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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व विवाद: महंत रवींद्र पुरी बोले — 2027 कुंभ दिव्य और भव्य बनाना ही एकमात्र लक्ष्य

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व विवाद: महंत रवींद्र पुरी बोले — 2027 कुंभ दिव्य और भव्य बनाना ही एकमात्र लक्ष्य

सारांश

2027 के हरिद्वार कुंभ से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व विवाद फिर उभरा है, लेकिन अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने साफ कहा — दोनों गुटों के बीच भाईचारा बरकरार है और कुंभ को दिव्य-भव्य बनाना ही एकमात्र साझा संकल्प है।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व को लेकर मतभेद 2021 में महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद से चले आ रहे हैं।
परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि दूसरे गुट के लोग उनके विरोधी नहीं, भाई हैं।
उन्होंने जूना अखाड़ा और आवाहन अखाड़ा के समर्थन संबंधी मीडिया रिपोर्टों को फर्जी बताया।
महंत ने दावा किया कि उनके साथ पाँच प्रमुख अखाड़ों सहित बड़ा उदासीन और निर्मल अखाड़े के कुछ समूहों का समर्थन है।
सभी मतभेदों के बावजूद 2027 के उत्तराखंड कुंभ को दिव्य और भव्य बनाना संत समाज का साझा उद्देश्य — महंत रवींद्र पुरी।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व को लेकर मतभेद एक बार फिर सतह पर आ गए हैं, लेकिन परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने 6 जुलाई को स्पष्ट किया कि इन आंतरिक मतभेदों का उत्तराखंड में 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले की तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संत समाज का एकमात्र साझा उद्देश्य दिव्य और भव्य कुंभ का सफल आयोजन है।

मतभेदों की पृष्ठभूमि

महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, अखाड़ा परिषद में यह विभाजन कोई नई परिघटना नहीं है। 2021 में तत्कालीन अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद से परिषद दो गुटों में बँट गई थी। उस समय परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि के पास नियमानुसार बैठक बुलाने का अधिकार था और उसी बैठक में रवींद्र पुरी को अध्यक्ष चुना गया था।

उन्होंने कहा कि जिन्हें 'दूसरा गुट' कहा जा रहा है, वे उनके विरोधी नहीं बल्कि उनके भाई हैं। उनके शब्दों में, 'यदि मैं किसी को अपना शत्रु मानूंगा तो नुकसान उसका नहीं, मेरा होगा — इसलिए मैं आज भी उन्हें अपना भाई मानता हूं।'

फर्जी खबरों पर चिंता

महंत रवींद्र पुरी ने आरोप लगाया कि हाल की कुछ मीडिया रिपोर्टों में गलत तरीके से यह प्रचारित किया गया कि जूना अखाड़ा और आवाहन अखाड़ा ने दूसरे गुट का समर्थन कर दिया है। इन रिपोर्टों के बाद उन्हें देशभर के संतों और अनुयायियों के फोन आने लगे।

उन्होंने कहा कि थोड़े समय की चर्चा के लिए फैलाई गई गलत जानकारी भविष्य में बड़े विवादों की जड़ बन सकती है और समाज को ऐसी फर्जी खबरों से सतर्क रहना चाहिए।

समर्थन का दावा और संगठनात्मक चिंता

महंत रवींद्र पुरी ने दावा किया कि उनके साथ पाँच प्रमुख अखाड़ों के अतिरिक्त बड़ा उदासीन अखाड़े के रघुमुनि समूह और निर्मल अखाड़े के रेशम सिंह समूह का भी समर्थन है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह समर्थन-विरोध का नहीं, बल्कि संगठनात्मक व्यवस्था का प्रश्न है।

गौरतलब है कि उन्होंने अलग परिषद बनाने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार, यदि ऐसी परंपरा चल पड़ी तो भविष्य में हर अखाड़े के भीतर भी विभाजन हो सकता है, जिससे संत समाज की सदियों पुरानी परंपरा और संगठनात्मक ढाँचे को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।

आम जनता और कुंभ पर असर

महंत ने स्पष्ट किया कि दोनों समूह भले ही अलग-अलग कार्य कर रहे हों, किंतु इसका अर्थ यह नहीं कि उनके बीच भाईचारा समाप्त हो गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नया अखाड़े के संत पहले उनके साथ थे, बाद में परिस्थितियों के अनुसार दूसरे समूह में चले गए — यह एक सामान्य प्रक्रिया है, कोई स्थायी विभाजन नहीं।

उन्होंने दोहराया कि किसी भी छोटे तात्कालिक लाभ के लिए ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए कठिनाइयाँ पैदा करे।

2027 कुंभ: एकजुट संकल्प

सभी मतभेदों से ऊपर उठकर महंत रवींद्र पुरी ने दृढ़ता से कहा कि संत समाज का एकमात्र और अंतिम उद्देश्य उत्तराखंड में 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाना है। यह ऐसे समय में आया है जब कुंभ की तैयारियाँ प्रशासनिक स्तर पर तेज़ होने लगी हैं और देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या वास्तव में दोनों गुट प्रशासनिक समन्वय के लिए तैयार हैं। महंत रवींद्र पुरी की 'भाईचारे' की भाषा सुलह की इच्छाशक्ति दर्शाती है, लेकिन जब तक अखाड़ों के बीच शाही स्नान की तिथियों और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व पर औपचारिक सहमति नहीं बनती, तब तक यह विवाद कुंभ की लॉजिस्टिक्स को प्रभावित कर सकता है। अलग परिषद बनाने की प्रवृत्ति पर उनकी चिंता जायज़ है — यह मिसाल सदियों पुरानी संत परंपरा के लिए दीर्घकालिक खतरा है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नेतृत्व विवाद क्या है?
2021 में तत्कालीन अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद परिषद दो गुटों में बँट गई थी। महामंत्री महंत हरि गिरि द्वारा बुलाई गई बैठक में महंत रवींद्र पुरी को अध्यक्ष चुना गया, लेकिन एक अन्य गुट इस चुनाव को लेकर असहमत है।
क्या इस विवाद का 2027 कुंभ मेले पर असर पड़ेगा?
महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, यह परिषद का आंतरिक मामला है और इसका कुंभ मेले की तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी अखाड़ों का साझा उद्देश्य 2027 के उत्तराखंड कुंभ को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाना है।
महंत रवींद्र पुरी के साथ कौन-से अखाड़े हैं?
महंत रवींद्र पुरी ने दावा किया है कि उनके साथ पाँच प्रमुख अखाड़ों के अलावा बड़ा उदासीन अखाड़े के रघुमुनि समूह और निर्मल अखाड़े के रेशम सिंह समूह का भी समर्थन है।
जूना अखाड़ा और आवाहन अखाड़ा के समर्थन की खबरें क्यों विवादास्पद हैं?
महंत रवींद्र पुरी ने कुछ मीडिया रिपोर्टों को फर्जी बताया, जिनमें कहा गया था कि जूना अखाड़ा और आवाहन अखाड़ा ने दूसरे गुट का समर्थन कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन खबरों के बाद देशभर से संतों और अनुयायियों के फोन आने लगे।
अखाड़ा परिषद में अलग परिषद बनाने की प्रवृत्ति पर क्या चिंता जताई गई है?
महंत रवींद्र पुरी ने चेतावनी दी कि यदि अलग परिषद बनाने की परंपरा शुरू हुई तो भविष्य में हर अखाड़े के भीतर भी विभाजन हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे संत समाज की सदियों पुरानी परंपरा और संगठनात्मक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुँचेगा।
राष्ट्र प्रेस
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