187 सांसद-विधायकों पर महिला अत्याचार के मामले, BJP सबसे आगे: ADR रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के 187 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने अपने शपथ पत्रों में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मामले घोषित किए हैं। दलवार विश्लेषण में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे ऊपर है, जिसके 106 वर्तमान जनप्रतिनिधियों पर ऐसे मुकदमे हैं। यह रिपोर्ट 24 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक की गई।
रिपोर्ट की पद्धति और दायरा
ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच ने देश के कुल 4,899 में से 4,881 वर्तमान सांसदों और विधायकों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया। इस विश्लेषण में पिछले पाँच वर्षों के दौरान इस्तीफे, मृत्यु या अन्य कारणों से हुए उपचुनावों के आँकड़े भी शामिल किए गए हैं।
कुल 772 वर्तमान सांसदों और 4,109 वर्तमान विधायकों में से 19 सांसदों और 168 विधायकों ने महिला अत्याचार से संबंधित मामले अपने हलफनामों में दर्ज कराए हैं।
दलवार स्थिति
दलों के अनुसार, BJP के 106 वर्तमान सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले हैं — जो किसी भी दल में सर्वाधिक है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के 20 और तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के 18 जनप्रतिनिधियों पर ऐसे मुकदमे दर्ज हैं।
गौरतलब है कि यह आँकड़ा घोषित मामलों पर आधारित है — अर्थात वे मुकदमे जो जनप्रतिनिधियों ने स्वयं अपने शपथ पत्रों में स्वीकार किए हैं। इनमें दोषसिद्धि और विचाराधीन दोनों प्रकार के मामले शामिल हो सकते हैं।
राज्यवार विश्लेषण
राज्यों में पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर है, जहाँ 69 वर्तमान सांसद और विधायक महिला अत्याचार से जुड़े मामले घोषित कर चुके हैं। आंध्र प्रदेश के 22 और ओडिशा के 17 जनप्रतिनिधि इस श्रेणी में आते हैं।
बलात्कार के मामले
रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू यह है कि 14 वर्तमान जनप्रतिनिधियों — जिनमें 2 लोकसभा सांसद और 12 विधायक शामिल हैं — पर कथित तौर पर बलात्कार के मुकदमे हैं। दलवार आँकड़ों के अनुसार, BJP के 2 सांसदों और 2 विधायकों तथा कांग्रेस के 4 विधायकों पर बलात्कार के मामले दर्ज हैं।
राष्ट्रीय अपराध परिदृश्य
रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों का भी उल्लेख है। NCRB के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,41,534 मामले दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन औसतन 1,210 मामले सामने आए। दिल्ली और तेलंगाना में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर राष्ट्रीय औसत — प्रति लाख महिला आबादी पर 64.6 मामले — से लगभग दोगुनी रही।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद में महिला सुरक्षा कानूनों की मज़बूती और त्वरित न्याय को लेकर बहस जारी है। ADR की रिपोर्ट आगामी विधानसभा सत्रों से पहले जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर नए सवाल खड़े करती है।