असम यूसीसी विधेयक पर अखिल गोगोई का हमला: 'निजी जिंदगी में नौकरशाही की ताकझांक बढ़ेगी'
सारांश
मुख्य बातें
रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने बुधवार, 27 मई को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए असम में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक की कड़ी आलोचना की। उनका आरोप है कि यह कानून नौकरशाहों और सरकारी एजेंसियों को आम नागरिकों के निजी जीवन में दखल देने का संस्थागत अधिकार दे देगा। गोगोई ने इसे संवैधानिक मूल्यों और सर्वोच्च न्यायालय के निजता संबंधी फैसलों का सीधा उल्लंघन बताया।
मुख्य आरोप: निगरानी का संस्थागतकरण
गोगोई ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक नौकरशाहों और अधिकारियों को अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान करेगा, जिससे वे आम लोगों की जीवनशैली और उनके अंतरंग पहलुओं की भी निगरानी कर सकेंगे। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या राज्य सरकार नौकरशाहों का इस्तेमाल आम लोगों की निजी और अंतरंग जिंदगी में ताकझांक के लिए करेगी?'
उनके अनुसार, इस कानून के लागू होने के बाद स्थिति यह हो जाएगी कि ब्यूरोक्रेसी से जुड़े लोग नागरिकों की जासूसी करेंगे और यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगे कि वे अपनी निजी जिंदगी में क्या करते हैं। गोगोई ने इसे 'लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अस्वीकार्य' बताया।
संवैधानिक और न्यायिक आधार
गोगोई ने तर्क दिया कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उन फैसलों का हवाला दिया जिनमें निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया गया है। उनके अनुसार, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संसद या राज्य विधानसभा किसी भी सूरत में आम नागरिकों की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
गौरतलब है कि 2017 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में सर्वसम्मति से निजता को मौलिक अधिकार माना था — एक मिसाल जिसका हवाला यूसीसी के आलोचक अक्सर देते हैं।
असम भाजपा सरकार पर निशाना
गोगोई ने असम की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए आम लोगों की जिंदगी को नियंत्रित करना चाहती है। उन्होंने पूछा कि क्या अब नौकरशाह और पुलिस नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल देंगे।
उन्होंने माँग की कि विधेयक के विवादित प्रावधानों को हटाया जाए और राज्य के सभी नागरिकों को सरकारी हस्तक्षेप के बिना जीने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
व्यापक संदर्भ: यूसीसी बहस
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जहाँ यूसीसी लागू हुई है, और कई अन्य भाजपा-शासित राज्य इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। असम में यूसीसी का प्रस्ताव विभिन्न धार्मिक और जनजातीय समुदायों की चिंताओं के बीच विवादास्पद रहा है। आलोचकों का कहना है कि पूर्वोत्तर की विविध सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए एकरूप नागरिक कानून व्यावहारिक रूप से जटिल होगा।
गोगोई की यह टिप्पणी असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पर होने वाली संभावित बहस से पहले विपक्ष की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।