सोनम वांगचुक के समर्थन पर हुसैन दलवई का आमिर खान को आह्वान, नसीरुद्दीन शाह की हिम्मत की मिसाल दी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 17 जुलाई को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में अभिनेता आमिर खान से अपील की कि वे जलवायु एवं लद्दाख अधिकार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में खुलकर सामने आएँ। दलवई ने कहा कि महज सम्मान प्रकट करना पर्याप्त नहीं है — सक्रिय समर्थन ज़रूरी है।
आमिर खान से समर्थन की माँग
हुसैन दलवई ने कहा कि आमिर खान ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का उल्लेख करते हुए इसे 'तकलीफदेह स्थिति' बताया था, लेकिन सार्वजनिक समर्थन से परहेज किया। दलवई के अनुसार, 'आमिर खान अभी सोनम वांगचुक का सम्मान कर रहे हैं, लेकिन सम्मान से काम नहीं चलेगा — उन्हें आगे आकर समर्थन भी करना होगा।'
उन्होंने नसीरुद्दीन शाह का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सरकार की अच्छी नीतियों का समर्थन करते हैं और गलत होने पर आलोचना भी करते हैं। दलवई ने कहा, 'आमिर खान को भी उनसे सीख लेते हुए वैसी ही हिम्मत दिखानी चाहिए। कलाकार को कभी डरना नहीं चाहिए।'
सोनम वांगचुक के अनशन की तुलना गांधीवादी परंपरा से
कांग्रेस नेता ने सोनम वांगचुक के अनशन को भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले महात्मा गांधी भी देश की आज़ादी के लिए अनशन कर चुके हैं। उनके मुताबिक, 'यह इस देश की खासियत है कि लोग अनशन कर सिस्टम में सुधार की माँग करते हैं — ऐसे में अनशनकारियों के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए, तभी स्थिति सामान्य होगी।'
वंदे मातरम और 'वन नेशन वन इलेक्शन' पर रुख
हुसैन दलवई ने वंदे मातरम विधेयक पर कहा कि गीत से किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन गैर-हिंदुओं को इसे गाने के लिए जानबूझकर बाध्य करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गीत के अंतिम छंदों में देवी-देवताओं का उल्लेख है, जिसे व्यावहारिक जीवन में अनिवार्य बनाना सभी के लिए उचित नहीं है।
'वन नेशन वन इलेक्शन' के उन दावों को दलवई ने सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि इससे देश की जीडीपी में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान दिए बिना केवल जीडीपी के आँकड़ों का हवाला देना भ्रामक है।
एनसीपी-शिंदे मुलाकात और परिसीमन विधेयक पर प्रतिक्रिया
एनसीपी नेताओं की एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात पर दलवई ने कहा कि ये नेता सत्ता के बिना नहीं रह सकते। उनके अनुसार, जयंत पाटिल वित्त मंत्रालय चाहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वित्त और गृह मंत्रालय किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
परिसीमन विधेयक पर सुप्रिया सुले के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दलवई ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि शरद पवार कभी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाएँगे, क्योंकि पवार की राजनीतिक परवरिश कांग्रेस की विचारधारा और यशवंत राव चव्हाण की विरासत में हुई है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब लद्दाख के भविष्य और संवैधानिक दर्जे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है और सोनम वांगचुक का अनशन सुर्खियों में बना हुआ है।