अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय को खाली करने का आदेश, अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा विभाग ने 4 सितंबर 2026 को कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को तत्काल खाली करने का आदेश जारी किया। विभाग ने कार्यालय परिसर में अग्नि सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी पाई, जिसके चलते भवन की सातवीं और आठवीं मंजिल को रिक्त कराने का निर्देश दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, कार्यालय का फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र 10 अगस्त को ही समाप्त हो चुका था। इसके अतिरिक्त, भवन में अग्नि सुरक्षा प्रणाली से जुड़ी छह प्रकार की कमियाँ पाई गई थीं, जो लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं। विभाग ने भवन के मालिक को भी इस संबंध में पत्र भेजा है।
गौरतलब है कि इससे पहले 2 सितंबर को विभाग ने इन्हीं अनियमितताओं को लेकर नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर लिखित जवाब माँगा था और यह भी पूछा था कि अपर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के कारण कार्यालय को सील क्यों न किया जाए। समयसीमा समाप्त होने के बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर खाली कराने का आदेश जारी किया गया।
27 अगस्त का विवाद और पृष्ठभूमि
यह कार्यालय पहले से ही 27 अगस्त को हुए एक विवाद के कारण चर्चा में था। उस दिन कोलकाता नगर निगम (KMC) के कर्मचारी पुलिस बल के साथ भवन की छत पर लगे कथित अवैध होर्डिंग हटाने पहुँचे थे। हालाँकि, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और अन्य TMC नेताओं के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया, जिससे पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई।
एफआईआर और गिरफ्तारियाँ
शेक्सपियर सरणी थाने में दर्ज तीन एफआईआर में कोलकाता पुलिस ने TMC कार्यकर्ताओं पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और एक महिला पुलिस अधिकारी की मर्यादा भंग करने की कोशिश का आरोप लगाया है। इनमें से दो एफआईआर में अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, हुमायूँ कबीर और वैश्वानर चटर्जी के नाम शामिल हैं। इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पूछताछ और आगे की कार्रवाई
कोलकाता पुलिस अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी की भतीजे के रूप में पहचान रखने वाले अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक प्रभाव और उनके कार्यालय की गतिविधियाँ लंबे समय से विपक्ष की नज़र में रही हैं। अग्नि सुरक्षा कार्रवाई और पुलिस जाँच का एक साथ जारी रहना इस मामले को और जटिल बनाता है।
आने वाले दिनों में अग्निशमन विभाग की अनुपालन रिपोर्ट और पुलिस जाँच की दिशा इस पूरे प्रकरण का रुख तय करेगी।