अग्निवीर कार्यकाल 6 साल: BJP ने बताया ऐतिहासिक कदम, सपा-कांग्रेस-CPM ने कहा धोखा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि 4 साल से बढ़ाकर 6 साल करने का फैसला किया है, जिसके बाद देशभर में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। जहाँ सत्तापक्ष के नेताओं और अग्निवीर अभ्यर्थियों ने इस निर्णय को युवाओं के लिए बड़ी राहत बताया, वहीं विपक्ष ने इसे 'लॉलीपॉप' और 'आउटसोर्स सेना' का विस्तार करार दिया। 5 नवंबर 2026 को सामने आई इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि अग्निपथ योजना अभी भी देश की सबसे विवादास्पद सैन्य भर्ती नीतियों में से एक बनी हुई है।
स्वागत करने वालों की दलीलें
बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। जो भी युवा अग्निवीर में जा रहे हैं, उनके लिए भविष्य में और भी रास्ते खुल रहे हैं। स्थायी तौर पर भी एक सैनिक के रूप में उनकी नियुक्ति हो सकती है।'
अग्निवीर ट्रेनर लोकेश साहू — जो भारतीय सेना में 17 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए और धमतरी में 'फ्रीडम फिजिकल ट्रेनिंग' के नाम से सैनिक प्रशिक्षण संचालित करते हैं — ने कहा कि छह साल के कार्यकाल से युवाओं का मनोबल और देशभक्ति का जज्बा दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनके यहाँ प्रशिक्षण पाए 700-800 युवा सेना में सेवा दे रहे हैं।
अग्निवीर अभ्यर्थी पंकज कटारे ने बताया कि उन्होंने 5 मई को लिखित परीक्षा दी, 12 जुलाई को परिणाम में सफलता मिली और 28 अक्टूबर को फिजिकल टेस्ट भी पास किया। अब उन्हें मेरिट लिस्ट का इंतजार है। उन्होंने कहा कि दो अतिरिक्त वर्षों का रोजगार और 25 प्रतिशत स्थायी नियुक्ति का प्रावधान तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अच्छा अवसर है।
विपक्ष की कड़ी आलोचना
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामशंकर राजभर ने इस फैसले को सीधे 'धोखा' बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अग्निवीर युद्ध में शहीद हो सकते हैं, तो उन्हें शहीद का दर्जा और सुविधाएँ क्यों नहीं दी जाती। राजभर ने कहा, 'अंत में आपने अग्निवीरों को आउटसोर्स सैनिक बना दिया है। अगर सरकार की नीयत साफ है तो उन्हें पूर्णकालिक आजीवन रोजगार का अधिकार देना चाहिए। यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक स्टंट है।'
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के सांसद वी. शिवदासन ने और गहरी आपत्ति जताई। उनके अनुसार अग्निपथ परियोजना ने 'सेना की पूरी व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।' उन्होंने रेखांकित किया कि छह साल बाद अग्निवीरों को न पेंशन मिलती है, न स्वास्थ्य सुविधाएँ, न कैंटीन का लाभ और न ही कल्याणकारी योजनाओं का फायदा। शिवदासन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सैन्य व्यवस्था के 'निजीकरण' का आरोप लगाया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कृषि मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि अग्निवीरों की सेवा सेवानिवृत्ति तक होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि 25-27 वर्ष की उम्र में सेना से बाहर आने वाले युवाओं के सामने भविष्य की अनिश्चितता बनी रहेगी।
अग्निपथ विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अग्निपथ योजना 2022 में लागू की गई थी, जिसके बाद देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। विरोधियों का मुख्य तर्क तब भी यही था कि चार साल की सेवा के बाद बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा नौकरी के बिना बाहर आएंगे। केंद्र ने उस समय 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी किए जाने का प्रावधान किया था। अब कार्यकाल बढ़ाने का यह निर्णय उस नीति में पहला बड़ा बदलाव है।
यह ऐसे समय में आया है जब सेना में भर्ती, रोजगार और युवाओं की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि दो साल का विस्तार मूल संरचनात्मक खामियों — पेंशन का अभाव, शहीद दर्जे की अनिश्चितता, और 75 प्रतिशत अग्निवीरों की स्थायी भविष्य की गारंटी न होना — को दूर नहीं करता।
आम युवाओं और सेना पर असर
समर्थकों के अनुसार, छह साल की सेवा से युवाओं को दो अतिरिक्त वर्षों का वेतन, सैन्य शिक्षा और पुलिस बल व केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) में प्राथमिकता जैसे लाभ मिलेंगे। लोकेश साहू ने कहा कि सेना में 'वैकल्पिक शिक्षा' का प्रावधान अग्निवीरों को सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
विरोधियों का मानना है कि जब तक स्थायी नियुक्ति, वैधानिक पेंशन योजना और शहीद दर्जे की गारंटी नहीं मिलती, तब तक कार्यकाल बढ़ाना महज अल्पकालिक राहत है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद में भी गूँजने की संभावना है।