यूसुफ पठान प्लॉट विवाद: गुजरात सरकार ने ₹20.53 करोड़ के तांदलजा प्लॉट आवंटन को दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में स्थित एक विवादित प्लॉट के मामले में गुजरात सरकार की ओर से बड़ी राहत मिली है। 20 अक्टूबर 2026 को यह खबर सामने आई कि राज्य सरकार ने 978 वर्ग मीटर के उस प्लॉट को — जिसकी मौजूदा कीमत ₹20.53 करोड़ आँकी गई है — पठान को आवंटित करने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे कानूनी और प्रशासनिक विवाद के बाद आया है।
आवंटन की शर्तें और संरचना
सरकार के निर्णय के अनुसार, कुल 978 वर्ग मीटर भूमि में से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उद्देश्य के लिए निःशुल्क उपहार के रूप में दी जाएगी। शेष 478 वर्ग मीटर भूमि निर्धारित सरकारी मूल्य पर 45 प्रतिशत की छूट के साथ हस्तांतरित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि यह विवादित प्लॉट पठान परिवार के घर के निकट ही स्थित है।
राज्य सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय विशेष परिस्थितियों के आधार पर एकमात्र विशेष मामले के रूप में लिया गया है और इसे भविष्य में किसी अन्य मामले के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।
वडोदरा महानगरपालिका और राजस्व विभाग की भूमिका
राजस्व विभाग इस भूमि के बाजार मूल्य के बराबर एक अन्य भूखंड वडोदरा महानगरपालिका (VMC) को मुआवजे के रूप में आवंटित करेगा, ताकि नगर निकाय को कोई वित्तीय नुकसान न हो। हालाँकि, प्लॉट का अंतिम आवंटन VMC की स्थायी समिति और सामान्य सभा की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा।
विवाद की पृष्ठभूमि: 2012 से 2026 तक का सफर
यह मामला 2012 में शुरू हुआ था, जब यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम (VMC) से बिना नीलामी के एक प्लॉट 99 साल की लीज पर देने का अनुरोध किया था। उन्होंने अपने आवेदन में पूर्व क्रिकेटर होने और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का हवाला दिया था। उस समय प्लॉट की अनुमानित कीमत लगभग ₹5.6 करोड़ थी, जिसे चुकाने के लिए पठान तैयार थे।
VMC ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी, परंतु बिना नीलामी के सरकारी जमीन आवंटित करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य थी। 2014 में गुजरात के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इसके बाद भी नगर निगम ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव रद्द होने के बावजूद पठान ने भूमि के चारों ओर घेराबंदी कर ली।
2024 में VMC ने कथित अतिक्रमण हटाने के लिए यूसुफ पठान को नोटिस जारी किया। पठान ने इस नोटिस को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी। अगस्त 2025 में उच्च न्यायालय ने सरकार के उस मूल निर्णय को सही ठहराया, जिसमें आवंटन अस्वीकार किया गया था। जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह सवाल उठाया कि जब न तो भूमि का आवंटन हुआ और न ही कोई भुगतान या आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की गईं, तो किसी व्यक्ति का उस जमीन पर अधिकार कैसे माना जा सकता है। अंततः 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान ने उच्च न्यायालय से बिना किसी शर्त के अपनी याचिका वापस ले ली।
राजनीतिक परिदृश्य
गौरतलब है कि यूसुफ पठान हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए हैं। इस राजनीतिक बदलाव के बाद राज्य सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों की नजर बनी रहने की संभावना है।
अब नजरें VMC की स्थायी समिति और सामान्य सभा की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ इस आवंटन को अंतिम रूप दिया जाएगा।