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विष्णु वाघेला: दृष्टिहीनता को हराकर बने भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान

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विष्णु वाघेला: दृष्टिहीनता को हराकर बने भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान

सारांश

आँखों की रोशनी गँवाने के बाद भी विष्णु वाघेला ने फुटबॉल का सपना नहीं छोड़ा — वाडा गाँव से निकलकर वे भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान बने, 10 देशों में खेले और 2025 ब्रिक्स टूर्नामेंट में 'बेस्ट प्लेयर' का खिताब जीता।

मुख्य बातें

विष्णु वाघेला गुजरात के बनासकांठा जिले के वाडा गाँव से हैं और भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान हैं।
उन्होंने अब तक करीब 10 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और 3 बार टॉप स्कोरर का अवॉर्ड जीता है।
साल 2025 में मॉस्को में हुए ब्रिक्स ब्लाइंड फुटबॉल टूर्नामेंट में ब्राजील के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर 'बेस्ट प्लेयर' का पुरस्कार हासिल किया।
अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (BPA) ने उन्हें अत्याधुनिक ग्राउंड और प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराईं।
BPA महासचिव भूषण पुनानी के अनुसार, गुजरात 'फुटबॉल फॉर द ब्लाइंड' में देशभर में अग्रणी राज्य बन चुका है।

गुजरात के बनासकांठा जिले की पालनपुर तालुका के छोटे से वाडा गाँव से निकले विष्णु वाघेला आज भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। बचपन में आँखों की रोशनी चली जाने के बावजूद उन्होंने फुटबॉल के प्रति अपना जुनून जीवित रखा और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। उनकी यह यात्रा न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गाँव के लिए गर्व का विषय बन चुकी है।

संघर्ष से शुरू हुई सफलता की राह

विष्णु के पिता तेजूभाई वाघेला ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को पहले पढ़ाई के लिए थरा भेजा, जहाँ से वे पालनपुर और फिर अहमदाबाद पहुँचे। अहमदाबाद में ही विष्णु ने फुटबॉल की दुनिया में कदम रखा। गाँव के लोगों के अटूट समर्थन और परिवार के हौसले ने उन्हें हर मुश्किल से उबरने की ताकत दी। राज्य स्तर पर अपनी छाप छोड़ने के बाद विष्णु ने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मैदान पर दोहरी भूमिका, दोहरी पहचान

विष्णु वाघेला ने बताया, 'मैं करीब 10 देशों में खेलने जा चुका हूँ। 2-3 टूर पर मैंने 'बेस्ट प्लेयर' का खिताब भी अपने नाम किया है। मैं भारतीय टीम के लिए बतौर डिफेंडर खेलता हूँ, जबकि गुजरात टीम के लिए स्ट्राइकर के तौर पर। मुझे तीन बार टॉप स्कोरर का अवॉर्ड भी मिल चुका है।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में दिव्यांग खेलों को लेकर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है।

ब्रिक्स टूर्नामेंट में चमके विष्णु

साल 2025 में मॉस्को में आयोजित ब्रिक्स ब्लाइंड फुटबॉल टूर्नामेंट में विष्णु ने ब्राजील के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर 'बेस्ट प्लेयर' का पुरस्कार हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल के इतिहास में एक उल्लेखनीय पड़ाव मानी जा रही है।

बीपीए और गुजरात सरकार की भूमिका

अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (BPA) ने विष्णु की प्रतिभा को तराशने में अहम भूमिका निभाई। BPA के महासचिव भूषण पुनानी ने कहा, 'मंडल के पास नाज गाँव में एक अत्याधुनिक फुटबॉल ग्राउंड है। यहाँ दूसरी बार प्रीमियर लीग में मैच हुआ है। आज के वक्त में गुजरात, विष्णु वाघेला की हिम्मत, पहल और साहस से 'फुटबॉल फॉर द ब्लाइंड' में पूरे देश में अग्रणी राज्य है।' गुजरात सरकार भी दिव्यांग खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएँ, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन दे रही है।

प्रेरणा की मिसाल

विष्णु वाघेला आज गुजरात और देशभर के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक सहयोग से कोई भी बाधा अजेय नहीं होती। आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की तरफ भी इशारा करती है — भारत में दिव्यांग खेलों को अभी भी 'व्यक्तिगत संघर्ष' की कहानी के रूप में पेश किया जाता है, न कि एक सुव्यवस्थित खेल पारिस्थितिकी तंत्र की उपज के रूप में। गौरतलब है कि गुजरात जैसे राज्य में BPA जैसी संस्था की मेहनत के बावजूद, ब्लाइंड फुटबॉल को अभी तक राष्ट्रीय खेल नीति में वह स्थान नहीं मिला जिसका वह हकदार है। जब तक संरचनात्मक समर्थन — बजट, कोचिंग ढाँचा, और स्काउटिंग नेटवर्क — नहीं बनता, विष्णु जैसे खिलाड़ी अपवाद बने रहेंगे, नियम नहीं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विष्णु वाघेला कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
विष्णु वाघेला गुजरात के बनासकांठा जिले के वाडा गाँव से हैं और भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। बचपन में दृष्टि खोने के बावजूद उन्होंने 10 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 2025 के ब्रिक्स ब्लाइंड फुटबॉल टूर्नामेंट में 'बेस्ट प्लेयर' का खिताब जीता।
विष्णु वाघेला ने ब्रिक्स टूर्नामेंट में क्या उपलब्धि हासिल की?
साल 2025 में मॉस्को में आयोजित ब्रिक्स ब्लाइंड फुटबॉल टूर्नामेंट में विष्णु ने ब्राजील के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और 'बेस्ट प्लेयर' का पुरस्कार जीता। यह भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (BPA) ने विष्णु की मदद कैसे की?
अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन ने विष्णु को नाज गाँव स्थित अत्याधुनिक फुटबॉल ग्राउंड और पेशेवर प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। BPA के महासचिव भूषण पुनानी के अनुसार, इसी समर्थन से गुजरात 'फुटबॉल फॉर द ब्लाइंड' में देशभर में अग्रणी राज्य बन सका है।
विष्णु वाघेला भारतीय और गुजरात टीम में कौन-सी भूमिका निभाते हैं?
विष्णु भारतीय राष्ट्रीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम में डिफेंडर की भूमिका निभाते हैं, जबकि गुजरात राज्य टीम के लिए वे स्ट्राइकर के रूप में खेलते हैं। उन्हें अब तक तीन बार टॉप स्कोरर का अवॉर्ड मिल चुका है।
गुजरात सरकार दिव्यांग खिलाड़ियों को कैसे प्रोत्साहित कर रही है?
गुजरात सरकार दिव्यांग खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएँ और प्रशिक्षण प्रदान कर रही है, साथ ही उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी नीति के परिणामस्वरूप विष्णु वाघेला जैसे खिलाड़ी देश-विदेश में गुजरात का नाम रोशन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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