31 जुलाई 2026
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हाउस ऑफ लॉर्ड्स में आचार्य प्रशांत: भारत की असली पहचान आत्मज्ञान है, संस्कृति या व्यंजन नहीं

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हाउस ऑफ लॉर्ड्स में आचार्य प्रशांत: भारत की असली पहचान आत्मज्ञान है, संस्कृति या व्यंजन नहीं

सारांश

ब्रिटिश पार्लियामेंट के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में आचार्य प्रशांत का संदेश था — भारत की देन उसके व्यंजन या उत्सव नहीं, बल्कि 'कोहम्?' का वह प्रश्न है जो आत्मज्ञान की नींव रखता है। वेस्टमिंस्टर पैलेस से उठी यह आवाज़ वेदांत को वैश्विक संकटों के समाधान से जोड़ती है।

मुख्य बातें

आचार्य प्रशांत ने 12 जून 2026 को ब्रिटिश पार्लियामेंट के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में 'इंडियन रूट्स, ग्लोबल विंग्स' विषय पर संबोधन दिया।
उन्होंने कहा कि भारत की असली पहचान संस्कृति या व्यंजन नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और 'कोहम्?' के प्रश्न में निहित है।
कार्यक्रम में लॉर्ड करण बिलिमोरिया , लॉर्ड नागराजू , सांसद बैरी गार्डिनर और भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर कार्तिक पांडे उपस्थित थे।
उन्होंने जलवायु संकट को उत्सर्जन नहीं, बल्कि मनुष्य की चेतना की समस्या बताया।
आगामी सप्ताहों में वे LSE , किंग्स कॉलेज लंदन और 20-28 जून के लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक को संबोधित करेंगे।
उनकी पुस्तक 'ट्रुथ विदआउट अपोलॉजी' को काठमांडू कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल 2026 में सम्मानित किया गया।

दार्शनिक एवं लेखक आचार्य प्रशांत ने 12 जून 2026 को ब्रिटिश पार्लियामेंट के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित किया। 'इंडियन रूट्स, ग्लोबल विंग्स' विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने भारतीय दर्शन और वेदांत के संदेश को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की वास्तविक पहचान उसके उत्सवों, परंपराओं या खान-पान में नहीं, बल्कि आत्मज्ञान की उस परंपरा में है जो 'कोहम्?' — अर्थात 'मैं कौन हूँ?' — के प्रश्न से जन्म लेती है।

ऐतिहासिक मंच और उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

आचार्य प्रशांत ने वेस्टमिंस्टर पैलेस में अपना संबोधन दिया — वह मंच जहाँ दशकों में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय, नेल्सन मंडेला, बराक ओबामा, रोनाल्ड रीगन, बिल क्लिंटन, पोप बेनेडिक्ट 16वें और जनरल चार्ल्स द गॉल जैसी विश्व-विख्यात हस्तियाँ बोल चुकी हैं। इस आयोजन में ब्रिटेन के नीति-निर्माता, सांसद, शिक्षक और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

गणमान्य व्यक्तियों में लॉर्ड करण बिलिमोरिया (बैरन बिलिमोरिया ऑफ चेल्सी, क्रॉसबेंच पीयर और 2014 से 2024 तक बर्मिंघम विश्वविद्यालय के चांसलर), लॉर्ड नागराजू (बैरन नागराजू ऑफ ब्लूम्सबरी, लेबर लाइफ पीयर और एआई पॉलिसी लैब्स तथा महात्मा गांधी फ्यूचर लीडर्स प्रोग्राम के संस्थापक), बैरी गार्डिनर (ब्रेंट वेस्ट से लेबर सांसद), कार्तिक पांडे (भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर) और अमित तिवारी (आईएनएसए के राष्ट्रीय अध्यक्ष) सम्मिलित थे।

वेदांत और आत्म-अन्वेषण का वैश्विक संदेश

आचार्य प्रशांत ने उपनिषद की प्रार्थना 'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय' का विस्तृत विवेचन करते हुए कहा कि यह किसी धर्म या संप्रदाय की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए भीतरी यात्रा का आह्वान है — असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृतत्व की ओर। उन्होंने कठोपनिषद् के संदेश 'उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत' — उठो, जागो और ज्ञानियों से सीखो — का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि वेदांत, बुद्ध, संत कबीर और भारत की अन्य दार्शनिक धाराएँ इसी ईमानदार आत्म-अन्वेषण से उद्भूत हुई हैं। वैदिक उद्घोष 'चरैवेति, चरैवेति' का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि साधक को किसी भी बाहरी पहचान, उपलब्धि या प्रतीक पर रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि ये पहचानें अहंकार को आश्रय देती हैं। उनके अनुसार, भारत का वास्तविक संदेश भीतर के विसर्जन से उत्पन्न बाहरी विस्तार का है।

जलवायु संकट और चेतना का संबंध

संसद परिसर के बाहर आचार्य प्रशांत ने जलवायु संकट पर अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा, 'जलवायु संकट मनुष्य की आंतरिक व्यवस्था की समस्या है — यह उत्सर्जन की नहीं, चेतना की समस्या है।' उनके अनुसार जलवायु परिवर्तन, सामाजिक विखंडन और मानसिक अशांति जैसे संकटों की जड़ मनुष्य की भीतरी अव्यवस्था में है, और इनका समाधान केवल कानूनों, नीतियों व तकनीकी उपायों से संभव नहीं।

आगामी जलवायु संवादों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ग्रीन टेक्नोलॉजीज और आर्थिक उपाय आवश्यक हो सकते हैं, किंतु वे तब तक पर्याप्त नहीं होंगे जब तक मनुष्य की असीमित उपभोग-प्रवृत्ति को संबोधित न किया जाए।

वेदांत और आधुनिक विज्ञान का संगम

कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड में अपने हालिया संवादों का उल्लेख करते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा, 'सत्य कोई ऐसा उत्पाद नहीं जिसे मैं अलग-अलग बाज़ारों के लिए अलग ढंग से तैयार कर सकूँ।' उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रोताओं के अनुसार भाषा और प्रस्तुति बदल सकती है, किंतु सत्य नहीं। वेदांत और आधुनिक विज्ञान के संबंध पर उन्होंने कहा कि दोनों अंततः एक ही प्रश्न पर मिलते हैं — 'किसके लिए?' — विज्ञान वस्तुओं का अध्ययन करता है, जबकि वेदांत उस ज्ञाता की पड़ताल करता है जो समस्त अनुभवों का भोगता है।

ब्रिटेन प्रवास और आगामी कार्यक्रम

यह संबोधन आचार्य प्रशांत के व्यापक ब्रिटेन प्रवास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले वे कैम्ब्रिज इंडिया बिज़नेस डायलॉग 2026 (कैम्ब्रिज यूनियन) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ईशावास्य उपनिषद पर व्याख्यान दे चुके हैं। आगामी सप्ताहों में वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE), किंग्स कॉलेज लंदन और 20 से 28 जून 2026 तक आयोजित लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। हाल ही में काठमांडू कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल 2026 में उनकी पुस्तक 'ट्रुथ विदआउट अपोलॉजी' को सम्मानित किया गया। प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य प्रशांत का यह वैश्विक अभियान आत्मज्ञान के दर्शन से समकालीन संकटों का सामना करने के प्रयास के रूप में जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बॉलीवुड और व्यंजनों तक सीमित रहती है, तब वेदांत को जलवायु संकट और मानसिक अशांति के समाधान से जोड़ना एक साहसिक और विचारोत्तेजक हस्तक्षेप है। हालाँकि आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि 'चेतना की समस्या' को नीति में कैसे रूपांतरित किया जाए — यह प्रश्न अनुत्तरित रहता है। फिर भी, ऑक्सफोर्ड से लेकर संसद तक की यह यात्रा भारतीय दर्शन की उस वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करती है जिसे अकादमिक और राजनीतिक दोनों वर्ग अब真 真 गंभीरता से सुन रहे हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रशांत ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में क्या कहा?
आचार्य प्रशांत ने 12 जून 2026 को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं या व्यंजनों में नहीं, बल्कि आत्मज्ञान की उस परंपरा में है जो 'कोहम्?' — 'मैं कौन हूँ?' — के प्रश्न से जन्म लेती है। उन्होंने वेदांत, उपनिषदों और भारतीय दर्शन को वैश्विक संकटों के संदर्भ में प्रासंगिक बताया।
'इंडियन रूट्स, ग्लोबल विंग्स' कार्यक्रम क्या था?
यह ब्रिटिश पार्लियामेंट के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में 12 जून 2026 को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम था, जिसमें ब्रिटेन के नीति-निर्माता, सांसद, शिक्षक और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। आचार्य प्रशांत इसके मुख्य अतिथि थे।
आचार्य प्रशांत ने जलवायु संकट को चेतना की समस्या क्यों कहा?
उनके अनुसार जलवायु संकट की जड़ मनुष्य की आंतरिक अव्यवस्था और असीमित उपभोग-प्रवृत्ति में है, न कि केवल उत्सर्जन में। उन्होंने कहा कि ग्रीन टेक्नोलॉजीज और नीतियाँ तब तक पर्याप्त नहीं होंगी जब तक मनुष्य आत्म-शिक्षा के माध्यम से अपनी इस प्रवृत्ति को नहीं समझता।
आचार्य प्रशांत के ब्रिटेन दौरे में और कौन-से कार्यक्रम शामिल हैं?
हाउस ऑफ लॉर्ड्स संबोधन से पहले वे कैम्ब्रिज इंडिया बिज़नेस डायलॉग 2026 और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ईशावास्य उपनिषद पर व्याख्यान दे चुके हैं। आगामी सप्ताहों में वे LSE, किंग्स कॉलेज लंदन और 20 से 28 जून 2026 के लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक को संबोधित करेंगे।
आचार्य प्रशांत कौन हैं और प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन क्या है?
आचार्य प्रशांत एक दार्शनिक, लेखक और वेदांत के व्याख्याता हैं। वे प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं, जो आत्मज्ञान के दर्शन को समकालीन वैश्विक समस्याओं से जोड़ने का कार्य करता है। उनकी पुस्तक 'ट्रुथ विदआउट अपोलॉजी' को काठमांडू कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल 2026 में सम्मानित किया गया।
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