29 जुलाई 2026
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युवराज सिंह के पर्सनैलिटी राइट्स केस में दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश, 48 घंटे में हटेंगे आपत्तिजनक पोस्ट

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युवराज सिंह के पर्सनैलिटी राइट्स केस में दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश, 48 घंटे में हटेंगे आपत्तिजनक पोस्ट

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने युवराज सिंह के पर्सनैलिटी राइट्स केस में अंतरिम राहत देते हुए 48 घंटे में आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का आदेश दिया। यह मामला भारत में सेलिब्रिटी के व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर एक अहम न्यायिक मिसाल बन सकता है।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई को युवराज सिंह के पर्सनैलिटी राइट्स केस में अंतरिम राहत दी।
न्यायालय ने सोशल मीडिया पर मौजूद सभी आपत्तिजनक और अनधिकृत पोस्ट को 48 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने वाद दर्ज कर मध्यस्थों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
युवराज की सहमति के बिना उनकी छवि का उपयोग कर आर्थिक लाभ के लिए उत्पाद बेचे जाने का आरोप है।
Reddit से जुड़े एक लिंक पर Reddit के वकील ने इसे मानहानि का मामला बताया, पर्सनैलिटी राइट्स का नहीं।
मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह को उनके पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की सुरक्षा से जुड़े मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई को महत्वपूर्ण राहत दी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह युवराज के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश पारित करेगा, और सोशल मीडिया पर मौजूद सभी आपत्तिजनक एवं अनधिकृत पोस्ट को 48 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ कर रही है। युवराज सिंह के वकील ने न्यायालय में उन आपत्तिजनक ऑनलाइन पोस्ट के लिंक की सूची प्रस्तुत की, जो पूर्व क्रिकेटर की सहमति के बिना प्रकाशित की गई थीं। वकील ने बताया कि इनमें से दो लिंक पहले ही हटाए जा चुके हैं।

वकील ने यह भी तर्क दिया कि युवराज की अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व गुणों — जैसे नाम, छवि और प्रतिष्ठा — का उपयोग कर आर्थिक लाभ के लिए उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जो उनके पर्सनैलिटी राइट्स का स्पष्ट उल्लंघन है।

Reddit विवाद और मानहानि का पहलू

उल्लंघन से जुड़े लिंकों में एक पोस्ट Reddit से संबंधित था, जिसमें युवराज सिंह पर महिलाओं के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था और उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ भी की गई थीं। Reddit की ओर से पेश वकील ने इस लिंक को दो वर्ष पुराना बताते हुए तर्क दिया कि यह पर्सनैलिटी राइट्स का नहीं, बल्कि मानहानि का मामला है।

न्यायालय का आदेश और अगली प्रक्रिया

न्यायमूर्ति सिंह ने वाद को मुकदमे के रूप में दर्ज करते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर नोटिस जारी किया। सभी मध्यस्थों (intermediaries) को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कंटेंट अपलोडर निर्धारित 48 घंटों में लिंक नहीं हटाता, तो युवराज सिंह को मध्यस्थों की सहायता से उसे अगले 36 घंटों में हटवाने की अनुमति दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित है।

पर्सनैलिटी राइट्स का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में सेलिब्रिटी के व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर न्यायिक जागरूकता बढ़ रही है। इससे पहले भी अनेक फिल्मी और खेल हस्तियों ने अपनी छवि के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग के विरुद्ध न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अभी कोई विशेष कानून नहीं है — न्यायालय इसे सामान्य विधि और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गोपनीयता के अधिकार से जोड़कर देखते हैं। युवराज सिंह का यह मामला इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एकरूपता की कमी पैदा करता है। Reddit जैसे वैश्विक प्लेटफार्मों पर भारतीय न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना एक व्यावहारिक प्रश्न है जिसका उत्तर इस मामले की आगामी सुनवाइयों में मिलेगा। यह केस अंततः संसद को एक समर्पित 'पर्सनैलिटी राइट्स' कानून बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युवराज सिंह का पर्सनैलिटी राइट्स केस क्या है?
यह मामला पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह द्वारा दायर किया गया है, जिसमें उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनकी सहमति के बिना उनके नाम, छवि और व्यक्तित्व गुणों का उपयोग कर उत्पाद बेचे जा रहे हैं और आपत्तिजनक पोस्ट प्रकाशित की जा रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में अंतरिम राहत देते हुए 48 घंटे में आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने युवराज सिंह के मामले में क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने आदेश दिया कि सोशल मीडिया पर मौजूद सभी आपत्तिजनक और अनधिकृत पोस्ट को 48 घंटे के भीतर हटाया जाए। यदि अपलोडर ऐसा नहीं करता, तो युवराज सिंह को मध्यस्थों की सहायता से अगले 36 घंटों में कंटेंट हटवाने की अनुमति दी जाएगी।
Reddit के वकील ने इस मामले में क्या तर्क दिया?
Reddit की ओर से पेश वकील ने विवादित लिंक को दो वर्ष पुराना बताते हुए कहा कि यह पर्सनैलिटी राइट्स का नहीं, बल्कि मानहानि का मामला है। न्यायालय ने इस तर्क पर विचार करते हुए मध्यस्थों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित है। इससे पहले सभी मध्यस्थों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को कानूनी सुरक्षा कैसे मिलती है?
भारत में अभी पर्सनैलिटी राइट्स के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। न्यायालय इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार और सामान्य विधि के प्रावधानों से जोड़कर सुरक्षा प्रदान करते हैं। युवराज सिंह जैसे मामले इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल स्थापित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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