एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने CISC का पदभार संभाला, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) का पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर थल सेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त टुकड़ी ने उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया।
CISC पद का महत्व
एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त संरचना की धुरी है। CISC के रूप में यह अधिकारी तीनों सेनाओं — थल, जल और वायु — के बीच परिचालन समन्वय, संयुक्त सैन्य योजनाओं के क्रियान्वयन और आधुनिक युद्धक अवधारणाओं को ज़मीन पर उतारने की केंद्रीय ज़िम्मेदारी निभाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत संयुक्त थिएटर कमांड व्यवस्था और नेटवर्क-आधारित युद्धक क्षमता को प्राथमिकता दे रहा है।
चार दशकों का सैन्य अनुभव
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह को 13 जून 1987 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला था। लगभग चार दशकों के करियर में उन्होंने 4,500 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव अर्जित किया है। वे श्रेणी 'A' के योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं — एक ऐसी योग्यता जो परिचालन दक्षता और शिक्षण क्षमता दोनों को एक साथ प्रमाणित करती है।
उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज जैसे देश के सर्वोच्च सैन्य शिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। करियर के दौरान उन्होंने लड़ाकू स्क्वाड्रन की कमान, रडार स्टेशन का नेतृत्व और एक प्रमुख फाइटर एयरबेस के कमांडर का दायित्व भी निभाया।
संवेदनशील क्षेत्रों में परिचालन भूमिका
जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में उन्होंने अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। इसके बाद पूर्वी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी के रूप में उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र की वायु सुरक्षा में अहम योगदान दिया।
वे भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख और प्रशिक्षण कमान के प्रमुख भी रहे। अपनी वर्तमान नियुक्ति से ठीक पहले वे दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे — एक ऐसी कमान जिसके अंतर्गत देश के कई रणनीतिक वायु ठिकाने आते हैं।
सम्मान और अलंकरण
उनकी असाधारण सेवाओं को राष्ट्र ने तीन प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरणों से मान्यता दी है। वर्ष 2007 में उन्हें वायु सेना पदक, वर्ष 2022 में अति विशिष्ट सेवा पदक और वर्ष 2026 में परम विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया गया।
आगे की राह
रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, एयर मार्शल तेजिंदर सिंह का व्यापक परिचालन और रणनीतिक अनुभव भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्धक क्षमता को नई ऊँचाई देगा। गौरतलब है कि भारत इस समय थिएटर कमांड के पुनर्गठन और तीनों सेनाओं के बीच गहरे एकीकरण की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है — ऐसे में CISC की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है।