4 अक्टूबर 2026
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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की मॉक एक्सरसाइज, CISF समेत 6 एजेंसियों ने परखी तैयारी

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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की मॉक एक्सरसाइज, CISF समेत 6 एजेंसियों ने परखी तैयारी

सारांश

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर CISF, NSG, वायु सेना समेत छह एजेंसियों ने ड्रोन हमले की मॉक एक्सरसाइज की। एक दिन पहले वाराणसी में एंटी-हाइजैकिंग ड्रिल भी हुई। यह अभ्यास हवाई अड्डों पर बढ़ते ड्रोन खतरे के मद्देनज़र बहु-एजेंसी तैयारी को परखने की दिशा में अहम कदम है।

मुख्य बातें

4 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर यूएवी-ड्रोन हमले जैसी स्थिति का अनुकरण करते हुए बहु-एजेंसी मॉक एक्सरसाइज आयोजित की गई।
अभ्यास में CISF , भारतीय वायु सेना , NSG , स्थानीय पुलिस , IB और ARFF सहित 6 एजेंसियाँ शामिल रहीं।
अभ्यास के बाद सभी एजेंसियों के साथ डीब्रीफिंग सेशन आयोजित हुआ जिसमें सुधार बिंदुओं की पहचान की गई।
3 अक्टूबर 2026 को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर AHME-2026 एंटी-हाइजैकिंग ड्रिल भी संपन्न हुई।
CISF का कहना है कि इन अभ्यासों से ऑपरेशनल तैयारी, एजेंसी तालमेल और संकट प्रतिक्रिया प्रणाली मज़बूत होती है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) समेत छह प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों ने 4 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर यूएवी-ड्रोन हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक बहु-एजेंसी मॉक एक्सरसाइज आयोजित की। इस अभ्यास का उद्देश्य एजेंसियों के बीच परिचालन तालमेल को परखना और ड्रोन से उत्पन्न सुरक्षा खतरों के विरुद्ध प्रतिक्रिया प्रणाली को मज़बूत करना था।

अभ्यास में शामिल एजेंसियाँ

इस संयुक्त सुरक्षा अभ्यास में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग (ARFF) टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाई। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर ड्रोन-आधारित खतरों को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ अपनी तैयारियाँ पुख्ता कर रही हैं।

मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली

अभ्यास के तहत ड्रोन हमले का एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें सभी भाग लेने वाली एजेंसियों की प्रतिक्रिया गति, आपसी समन्वय और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का परीक्षण किया गया। अभ्यास के बाद एक विस्तृत डीब्रीफिंग सेशन भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने अनुभव साझा किए और सुधार के बिंदुओं की पहचान की।

CISF ने कहा कि एयरपोर्ट सुरक्षा को तैयारी, आपसी तालमेल और निरंतर सुधार के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ करना प्राथमिकता है।

वाराणसी में एंटी-हाइजैकिंग ड्रिल

अहमदाबाद अभ्यास से एक दिन पहले, 3 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर वार्षिक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME-2026) का आयोजन हुआ। इस ड्रिल में विमान अपहरण की स्थिति का अनुकरण किया गया और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया की जाँच की गई। CISF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की।

वाराणसी के इस अभ्यास में CISF जवानों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), AAI फायर सर्विस, एयरलाइंस और मेडिकल टीम ने भी भाग लिया।

AHME क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों

एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) एक वार्षिक सुरक्षा ड्रिल है जो देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर आयोजित की जाती है। इसका मकसद वास्तविक विमान अपहरण या हवाई आतंकी हमले की स्थिति में क्राइसिस रिस्पॉन्स, एसओपी और बहु-एजेंसी तालमेल को व्यावहारिक रूप से परखना होता है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ड्रोन तकनीक के दुरुपयोग की बढ़ती आशंकाओं के कारण हवाई अड्डों पर इस तरह के अभ्यासों की आवृत्ति और जटिलता, दोनों में वृद्धि हुई है।

आगे क्या होगा

डीब्रीफिंग सेशन में चिह्नित कमियों के आधार पर संबंधित एजेंसियाँ अपनी SOP में संशोधन करेंगी और अगले अभ्यास की तैयारी को और अधिक लक्षित बनाएंगी। CISF की यह पहल देश के हवाई अड्डों को 21वीं सदी के जटिल सुरक्षा खतरों के लिए सुसज्जित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ठोस परिचालन जोखिम मान रही हैं। गौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में भारत के कई संवेदनशील ठिकानों पर ड्रोन से जुड़ी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। असली परीक्षा यह है कि डीब्रीफिंग सेशन में चिह्नित खामियाँ वास्तव में SOP में सुधार लाती हैं या नहीं — क्योंकि अभ्यास की सफलता केवल उसके आयोजन से नहीं, बल्कि उसके बाद की कार्रवाई से आँकी जाती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर मॉक एक्सरसाइज क्यों की गई?
यह अभ्यास यूएवी-ड्रोन हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी परखने के लिए आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य एजेंसियों के बीच तालमेल, प्रतिक्रिया गति और SOP की व्यावहारिक जाँच करना था।
अहमदाबाद मॉक एक्सरसाइज में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
अभ्यास में CISF, भारतीय वायु सेना, NSG, स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग (ARFF) टीम ने भाग लिया। इन सभी छह एजेंसियों ने मिलकर ड्रोन हमले के काल्पनिक परिदृश्य में अपनी प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया।
AHME-2026 क्या है और वाराणसी में यह कब हुई?
एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) एक वार्षिक सुरक्षा ड्रिल है जो देशभर के हवाई अड्डों पर आयोजित होती है। AHME-2026 वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 3 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुई।
इन मॉक एक्सरसाइज़ से एयरपोर्ट सुरक्षा को क्या फायदा होता है?
इन अभ्यासों से ऑपरेशनल तैयारी, बहु-एजेंसी समन्वय और संकट-प्रतिक्रिया प्रणाली को व्यावहारिक परीक्षण मिलता है। डीब्रीफिंग सेशन में चिह्नित कमियों के आधार पर SOP में सुधार किए जाते हैं जिससे वास्तविक खतरे के समय प्रभावी कार्रवाई संभव होती है।
क्या भारत में एयरपोर्ट पर ड्रोन खतरा वास्तविक है?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हवाई अड्डों पर ड्रोन-आधारित खतरे को अब एक ठोस परिचालन जोखिम माना जा रहा है। इसीलिए CISF और अन्य एजेंसियाँ नियमित रूप से ऐसे अभ्यास आयोजित कर अपनी तैयारी को परखती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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