26 सितंबर 2026
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एयर फोर्स स्टेशन तांबरम में 54 पायलट बने क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर, तीन मित्र देशों के पायलट भी शामिल

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एयर फोर्स स्टेशन तांबरम में 54 पायलट बने क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर, तीन मित्र देशों के पायलट भी शामिल

सारांश

चेन्नई के एयर फोर्स स्टेशन तांबरम में 161वें QFIC के दीक्षांत समारोह में 54 रक्षा पायलट और तीन मित्र देशों के पायलट क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बने। 24 सप्ताह और 200 घंटे के कठिन ग्राउंड प्रशिक्षण के बाद यह स्नातक भारतीय रक्षा विमानन की अगली पीढ़ी तैयार करेंगे।

मुख्य बातें

एयर फोर्स स्टेशन तांबरम में 161वें QFIC का दीक्षांत समारोह 26 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ।
रक्षा बलों के 54 पायलट — वायुसेना के 42 , नौसेना के 7 , सेना के 3 और तटरक्षक बल के 2 — क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बने।
तीन मित्र देशों के पायलटों ने भी इस कोर्स में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया।
कोर्स 13 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ; 24 सप्ताह , उड़ान के 10 चरण और 200+ घंटे ग्राउंड प्रशिक्षण शामिल।
मजीठिया ट्रॉफी (ओवरऑल प्रथम) स्क्वाड्रन लीडर बोपन्ना ए.ए.
को; मेहर सिंह ट्रॉफी (ओवरऑल द्वितीय) स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी को।
एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस ने समीक्षा अधिकारी के रूप में प्रतीक चिह्न प्रदान किए।

भारतीय वायुसेना के एयर फोर्स स्टेशन तांबरम, चेन्नई स्थित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल (FIS) में 26 सितंबर 2026 को 161वें क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स कोर्स (QFIC) का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय रक्षा बलों के 54 पायलट सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में स्नातक हुए। इसके साथ ही तीन मित्र देशों के पायलटों ने भी इस प्रतिष्ठित कोर्स में प्रशिक्षण पूरा किया।

समारोह का मुख्य घटनाक्रम

समारोह में पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस ने समीक्षा अधिकारी (रिव्यूइंग ऑफिसर) के रूप में भाग लिया और सभी प्रशिक्षित पायलटों को प्रतिष्ठित 'क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर' प्रतीक चिह्न प्रदान किए। यह प्रतीक भारतीय रक्षा विमानन में निर्देशन क्षमता का सर्वोच्च प्रमाण माना जाता है।

कोर्स की संरचना और प्रशिक्षण का स्तर

13 अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस कोर्स में 24 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें उड़ान के 10 चरण और 200 घंटे से अधिक का ग्राउंड प्रशिक्षण शामिल था। यह कठिन पाठ्यक्रम तकनीकी कुशलता के साथ-साथ शिक्षण पद्धति और नेतृत्व क्षमता पर भी ज़ोर देता है।

इस बैच में भारतीय वायुसेना के 42, भारतीय नौसेना के 7, भारतीय सेना के 3 और भारतीय तटरक्षक बल के 2 पायलट शामिल थे। गौरतलब है कि तीन मित्र देशों के पायलटों की उपस्थिति भारत की रक्षा कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग को भी रेखांकित करती है।

पुरस्कार विजेता पायलट

उड़ान और ग्राउंड विषयों में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित ट्रॉफियाँ प्रदान की गईं। मजीठिया ट्रॉफी (ओवरऑल प्रथम) स्क्वाड्रन लीडर बोपन्ना ए.ए. को मिली। अर्जन सिंह ट्रॉफी (फिक्स्ड विंग फ्लाइंग) स्क्वाड्रन लीडर शिवकुमार भटकारे को और अर्जन सिंह ट्रॉफी (रोटरी विंग फ्लाइंग) स्क्वाड्रन लीडर सौम्या शर्मा को प्रदान की गई।

निर्मलजीत सिंह सेखों ट्रॉफी (एरोबेटिक्स) स्क्वाड्रन लीडर बिजो एंटोन के नाम रही। दिलबाग ट्रॉफी (इंस्ट्रक्शनल टेक्नीक) लेफ्टिनेंट कमांडर पार्थ देशपांडे को, सुब्रोतो मुखर्जी ट्रॉफी (ग्राउंड सब्जेक्ट्स) स्क्वाड्रन लीडर अमोल गर्ग को और मेहर सिंह ट्रॉफी (ओवरऑल द्वितीय) स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी को दी गई।

एयर मार्शल का संदेश

अपने संबोधन में एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस ने सभी स्नातक पायलटों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब इन फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने प्रशिक्षुओं को आत्मविश्वासी, पेशेवर और पूरी तरह सक्षम सैन्य पायलट के रूप में तैयार करें, ताकि भारतीय वायुसेना और अन्य रक्षा सेवाओं की ज़रूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।

रणनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा स्वायत्तता को लगातार मज़बूत कर रहा है और आत्मनिर्भर प्रशिक्षण इकोसिस्टम विकसित करने पर ज़ोर दे रहा है। FIS तांबरम दशकों से भारतीय रक्षा विमानन के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों की पीढ़ियाँ तैयार करता आया है, और 161वाँ QFIC बैच इस परंपरा को आगे बढ़ाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और तीन मित्र देशों की उपस्थिति भारत की सॉफ्ट-पावर कूटनीति को प्रशिक्षण के ज़रिए मज़बूत करती है। FIS जैसे संस्थान तब महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब देश स्वदेशी विमान और प्रणालियाँ तैनात कर रहा हो, क्योंकि उपकरण से पहले प्रशिक्षक तैयार होना ज़रूरी है। स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी जैसी अधिकारियों का पुरस्कार सूची में शामिल होना यह भी दर्शाता है कि लड़ाकू और प्रशिक्षण दोनों मोर्चों पर महिला अधिकारियों की भूमिका व्यापक हो रही है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

161वाँ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स कोर्स क्या है?
यह भारतीय वायुसेना के एयर फोर्स स्टेशन तांबरम स्थित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल (FIS) द्वारा संचालित 24 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो रक्षा बलों के चुनिंदा पायलटों को भविष्य के सैन्य पायलट तैयार करने के लिए योग्य बनाता है। इसमें 10 उड़ान चरण और 200 घंटे से अधिक ग्राउंड प्रशिक्षण शामिल होता है।
इस बैच में किन रक्षा बलों के पायलट शामिल थे?
161वें QFIC बैच में भारतीय वायुसेना के 42, भारतीय नौसेना के 7, भारतीय सेना के 3 और भारतीय तटरक्षक बल के 2 पायलट शामिल थे। इसके अलावा तीन मित्र देशों के पायलटों ने भी सफलतापूर्वक कोर्स पूरा किया।
समारोह में कौन-सी ट्रॉफियाँ दी गईं और किसे मिलीं?
ओवरऑल प्रथम के लिए मजीठिया ट्रॉफी स्क्वाड्रन लीडर बोपन्ना ए.ए. को, ओवरऑल द्वितीय के लिए मेहर सिंह ट्रॉफी स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी को, एरोबेटिक्स में निर्मलजीत सिंह सेखों ट्रॉफी स्क्वाड्रन लीडर बिजो एंटोन को और इंस्ट्रक्शनल टेक्नीक के लिए दिलबाग ट्रॉफी लेफ्टिनेंट कमांडर पार्थ देशपांडे को प्रदान की गई।
तांबरम का फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल क्यों महत्वपूर्ण है?
एयर फोर्स स्टेशन तांबरम स्थित FIS भारतीय रक्षा विमानन का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र है, जो दशकों से सभी रक्षा शाखाओं के लिए उच्चस्तरीय फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर तैयार करता रहा है। यहाँ प्रशिक्षित अधिकारी वायुसेना, नौसेना, सेना और तटरक्षक बल के प्रशिक्षण संस्थानों में अगली पीढ़ी के पायलट बनाते हैं।
मित्र देशों के पायलटों को प्रशिक्षण देने का क्या महत्व है?
मित्र देशों के पायलटों को FIS में प्रशिक्षित करना भारत की रक्षा कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग का हिस्सा है। यह भारत की विमानन प्रशिक्षण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाता है और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मज़बूती प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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