आरएसएस विस्तार पर कैलाश विजयवर्गीय का आत्ममंथन: 'संख्या बढ़ी, अच्छे इंसान घटे'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 27 जून 2025 को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के भीतर बढ़ती संख्या और घटती गुणवत्ता के विरोधाभास पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद संगठन का विस्तार तो हुआ, लेकिन इसके सदस्यों में 'अच्छे इंसानों' की कमी चिंताजनक रूप से बढ़ी है।
मुख्य बयान और संदर्भ
विजयवर्गीय ने कार्यक्रम में कहा कि सरकार बनने के बाद अनेक सरकारी अधिकारी अचानक आरएसएस से पुराना नाता जोड़ने लगे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'हमारी सरकार में शामिल होने वाला हर अधिकारी कहता है — मैंने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बेल्ट और शॉर्ट्स पहनी हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि एक अधिकारी ने दावा किया कि उनके पिता किसी शाखा के 'अध्यक्ष' थे — जबकि विजयवर्गीय के अनुसार संघ में ऐसा कोई पद होता ही नहीं।
संगठन के मूल्यों पर चिंता
विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि संगठन का विस्तार उसके मूल चरित्र की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आज हर तरह की भीड़ है, फिर भी उनके बीच अच्छे इंसानों की कमी है। यही सच्चाई है। संगठन बढ़ रहा है और विचारधारा भी फैल रही है। लेकिन अगर अच्छे इंसान ही नहीं हैं, तो इस विचारधारा का क्या महत्व है? हमें इस पर गहराई से सोचने की जरूरत है।' उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ आरएसएस कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जो संगठन के मूल आदर्शों — ईमानदारी और प्रतिबद्धता — को जीवंत रखते हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने राम मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर आरएसएस और BJP पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस ने संगठन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में एक वरिष्ठ BJP नेता का यह आत्म-आलोचनात्मक बयान राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
आत्ममंथन का आह्वान
विजयवर्गीय ने कहा कि ऐसी प्रतिबद्ध और ईमानदार शख्सियतें अब संगठन में कम ही दिखती हैं और इसके लिए आत्म-मंथन जरूरी है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी BJP नेता ने आरएसएस के भीतर गुणात्मक गिरावट पर चिंता जताई हो, लेकिन इतने खुले मंच पर ऐसा बयान कम ही सुनने को मिलता है।
आगे क्या
विजयवर्गीय के इस बयान पर आरएसएस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान संगठन के भीतर बढ़ती संख्या बनाम गुणवत्ता की बहस को नई दिशा दे सकता है। आने वाले दिनों में इस पर विपक्ष और संघ परिवार दोनों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।