युवराज सिंह के पर्सनैलिटी राइट्स केस में दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश, 48 घंटे में हटेंगे आपत्तिजनक पोस्ट
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह को उनके पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की सुरक्षा से जुड़े मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई को महत्वपूर्ण राहत दी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह युवराज के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश पारित करेगा, और सोशल मीडिया पर मौजूद सभी आपत्तिजनक एवं अनधिकृत पोस्ट को 48 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ कर रही है। युवराज सिंह के वकील ने न्यायालय में उन आपत्तिजनक ऑनलाइन पोस्ट के लिंक की सूची प्रस्तुत की, जो पूर्व क्रिकेटर की सहमति के बिना प्रकाशित की गई थीं। वकील ने बताया कि इनमें से दो लिंक पहले ही हटाए जा चुके हैं।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि युवराज की अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व गुणों — जैसे नाम, छवि और प्रतिष्ठा — का उपयोग कर आर्थिक लाभ के लिए उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जो उनके पर्सनैलिटी राइट्स का स्पष्ट उल्लंघन है।
Reddit विवाद और मानहानि का पहलू
उल्लंघन से जुड़े लिंकों में एक पोस्ट Reddit से संबंधित था, जिसमें युवराज सिंह पर महिलाओं के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था और उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ भी की गई थीं। Reddit की ओर से पेश वकील ने इस लिंक को दो वर्ष पुराना बताते हुए तर्क दिया कि यह पर्सनैलिटी राइट्स का नहीं, बल्कि मानहानि का मामला है।
न्यायालय का आदेश और अगली प्रक्रिया
न्यायमूर्ति सिंह ने वाद को मुकदमे के रूप में दर्ज करते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर नोटिस जारी किया। सभी मध्यस्थों (intermediaries) को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कंटेंट अपलोडर निर्धारित 48 घंटों में लिंक नहीं हटाता, तो युवराज सिंह को मध्यस्थों की सहायता से उसे अगले 36 घंटों में हटवाने की अनुमति दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित है।
पर्सनैलिटी राइट्स का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में सेलिब्रिटी के व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर न्यायिक जागरूकता बढ़ रही है। इससे पहले भी अनेक फिल्मी और खेल हस्तियों ने अपनी छवि के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग के विरुद्ध न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अभी कोई विशेष कानून नहीं है — न्यायालय इसे सामान्य विधि और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गोपनीयता के अधिकार से जोड़कर देखते हैं। युवराज सिंह का यह मामला इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।