस्थान और वापसी की तस्वीरें साझा करते हुए कहा था कि घर लौटने पर कोई बड़ी विदाई या स्वागत नहीं हुआ।
क्या रंकीरेड्डी को निजी प्रशंसा चाहिए थी?
नहीं, रंकीरेड्डी ने स्पष्ट किया कि उनका संदेश निजी शोहरत के लिए नहीं था। वे चाहते हैं कि भारत में एक ऐसी खेल संस्कृति बने जो हर एथलीट की कुर्बानी और मेहनत को मान्यता दे, चाहे वह किसी भी खेल में हो।
थॉमस कप क्या है और यह कितना महत्वपूर्ण है?
थॉमस कप बैडमिंटन की सबसे प्रतिष्ठित पुरुष टीम चैंपियनशिप है। 2022 में भारत ने पहली बार इसे जीता था। 2026 में कांस्य पदक एक वैश्विक स्तर की बड़ी उपलब्धि है, जिसमें देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की साल भर की कड़ी मेहनत झलकती है।
चिराग शेट्टी ने इस बारे में क्या कहा?
चिराग शेट्टी, रंकीरेड्डी के डबल्स पार्टनर, ने कहा कि थॉमस कप की जीत को उसके महत्व के अनुरूप जश्न नहीं मनाया गया। उन्होंने कहा कि जो लोग बैडमिंटन को समझते हैं उन्हें पता था कि टूर्नामेंट कितना बड़ा था, लेकिन आम जनता को अभी भी इसकी अहमियत का पता नहीं है।
भारतीय खेल संस्कृति में इसका क्या मतलब है?
यह दर्शाता है कि भारत में खेल समर्थन अक्सर लोकप्रियता पर निर्भर करता है। ओलंपिक और विश्व कप को बड़ा समर्थन मिलता है, लेकिन अन्य वैश्विक चैंपियनशिप में भारतीय सफलता को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। रंकीरेड्डी की अपील एक समान और व्यापक खेल संस्कृति बनाने के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
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