कैसे मार्केटिंग रिसर्च ने टी20 क्रिकेट को दी नई पहचान?
सारांश
Key Takeaways
- टी20 क्रिकेट की शुरुआत 2003 में हुई।
- इस फॉर्मेट ने क्रिकेट को नया जीवन दिया।
- भारत ने पहला टी20 वर्ल्ड कप 2007 में जीता।
- आईपीएल की शुरुआत 2008 में हुई।
- टी20 क्रिकेट ने दर्शकों को फिर से आकर्षित किया।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भले ही भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में विजय प्राप्त की है, लेकिन 28 मार्च से शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के साथ यह क्रिकेट प्रारूप एक बार फिर से प्रशंसकों का ध्यान खींचने के लिए तैयार है। टी20 क्रिकेट को दो दशकों में इतनी लोकप्रियता मिली है। आइए, इसके पीछे की दिलचस्प कहानी पर ध्यान दें।
टी20 क्रिकेट की शुरुआत खेल को तेज, रोमांचक और दर्शकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से की गई थी। पारंपरिक टेस्ट और वनडे की तुलना में यह छोटा प्रारूप तेजी से लोकप्रिय हुआ, जिसमें आक्रामक बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी और फुर्तीली फील्डिंग का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है।
टी20 फॉर्मेट की परिकल्पना का श्रेय इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव स्टुअर्ट रॉबर्टसन को जाता है, जिनकी सोच ने 21वीं सदी में क्रिकेट को नई दिशा दी। 21वीं सदी की शुरुआत में काउंटी मुकाबलों में दर्शकों की संख्या में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आई थी। अधिकारियों को चिंता थी कि पारंपरिक दर्शक क्रिकेट से क्यों दूर हो रहे हैं और नए फैंस कैसे आएंगे?
स्टुअर्ट रॉबर्टसन को एक मार्केट रिसर्च सर्वे का कार्य सौंपा गया, जिसमें लगभग ढाई लाख पाउंड का खर्च आया। इस सर्वे ने क्रिकेट की छवि से जुड़े मुद्दे को उजागर किया।
सर्वे में यह बात सामने आई कि अधिकांश मैच उस समय खेले जा रहे थे जब लोग अन्य कार्यों में व्यस्त होते थे। प्रशंसकों के पास मैच का परिणाम जानने का समय नहीं था। उस समय क्रिकेट का सबसे छोटा फॉर्मेट भी पूरे दिन का समय ले रहा था।
वनडे मुकाबलों में शुरुआती 15 ओवरों के बाद जब फील्डिंग पर पाबंदियां हटती थीं, तो खिलाड़ी 45वें ओवर के बीच सिंगल-डबल लेकर स्कोर बढ़ाते थे। यह समय उनके लिए नीरस होता था। रॉबर्टसन ने सुझाव दिया कि इन ओवर्स को हटा दिया जाए, जिससे खेल मजेदार बन सके। इससे मैच 7-8 घंटे के बजाय लगभग 3 घंटे में समाप्त होगा। यह शाम को खेला जा सकता था जब लोग अपने काम निबटा लेते थे।
स्टुअर्ट रॉबर्टसन ने ईसीबी के साथ मिलकर काम किया और अंततः 20-ओवरों के टूर्नामेंट के लिए काउंटी चेयरमैन के सामने वोटिंग रखी। यह टूर्नामेंट बेंसन एंड हेजेस कप की जगह लेने वाला था, जिसमें 11-7 की वोटिंग हुई।
13 जून 2003 को ईसीबी ने काउंटी क्रिकेट में इस फॉर्मेट की शुरुआत की, जिसे काफी सराहा गया। पहला घरेलू मैच हैंपशायर हॉक्स और ससेक्स शार्क के बीच खेला गया, जिसमें हॉक्स ने 5 रन से जीत हासिल की।
टी20 क्रिकेट के प्रारंभिक दौर में कई दिग्गज खिलाड़ियों ने इस प्रारूप को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एंड्रयू साइमंड्स, क्रिस गेल, ब्रैंडन मैक्कुलम, शाहिद अफरीदी और एबी डिविलियर्स जैसे बल्लेबाजों ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए ख्याति प्राप्त की। वहीं, लसिथ मलिंगा और डेल स्टेन जैसे गेंदबाजों ने भी टी20 में अपनी विशेष पहचान बनाई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला टी20 मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच 17 फरवरी 2005 को खेला गया, जबकि भारत ने 1 दिसंबर 2006 को अपना पहला टी20 मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला, जिसे 6 विकेट से जीता। पहला टी20 वर्ल्ड कप 2007 में आयोजित किया गया, जिसमें भारत चैंपियन बना।
भारत में आईपीएल की शुरुआत 2008 में हुई, जिसके पहले साल में इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) ने लोकप्रियता हासिल की थी। इस लीग का उद्देश्य गली क्रिकेट का स्तर बढ़ाकर पेशेवर खिलाड़ियों को मंच प्रदान करना था।
टी20 प्रारूप ने न केवल इस खेल को लोकप्रिय बनाया, बल्कि दर्शकों की घटती रुचि के बीच इसे नया जीवन भी प्रदान किया। यही कारण है कि आज के समय में यह प्रारूप अपनी चमक बिखेर रहा है।