सुमित नागल का पॉज्नान चैलेंजर में अंपायरिंग पर फूटा गुस्सा, ATP/ITF से तकनीक अपनाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारत के शीर्ष एकल टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने पॉज्नान चैलेंजर में अपने पहले दौर के मैच के दौरान हुई एक विवादित अंपायरिंग कॉल के बाद सोशल मीडिया पर खुलकर नाराज़गी जताई। 16 जून 2026 को पोस्ट किए गए अपने बयान में 28 वर्षीय नागल ने कहा कि वे 'बहुत निराश और टूटा हुआ' महसूस कर रहे हैं और एसोसिएशन ऑफ टेनिस प्रोफेशनल्स (ATP) तथा इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) से चैलेंजर स्तर के मैचों में तकनीक का उपयोग अनिवार्य करने का आग्रह किया।
मैच में क्या हुआ
नागल के अनुसार, एक अहम पॉइंट के दौरान वे उस गेंद की ओर दौड़े जो उनके मुताबिक 'साफ तौर पर आउट' थी। मैच में मौजूद लाइन्समैन और चेयर अंपायर — दोनों में से किसी ने भी कॉल नहीं की। नागल ने तुरंत हाथ उठाकर अपील की, लेकिन चेयर अंपायर ने न केवल यह कहा कि उन्होंने अपील नहीं देखी, बल्कि बाउंस मार्क जाँचने के लिए कुर्सी से नीचे उतरने से भी इनकार कर दिया।
नागल ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ATP नियमों के तहत एक खिलाड़ी को गेंद के बाउंस होने के बाद एक बार स्ट्राइक करने और फिर भी कॉल को चुनौती देने की अनुमति है, बशर्ते इससे खेल पर कोई असर न पड़े। उनका कहना था कि उनकी अपील इन्हीं दिशा-निर्देशों के अंतर्गत थी।
तीन गलत कॉल का आरोप
नागल ने कहा, 'मुझे एक ही पॉइंट पर 3 गलत कॉल मिले — कोई कॉल नहीं आई, रेफरी ने मार्क चेक करने से मना किया, और रेफरी ने मेरी अपील नहीं देखी।' उन्होंने स्वीकार किया कि उस पॉइंट के बाद आगे बढ़ना उनके लिए 'भावनात्मक तौर पर बेहद मुश्किल' था।
जवाबदेही पर सवाल
नागल ने अंपायरों की जवाबदेही की कमी पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि खिलाड़ियों को जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए आर्थिक दंड भुगतना पड़ता है, जबकि चेयर अंपायरों पर कोई समकक्ष दंड नहीं होता। उनके शब्दों में, 'खिलाड़ियों पर पैसे कमाने के लिए जीतने का अतिरिक्त दबाव होता है, जबकि अंपायरों को जीतने की ज़रूरत नहीं होती।' यह टिप्पणी टेनिस जगत में खिलाड़ी-अंपायर शक्ति-संतुलन पर एक व्यापक बहस को जन्म देती है।
ATP और ITF से तकनीक अपनाने की माँग
नागल ने अपनी पोस्ट के अंत में ATP और ITF से विनम्र लेकिन दृढ़ अपील की। उन्होंने कहा, '2026 में, जब तकनीक का फायदा उठाया जा सकता है, तो मैच सिर्फ रेफरी पर निर्भर नहीं होने चाहिए।' उन्होंने चैलेंजर स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक लाइन-कॉलिंग तकनीक या समकक्ष प्रणाली लागू करने की माँग की ताकि खिलाड़ी अपना बचाव कर सकें।
गौरतलब है कि ग्रैंड स्लैम और ATP Tour स्तर पर Hawk-Eye जैसी तकनीक पहले से प्रचलित है, लेकिन चैलेंजर और ITF सर्किट के अधिकांश टूर्नामेंट अभी भी पारंपरिक लाइन्समैन पर निर्भर हैं। नागल की यह माँग उन कई खिलाड़ियों की आवाज़ बन सकती है जो निचले सर्किट में इसी समस्या से जूझते हैं।