आरएसएस पर विजयवर्गीय की टिप्पणी को अखाड़ा परिषद का समर्थन, महंत रवींद्र पुरी बोले — आत्ममंथन ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी और परिषद के मीडिया कोऑर्डिनेटर करौली शंकर महाराज ने 28 जून 2026 को हरिद्वार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी का खुलकर समर्थन किया। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े संगठन को अनुशासन और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए समय-समय पर आत्ममंथन और सुधार की आवश्यकता होती है।
महंत रवींद्र पुरी का पक्ष
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि जब किसी परिवार या संगठन का विस्तार होता है, तो अच्छाइयों के साथ-साथ कुछ कमियाँ भी आ जाती हैं। उन्होंने कहा, साल 2014 के बाद जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी, तब संघ के अनेक स्वयंसेवक विभिन्न सरकारी जिम्मेदारियों से जुड़े। ऐसे में समय के साथ कुछ चुनौतियाँ और कमियाँ सामने आना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि संघ के पुराने कार्यकर्ताओं ने त्याग, तपस्या और नैतिक मूल्यों के आधार पर जीवन जिया, लेकिन वर्तमान पीढ़ी भौतिकवादी परिवेश में पली-बढ़ी है, जिसके कारण कुछ कुरीतियाँ भी देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, विजयवर्गीय का उद्देश्य किसी की आलोचना करना नहीं, बल्कि संगठन के हित में सुधार की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की माँग
महंत पुरी ने उम्मीद जताई कि संघ नेतृत्व इस प्रकार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रांत प्रचारक, जिला प्रचारक या अन्य कार्यकर्ता के खिलाफ शिकायत आती है, तो उस पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए। उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नए प्रांत प्रचारक के आने के बाद वहाँ कई स्तरों पर सकारात्मक सुधार देखने को मिले हैं।
उन्होंने साधु समाज की प्रचलित कहावत — 'ज़्यादा जोगी मठ उजाड़' — का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी संगठन का अत्यधिक विस्तार होता है और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग उससे जुड़ते हैं, तब बेहतर समन्वय और अनुशासन के लिए सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आज सूचना के युग में छोटी-सी घटना भी कुछ ही समय में पूरी दुनिया तक पहुँच जाती है, इसलिए सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए ईमानदारी और नैतिकता अत्यंत आवश्यक है।
करौली शंकर महाराज का समर्थन
अखाड़ा परिषद के मीडिया कोऑर्डिनेटर करौली शंकर महाराज ने भी विजयवर्गीय की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि यह बयान किसी द्वेष या विरोध की भावना से नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में सुधार की भावना से दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब घर-परिवार में कोई कमी आती है, तो सबसे पहले परिवार के लोग ही उसे सामने लाते हैं।
उन्होंने संघ की तुलना एक विशाल वटवृक्ष से करते हुए कहा कि यदि बड़े वृक्ष के भीतर कहीं खोखलापन आने लगे, तो उसे मजबूत करने के लिए समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने पड़ते हैं। उनके अनुसार संघ का शीर्ष नेतृत्व इस दिशा में पूरी गंभीरता से काम करेगा और आने वाले समय में आवश्यक सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
संघ की भूमिका और आगे की राह
गौरतलब है कि आरएसएस ने आपदा राहत, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय संकट के समय उल्लेखनीय योगदान दिया है। अखाड़ा परिषद के दोनों पदाधिकारियों ने इस सकारात्मक छवि को बनाए रखने के लिए संगठन के भीतर अनुशासन और आचरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। यह देखना अहम होगा कि संघ नेतृत्व इन सुझावों पर किस रूप में प्रतिक्रिया देता है।