आचार्य प्रशांत का ब्रिटेन दौरा: कैम्ब्रिज से हाउस ऑफ लॉर्ड्स तक जलवायु संकट की आंतरिक जड़ पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून 2026 के अवसर पर ब्रिटेन के सर्वाधिक प्रतिष्ठित बौद्धिक और नीति-निर्माण मंचों पर एक ऐसा तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं जो पारंपरिक जलवायु विमर्श से मौलिक रूप से भिन्न है — कि पर्यावरण संकट की जड़ तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय कामना में है। कैम्ब्रिज यूनियन, हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एक सदस्य के साथ संवाद, और मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी लंदन में सार्वजनिक सत्रों से होते हुए यह दौरा ऑक्सफोर्ड, लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (LSE), किंग्स कॉलेज लंदन और लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक तक जारी रहेगा।
कैम्ब्रिज में एक घंटे का सत्र तीन सत्रों में बदला
30 मई 2026 को कैम्ब्रिज यूनियन में निर्धारित एक घंटे की फायरसाइड चैट अंततः दो दिनों में लगभग तीन सत्रों तक विस्तृत हो गई। कैम्ब्रिज जज बिजनेस स्कूल के सेंटर फॉर इंडिया एंड ग्लोबल बिजनेस के निदेशक प्रोफेसर जयदीप प्रभु के संचालन में हुई इस चर्चा में अर्थशास्त्री, एमबीए छात्र, व्यापार जगत के विद्वान और नीति-निर्माता शामिल थे।
यह आयोजन कैम्ब्रिज इंडिया बिजनेस डायलॉग के अंतर्गत हुआ, जो भारत और ब्रिटेन के व्यापार, नीति और शिक्षा जगत की शीर्ष हस्तियों को एकत्र करता है। इस संस्करण में एक भारतीय दार्शनिक की चर्चा को केंद्रीय स्थान मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वैश्विक नीति-कक्षों में उठने वाले प्रश्न अब केवल तकनीकी नहीं रहे।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य के साथ जलवायु संवाद
1 जून को नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड अलुमनाई यूनियन यूके (NISAU) द्वारा आयोजित एक संचालित संवाद में आचार्य प्रशांत ने लॉर्ड क्रिश रावल के साथ भाग लिया। जनवरी 2025 में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में नियुक्त आजीवन सदस्य और फेथ इन लीडरशिप के संस्थापक-निदेशक लॉर्ड रावल, ब्रिटिश सार्वजनिक जीवन में ब्रिटिश भारतीय समुदाय की प्रमुख आवाज़ों में गिने जाते हैं।
दोनों के बीच जलवायु और पर्यावरण संकट के कई पहलुओं पर गहन चर्चा हुई, जिसे ब्रिटेन भर से आए श्रोताओं ने देखा। मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी लंदन में आयोजित सार्वजनिक व्याख्यानों में विभिन्न पृष्ठभूमियों के श्रोता एकत्र हुए — न केवल भारतीय मूल के, बल्कि ब्रिटेन की व्यापक जनता भी।
जलवायु तर्क: तीस कॉन्फ्रेंस, बढ़ता कार्बन
हर मंच पर आचार्य प्रशांत ने एक ही तथ्य से अपनी बात आरंभ की — 1992 में रियो दे जेनेरियो में अपनाए गए समझौते के बाद से अब तक तीस कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) हो चुके हैं और वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड निर्बाध रूप से बढ़ती रही है।
कैम्ब्रिज के भरे सभागार में उन्होंने कहा, 'बाहर से हम इतिहास के किसी भी काल की तुलना में अधिक समृद्ध और शक्तिशाली हैं। भीतर से हम अभी भी लगभग आदिमानव हैं।' उनके अनुसार सभ्यता के साधन अपरिमित रूप से बढ़ चुके हैं, किंतु उन साधनों को चलाने वाली कामना की कभी परीक्षा नहीं हुई। उन्होंने कहा, 'समय तो पहुंचने के लिए चाहिए, दौड़ने के लिए चाहिए। तीन दशकों के जलवायु सम्मेलन तेज दौड़ने के अभ्यास रहे हैं, जबकि संकट की आंतरिक जड़ अछूती बनी रही।'
आगामी कार्यक्रम और वैश्विक पहुंच
आगामी सत्रों में ऑक्सफोर्ड, लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स और किंग्स कॉलेज लंदन — तीनों ने जलवायु विषय पर केंद्रित सत्रों के लिए आमंत्रण दिया है। इसके अतिरिक्त लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक में भी एक सत्र निर्धारित है, जो यूरोप का सबसे बड़ा स्वतंत्र जलवायु सम्मेलन है और जिसमें दुनिया भर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, व्यापार जगत के नेता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एकत्र होते हैं।
आचार्य प्रशांत का गीता मिशन 100 से अधिक देशों में डेढ़ लाख से अधिक नामांकित छात्रों तक पहुंचता है, जो उपनिषदों, भगवद्गीता और अन्य दार्शनिक परंपराओं पर आधारित एक संरचित, परीक्षा-युक्त कार्यक्रम के माध्यम से अध्ययन करते हैं। आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र और प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य प्रशांत ने अगस्त 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत के 18 शहरों में 200 से अधिक सत्र आयोजित किए, जिनमें 12 से अधिक आईआईटी परिसरों, आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईएम लखनऊ, आईआईएम बेंगलुरु और बीआईटीएस पिलानी शामिल रहे।
उनकी पुस्तक ट्रुथ विदाउट अपॉलजी, हार्परकॉलिन्स द्वारा प्रकाशित, और द पायनियर, डेक्कन हेराल्ड तथा द संडे गार्जियन में उनके साप्ताहिक स्तंभ इसी विचार को मुख्यधारा के सार्वजनिक जीवन तक पहुंचाते हैं। वॉटकिन्स माइंड बॉडी स्पिरिट सूची 2026 में उन्हें विश्व के शीर्ष 100 आध्यात्मिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों में 20वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। यह दौरा अभी जारी है और आने वाले सत्रों में यह संवाद और व्यापक होने की संभावना है।