विष्णु वाघेला: दृष्टिहीनता को हराकर बने भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के बनासकांठा जिले की पालनपुर तालुका के छोटे से वाडा गाँव से निकले विष्णु वाघेला आज भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। बचपन में आँखों की रोशनी चली जाने के बावजूद उन्होंने फुटबॉल के प्रति अपना जुनून जीवित रखा और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। उनकी यह यात्रा न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गाँव के लिए गर्व का विषय बन चुकी है।
संघर्ष से शुरू हुई सफलता की राह
विष्णु के पिता तेजूभाई वाघेला ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को पहले पढ़ाई के लिए थरा भेजा, जहाँ से वे पालनपुर और फिर अहमदाबाद पहुँचे। अहमदाबाद में ही विष्णु ने फुटबॉल की दुनिया में कदम रखा। गाँव के लोगों के अटूट समर्थन और परिवार के हौसले ने उन्हें हर मुश्किल से उबरने की ताकत दी। राज्य स्तर पर अपनी छाप छोड़ने के बाद विष्णु ने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मैदान पर दोहरी भूमिका, दोहरी पहचान
विष्णु वाघेला ने बताया, 'मैं करीब 10 देशों में खेलने जा चुका हूँ। 2-3 टूर पर मैंने 'बेस्ट प्लेयर' का खिताब भी अपने नाम किया है। मैं भारतीय टीम के लिए बतौर डिफेंडर खेलता हूँ, जबकि गुजरात टीम के लिए स्ट्राइकर के तौर पर। मुझे तीन बार टॉप स्कोरर का अवॉर्ड भी मिल चुका है।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में दिव्यांग खेलों को लेकर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है।
ब्रिक्स टूर्नामेंट में चमके विष्णु
साल 2025 में मॉस्को में आयोजित ब्रिक्स ब्लाइंड फुटबॉल टूर्नामेंट में विष्णु ने ब्राजील के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर 'बेस्ट प्लेयर' का पुरस्कार हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल के इतिहास में एक उल्लेखनीय पड़ाव मानी जा रही है।
बीपीए और गुजरात सरकार की भूमिका
अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (BPA) ने विष्णु की प्रतिभा को तराशने में अहम भूमिका निभाई। BPA के महासचिव भूषण पुनानी ने कहा, 'मंडल के पास नाज गाँव में एक अत्याधुनिक फुटबॉल ग्राउंड है। यहाँ दूसरी बार प्रीमियर लीग में मैच हुआ है। आज के वक्त में गुजरात, विष्णु वाघेला की हिम्मत, पहल और साहस से 'फुटबॉल फॉर द ब्लाइंड' में पूरे देश में अग्रणी राज्य है।' गुजरात सरकार भी दिव्यांग खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएँ, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन दे रही है।
प्रेरणा की मिसाल
विष्णु वाघेला आज गुजरात और देशभर के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक सहयोग से कोई भी बाधा अजेय नहीं होती। आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद की जा रही है।