2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सॉफ्ट टेनिस: जय मीणा के एशियन गेम्स 2026 मेडल के बाद जानें खेल का इतिहास, नियम और जापानी उत्पत्ति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सॉफ्ट टेनिस: जय मीणा के एशियन गेम्स 2026 मेडल के बाद जानें खेल का इतिहास, नियम और जापानी उत्पत्ति

सारांश

एशियन गेम्स 2026 में जय मीणा के ऐतिहासिक मेडल ने सॉफ्ट टेनिस को भारत की नज़रों में ला दिया। 1884 में जापान में जन्मा यह खेल, जो हल्की रबर की गेंद और खास नियमों के साथ खेला जाता है, अब 65 देशों तक फैल चुका है — और भारत की इस यात्रा की शुरुआत अभी हुई है।

मुख्य बातें

जय मीणा ने एशियन गेम्स 2026 में सॉफ्ट टेनिस में भारत का पहला मेडल जीता।
सॉफ्ट टेनिस की उत्पत्ति 1884 में जापान में हुई, जब एक पश्चिमी मिशनरी ने टेनिस से परिचय कराया था।
खेल में हवा भरी नरम रबर की गेंद का उपयोग होता है जिसका वज़न 31 ग्राम और व्यास 6.6 सेमी है।
1973 में इंटरनेशनल सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना हुई; अब 65 देश इस खेल में भाग लेते हैं।
1994 में सॉफ्ट टेनिस एशियन गेम्स में आधिकारिक स्पर्धा बना।
एकल में 7 में से 4 गेम और युगल में 9 में से 5 गेम जीतने वाला मैच विजेता होता है।

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का पहला मेडल जीतकर इस खेल को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जय की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद से खेलप्रेमियों में सॉफ्ट टेनिस की उत्पत्ति, नियमों और इसके विकास को लेकर जिज्ञासा तेज़ी से बढ़ी है। यह खेल देखने में पारंपरिक टेनिस जैसा लगता है, लेकिन इसकी गेंद, रैकेट और नियम इसे एक अलग पहचान देते हैं।

जापान से हुई सॉफ्ट टेनिस की शुरुआत

सॉफ्ट टेनिस की जड़ें जापान में हैं। 1884 में 19वीं शताब्दी के अंत में एक पश्चिमी मिशनरी के माध्यम से टेनिस का खेल जापान पहुँचा। जापानी लोगों ने इसे अपनी परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री के अनुसार ढालते हुए पारंपरिक टेनिस में बदलाव किए और इसे 'सॉफ्ट टेनिस' नाम दिया। सबसे बड़ा परिवर्तन यह था कि कठोर गेंद की जगह हल्की हवा भरी नरम रबर की गेंद और हल्के रैकेट का उपयोग शुरू किया गया।

यह खेल धीरे-धीरे एशिया में फैला। 1955 में जापान, साउथ कोरिया और ताइवान ने मिलकर एशियाई सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना की, जो 1956 से 1973 के बीच आयोजित एशियाई चैंपियनशिप का संचालन करता रहा।

वैश्विक विस्तार और अंतरराष्ट्रीय संगठन का निर्माण

1972 में संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई में सॉफ्ट टेनिस फेडरेशन की स्थापना हुई और राज्य स्तरीय टूर्नामेंट आयोजित होने लगे। इसी दौर में ब्राज़ील, वेनेजुएला और हांगकांग ने भी इस खेल के लिए अपने संगठन बनाए। 1973 में इंटरनेशनल सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना के साथ इस खेल को वैश्विक मंच मिला।

1975 में हवाई में पहली विश्व सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। इसके बाद 1977 में दूसरी और 1979 में तीसरी विश्व चैंपियनशिप साउथ कोरिया में आयोजित हुई। पूर्वी यूरोप में भी इस खेल की लोकप्रियता बढ़ी और यूरोपीय सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना की गई।

एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस की यात्रा

1988 में सॉफ्ट टेनिस को एशियाई ओलंपिक परिषद में शामिल किया गया। 1990 में यह खेल एशियन गेम्स में प्रदर्शनी खेल के रूप में सम्मिलित हुआ और 1994 में आधिकारिक स्पर्धा का दर्जा पाया। इंटरनेशनल सॉफ्ट टेनिस महासंघ के अनुसार, अब लगभग 65 देश इस खेल में हिस्सा लेते हैं, जिसमें भारत भी शामिल है। गौरतलब है कि भारत के लिए एशियन गेम्स में यह पहली बार है जब सॉफ्ट टेनिस में कोई मेडल आया है।

गेंद, रैकेट और कोर्ट की विशेषताएँ

सॉफ्ट टेनिस में उपयोग होने वाली गेंद का वज़न लगभग 31 ग्राम और व्यास करीब 6.6 सेमी होता है। यह हवा से भरी खोखली नरम रबर की गेंद होती है, जो पारंपरिक टेनिस की कठोर गेंद से काफी हल्की होती है। रैकेट भी अपेक्षाकृत हल्का होता है। हालाँकि, कोर्ट का आकार सामान्य टेनिस कोर्ट जैसा ही होता है और नेट की ऊँचाई 1.07 मीटर रखी जाती है। इसमें एकल और युगल — दोनों स्पर्धाएँ खेली जाती हैं।

सॉफ्ट टेनिस के नियम

सॉफ्ट टेनिस में अंक 1, 2, 3, 4 के क्रम में मिलते हैं। पहले 4 अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी गेम जीतता है। यदि दोनों खिलाड़ियों का स्कोर बराबर हो जाए तो उसे 'ड्यूस' कहते हैं, जिसके बाद जीत के लिए लगातार 2 अंक की बढ़त ज़रूरी होती है।

एकल मैच में 7 गेम में से पहले 4 गेम जीतने वाला खिलाड़ी विजेता होता है। युगल मुकाबले में 9 गेम का प्रारूप होता है — पहले 5 गेम जीतने वाली टीम जीतती है। यदि 3-3 की बराबरी हो तो एक फाइनल टाई-ब्रेक गेम खेला जाता है, जिसमें 7 अंक हासिल करने होते हैं।

सर्विस का नियम भी विशेष है — हर 2 अंक के बाद सर्विस बदलती है, चाहे अंक किसी के भी पक्ष में गया हो। डबल्स में दोनों टीमें 2-2 अंक के लिए बारी-बारी सर्विस करती हैं। इस अनूठे प्रारूप ने सॉफ्ट टेनिस को पारंपरिक टेनिस से अलग पहचान दी है और आने वाले वर्षों में भारत में इस खेल का विस्तार और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि भारत के पास ग्रासरूट इन्फ्रास्ट्रक्चर का वह आधार नहीं है जो जापान, साउथ कोरिया या ताइवान के पास है। एक मेडल उत्साह ज़रूर जगाता है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि खेल महासंघ इस लम्हे को दीर्घकालिक नीति और संसाधन आवंटन में बदल पाते हैं या नहीं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सॉफ्ट टेनिस क्या है और यह सामान्य टेनिस से कैसे अलग है?
सॉफ्ट टेनिस एक रैकेट खेल है जो 1884 में जापान में पारंपरिक टेनिस से विकसित हुआ। इसमें कठोर गेंद की बजाय हल्की हवा भरी नरम रबर की गेंद (31 ग्राम, 6.6 सेमी व्यास) और हल्के रैकेट का उपयोग होता है। अंक प्रणाली और सर्विस नियम भी पारंपरिक टेनिस से भिन्न हैं।
सॉफ्ट टेनिस की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
सॉफ्ट टेनिस की उत्पत्ति 1884 में जापान में हुई। 19वीं शताब्दी के अंत में एक पश्चिमी मिशनरी टेनिस को जापान लाए, जिसके बाद जापानियों ने इसे स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार ढालकर सॉफ्ट टेनिस का रूप दिया।
एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस कब शामिल हुआ?
सॉफ्ट टेनिस को 1990 में एशियन गेम्स में प्रदर्शनी खेल के रूप में और 1994 में आधिकारिक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने इस स्पर्धा में भारत का पहला मेडल जीता।
सॉफ्ट टेनिस में मैच जीतने के क्या नियम हैं?
एकल मैच में 7 गेम में से पहले 4 गेम जीतने वाला खिलाड़ी विजेता होता है, जबकि युगल में 9 गेम में से पहले 5 गेम जीतने वाली टीम जीतती है। 3-3 की बराबरी पर टाई-ब्रेक फाइनल गेम खेला जाता है जिसमें 7 अंक जीतने होते हैं।
दुनिया में कितने देश सॉफ्ट टेनिस खेलते हैं?
इंटरनेशनल सॉफ्ट टेनिस महासंघ के अनुसार, अब लगभग 65 देश इस खेल में भाग लेते हैं, जिनमें जापान, साउथ कोरिया, ताइवान के साथ-साथ भारत भी शामिल है। महासंघ की स्थापना 1973 में हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले