विजयवर्गीय के RSS बयान पर जीतू पटवारी की माँग — राष्ट्रपति और राज्यपाल लें संज्ञान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा बताने लगते हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 29 जून 2026 को इस बयान पर राष्ट्रपति और राज्यपाल से तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
विजयवर्गीय का विवादित बयान
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि BJP शासन में आने के बाद प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी अपनी RSS से जुड़ी पहचान का हवाला देने लगते हैं। यह बयान अब संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि यह प्रशासनिक तटस्थता के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है।
पटवारी ने उठाए संवैधानिक सवाल
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विजयवर्गीय का यह सार्वजनिक बयान 'अत्यंत गंभीर संवैधानिक प्रश्न' खड़ा करता है। पटवारी ने कहा कि यदि प्रशासनिक तंत्र में किसी वैचारिक संगठन से जुड़ी पहचान का चलन बढ़ा है, तो यह केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा गहरा विषय है।
भारतीय संविधान का हवाला देते हुए पटवारी ने कहा कि संविधान यह अपेक्षा करता है कि प्रत्येक सरकारी अधिकारी केवल संविधान के प्रति निष्ठावान हो — किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के प्रति नहीं। इसलिए, उनके अनुसार, इस कथन की संवैधानिक समीक्षा आवश्यक है।
राष्ट्रपति और राज्यपाल से आग्रह
पटवारी ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल और राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे इस बयान का संज्ञान लें और मध्य प्रदेश सरकार से तुरंत यह पूछें कि क्या सरकार विजयवर्गीय के कथन से सहमत है, क्या प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान किसी वैचारिक संगठन से जुड़ी होनी चाहिए, और क्या मुख्यमंत्री इस बयान से स्वयं को अलग मानते हैं या इसका समर्थन करते हैं।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मध्य प्रदेश में प्रशासनिक नियुक्तियों और स्थानांतरणों को लेकर पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि प्रशासनिक तटस्थता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस का विषय रहा है। BJP की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।