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यूसुफ पठान प्लॉट विवाद: गुजरात सरकार ने ₹20.53 करोड़ के तांदलजा प्लॉट आवंटन को दी मंजूरी

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यूसुफ पठान प्लॉट विवाद: गुजरात सरकार ने ₹20.53 करोड़ के तांदलजा प्लॉट आवंटन को दी मंजूरी

सारांश

2012 में शुरू हुए तांदलजा प्लॉट विवाद में यूसुफ पठान को बड़ी राहत — गुजरात सरकार ने ₹20.53 करोड़ की 978 वर्ग मीटर जमीन के आवंटन को 'विशेष मामले' के रूप में मंजूरी दी, हालाँकि VMC की अंतिम मुहर अभी बाकी है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने यूसुफ पठान को वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में ₹20.53 करोड़ मूल्य के 978 वर्ग मीटर विवादित प्लॉट के आवंटन को मंजूरी दी।
500 वर्ग मीटर भूमि आवासीय उद्देश्य के लिए निःशुल्क उपहार के रूप में, और शेष 478 वर्ग मीटर निर्धारित मूल्य पर 45% छूट के साथ हस्तांतरित होगी।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विशेष मामले के रूप में लिया गया निर्णय है और भविष्य के लिए कोई मिसाल नहीं है।
राजस्व विभाग इस भूमि के मूल्य के बराबर दूसरी जमीन VMC को मुआवजे के रूप में देगा।
यह विवाद 2012 में शुरू हुआ था; 31 अगस्त 2026 को पठान ने गुजरात उच्च न्यायालय से अपनी याचिका वापस ली थी।
अंतिम आवंटन VMC की स्थायी समिति और सामान्य सभा की मंजूरी के बाद होगा।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में स्थित एक विवादित प्लॉट के मामले में गुजरात सरकार की ओर से बड़ी राहत मिली है। 20 अक्टूबर 2026 को यह खबर सामने आई कि राज्य सरकार ने 978 वर्ग मीटर के उस प्लॉट को — जिसकी मौजूदा कीमत ₹20.53 करोड़ आँकी गई है — पठान को आवंटित करने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे कानूनी और प्रशासनिक विवाद के बाद आया है।

आवंटन की शर्तें और संरचना

सरकार के निर्णय के अनुसार, कुल 978 वर्ग मीटर भूमि में से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उद्देश्य के लिए निःशुल्क उपहार के रूप में दी जाएगी। शेष 478 वर्ग मीटर भूमि निर्धारित सरकारी मूल्य पर 45 प्रतिशत की छूट के साथ हस्तांतरित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि यह विवादित प्लॉट पठान परिवार के घर के निकट ही स्थित है।

राज्य सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय विशेष परिस्थितियों के आधार पर एकमात्र विशेष मामले के रूप में लिया गया है और इसे भविष्य में किसी अन्य मामले के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।

वडोदरा महानगरपालिका और राजस्व विभाग की भूमिका

राजस्व विभाग इस भूमि के बाजार मूल्य के बराबर एक अन्य भूखंड वडोदरा महानगरपालिका (VMC) को मुआवजे के रूप में आवंटित करेगा, ताकि नगर निकाय को कोई वित्तीय नुकसान न हो। हालाँकि, प्लॉट का अंतिम आवंटन VMC की स्थायी समिति और सामान्य सभा की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा।

विवाद की पृष्ठभूमि: 2012 से 2026 तक का सफर

यह मामला 2012 में शुरू हुआ था, जब यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम (VMC) से बिना नीलामी के एक प्लॉट 99 साल की लीज पर देने का अनुरोध किया था। उन्होंने अपने आवेदन में पूर्व क्रिकेटर होने और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का हवाला दिया था। उस समय प्लॉट की अनुमानित कीमत लगभग ₹5.6 करोड़ थी, जिसे चुकाने के लिए पठान तैयार थे।

VMC ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी, परंतु बिना नीलामी के सरकारी जमीन आवंटित करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य थी। 2014 में गुजरात के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इसके बाद भी नगर निगम ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव रद्द होने के बावजूद पठान ने भूमि के चारों ओर घेराबंदी कर ली।

2024 में VMC ने कथित अतिक्रमण हटाने के लिए यूसुफ पठान को नोटिस जारी किया। पठान ने इस नोटिस को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी। अगस्त 2025 में उच्च न्यायालय ने सरकार के उस मूल निर्णय को सही ठहराया, जिसमें आवंटन अस्वीकार किया गया था। जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह सवाल उठाया कि जब न तो भूमि का आवंटन हुआ और न ही कोई भुगतान या आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की गईं, तो किसी व्यक्ति का उस जमीन पर अधिकार कैसे माना जा सकता है। अंततः 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान ने उच्च न्यायालय से बिना किसी शर्त के अपनी याचिका वापस ले ली।

राजनीतिक परिदृश्य

गौरतलब है कि यूसुफ पठान हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए हैं। इस राजनीतिक बदलाव के बाद राज्य सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों की नजर बनी रहने की संभावना है।

अब नजरें VMC की स्थायी समिति और सामान्य सभा की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ इस आवंटन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। पठान की हालिया पार्टी-बदली और इस निर्णय का समय-संयोग भी ध्यान खींचता है। VMC की अंतिम मुहर से पहले यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या नगर निकाय इस आवंटन की शर्तों की स्वतंत्र समीक्षा करता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूसुफ पठान का वडोदरा प्लॉट विवाद क्या है?
यह विवाद 2012 से चला आ रहा है, जब यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से तांदलजा क्षेत्र में एक प्लॉट बिना नीलामी के 99 साल की लीज पर माँगा था। 2014 में राज्य सरकार ने प्रस्ताव नामंजूर कर दिया था, लेकिन 20 अक्टूबर 2026 को उसी सरकार ने ₹20.53 करोड़ मूल्य के 978 वर्ग मीटर प्लॉट के आवंटन को विशेष मामले के रूप में मंजूरी दे दी।
गुजरात सरकार ने यूसुफ पठान को कितनी जमीन और किन शर्तों पर देने का फैसला किया?
कुल 978 वर्ग मीटर भूमि में से 500 वर्ग मीटर आवासीय उद्देश्य के लिए निःशुल्क उपहार के रूप में दी जाएगी, जबकि शेष 478 वर्ग मीटर निर्धारित सरकारी मूल्य पर 45 प्रतिशत की छूट के साथ हस्तांतरित की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल इस विशेष मामले तक सीमित है।
क्या प्लॉट का आवंटन अभी अंतिम हो गया है?
नहीं, अभी राज्य सरकार की मंजूरी मिली है। अंतिम आवंटन वडोदरा महानगरपालिका (VMC) की स्थायी समिति और सामान्य सभा की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा।
यूसुफ पठान ने गुजरात उच्च न्यायालय से याचिका क्यों वापस ली थी?
जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने खुद यह सवाल उठाया था कि बिना आवंटन, भुगतान या औपचारिकताओं के किसी का जमीन पर अधिकार कैसे माना जा सकता है। इसके बाद 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान ने बिना किसी शर्त के अपनी याचिका वापस ले ली।
इस फैसले से वडोदरा महानगरपालिका को कोई नुकसान होगा?
राज्य सरकार ने इसके लिए व्यवस्था की है कि राजस्व विभाग इस भूमि के बाजार मूल्य के बराबर एक अन्य भूखंड VMC को मुआवजे के रूप में आवंटित करेगा, ताकि नगर निकाय को वित्तीय नुकसान न हो।
राष्ट्र प्रेस
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