सर्वदलीय बैठक अब महज औपचारिकता: आरजेडी सांसद मनोज झा बोले, 'फैसले लेने वाले आते ही नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मॉनसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज कुमार झा ने 19 जुलाई को इसकी उपयोगिता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन बैठकों का महत्व घटकर शून्य हो गया है और ये अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी हैं।
मुख्य आरोप: निर्णायक लोग बैठक से नदारद
झा ने कहा, 'सर्वदलीय बैठक में विपक्ष अपनी बात रखता है, लेकिन उन मुद्दों पर आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस बैठक का असल में कोई मतलब नहीं रह गया है। अब यह अपने मकसद को पूरा नहीं करती। जो लोग वास्तव में फैसले लेते हैं, वे बैठक में शामिल नहीं होते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन बैठकों की प्रासंगिकता पुनः स्थापित करनी है, तो केवल संवाद नहीं, उस पर अमल भी अनिवार्य है।
संसद के बदलते स्वरूप पर चिंता
विधायी कामकाज के संदर्भ में मनोज झा ने कहा कि असली चिंता केवल किसी सत्र में पेश होने वाले विधेयकों की संख्या नहीं है, बल्कि संसद का मूल स्वरूप बदल रहा है। उनके अनुसार, जनता जिस दल को जनादेश देती है, राजनीतिक परिस्थितियों के ज़रिए उसी जनादेश को पलटने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा, 'आपने बी के बजाय ए को वोट दिया, लेकिन अब आपके वोट की कोई कीमत नहीं रही। बी को ए में बदला जा रहा है और संसद का पूरा ढाँचा ही बदला जा रहा है। यह सिर्फ किसी एक पार्टी का नुकसान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।'
टीएमसी बागी सांसदों पर सवाल
झा ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को अलग बैठने की व्यवस्था दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी आधिकारिक मान्यता के इस गुट को एक अलग समूह के रूप में व्यवहार किया जा रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा इन्हें अलग समूह के रूप में संबोधित करने को उन्होंने गंभीर संवैधानिक प्रश्न बताया।
लोकतंत्र पर दीर्घकालिक असर
झा ने कहा कि जो दिखाई दे रहा है और जो किया जा रहा है, उनमें बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, भविष्य के शोधकर्ता इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक अध्याय के रूप में दर्ज करेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लोकतंत्र की मज़बूती के लिए संसदीय फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।