सुनील छेत्री: मेसी का रिकॉर्ड तोड़ने वाले भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े सितारे
सारांश
मुख्य बातें
सुनील छेत्री — भारतीय फुटबॉल का वह नाम जिसने न केवल राष्ट्रीय टीम के लिए सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि लियोनेल मेसी के 64 अंतरराष्ट्रीय गोल के आँकड़े को भी पीछे छोड़ा। 3 अगस्त 1984 को तत्कालीन आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में जन्मे छेत्री ने अपने करियर में भारतीय फुटबॉल को एक नई पहचान और गरिमा दिलाई।
फुटबॉल की विरासत जो रगों में उतरी
सुनील छेत्री का फुटबॉल से नाता महज जुनून नहीं, बल्कि विरासत भी है। उनके पिता केबी छेत्री भारतीय सेना में रहे और खुद एक बेहतरीन फुटबॉलर थे। उनकी माँ सुशीला छेत्री नेपाल की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रह चुकी थीं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने सुनील में खेल के प्रति स्वाभाविक लगाव पैदा किया।
पिता के सेना में होने के कारण बार-बार तबादले हुए और सुनील को अलग-अलग शहरों में रहकर बार-बार स्कूल बदलने पड़े। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में उन्होंने कभी पेशेवर फुटबॉलर बनने का सपना नहीं देखा था — वे फुटबॉल इसलिए खेलते थे ताकि किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल सके।
प्रतिभा की पहचान और शुरुआती सफर
जब सुनील 12वीं कक्षा में थे, तब उन्हें कुआलालंपुर में आयोजित एशियन स्कूल चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में जगह मिली। इसी दौरान ऐतिहासिक क्लब मोहन बागान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने दल में शामिल किया। इसके बाद छेत्री ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उन्होंने 2005 में भारतीय सीनियर टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। 2007 में पहले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 4 गोल दागते हुए भारत को 1997 के बाद पहली बार ट्रॉफी दिलाई। 2008 के एएफसी चैलेंज कप में उन्होंने 4 गोल किए, जिनमें फाइनल में हैट्रिक भी शामिल थी — और भारत ने टूर्नामेंट जीता। इसी से उन्हें भारतीय फुटबॉल का 'पोस्टर ब्वॉय' कहा जाने लगा।
रिकॉर्ड और उपलब्धियाँ
सैफ चैंपियनशिप 2011 में छेत्री ने एक सीज़न में 7 गोल दागकर सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड बनाया। उन्हें 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया और भारत ने खिताब अपने नाम किया। 2012 में उन्हें पहली बार एएफसी चैलेंज कप क्वालिफायर्स में भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई और उसी वर्ष उन्होंने भारत को नेहरू कप भी जिताया।
इंटरकांटिनेंटल कप 2018 में सुनील छेत्री ने अपना 100वाँ अंतरराष्ट्रीय मैच खेला और इसी टूर्नामेंट में लियोनेल मेसी के 64 अंतरराष्ट्रीय गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया — यह भारतीय फुटबॉल के इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण था।
छेत्री रिकॉर्ड सात बार ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) प्लेयर ऑफ द ईयर रहे — 2007, 2011, 2013, 2014, 2017, 2018-19 और 2021-22 में। वे जेसीटी, ईस्ट बंगाल और डेम्पो जैसे प्रतिष्ठित क्लबों के लिए करीब 8 वर्षों तक खेले।
विदेशी क्लबों का अनुभव
2007 में छेत्री इंग्लैंड के कोवेंट्री सिटी के लिए ट्रायल देने गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद लंदन के क्वींस पार्क रेंजर्स ने उनके साथ अनुबंध किया, परंतु वर्क परमिट की समस्या आड़े आ गई। 2010 में वे यूएसए की मेजर लीग सॉकर में कैनसस सिटी विजार्ड्स के लिए साइन हुए और विदेशी फुटबॉल क्लब में खेलने वाले तीसरे भारतीय बन गए। 2012 में स्पोर्टिंग क्लुब डे पुर्तगाल ने भी उन्हें बुलावा दिया।
स्वदेश लौटकर उन्होंने बेंगलुरु एफसी के साथ आई-लीग में कदम रखा। 2015 में इंडियन सुपर लीग (ISL) की शुरुआत में वे सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी रहे और अगले सीज़न में मुंबई सिटी एफसी को प्लेऑफ तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
सम्मान और विरासत
भारतीय फुटबॉल में अतुलनीय योगदान के लिए सुनील छेत्री को 2011 में अर्जुन पुरस्कार, 2019 में पद्म श्री और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अनुशासन, कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे से उन्होंने साबित किया है कि समर्पण से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। भारतीय फुटबॉल की अगली पीढ़ी के लिए छेत्री सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, एक संस्था हैं।