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जौहर यूनिवर्सिटी विवाद: ओमप्रकाश राजभर का आरोप — अखिलेश खुद चाहते हैं आजम खान बर्बाद हों

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जौहर यूनिवर्सिटी विवाद: ओमप्रकाश राजभर का आरोप — अखिलेश खुद चाहते हैं आजम खान बर्बाद हों

सारांश

सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर अखिलेश यादव को घेरा — सवाल उठाया कि सपा सरकार के पाँच साल में सरकारी जमीन यूनिवर्सिटी के नाम क्यों नहीं हुई। साथ ही परिवारवाद और समाजवाद पर भी तीखा पलटवार किया।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 20 जुलाई को आरोप लगाया कि अखिलेश यादव स्वयं चाहते हैं कि आजम खान राजनीतिक रूप से बर्बाद हों।
जौहर यूनिवर्सिटी , रामपुर पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजभर ने पूछा — सपा के पाँच साल के शासन में सरकारी जमीन यूनिवर्सिटी के नाम क्यों नहीं ट्रांसफर हुई।
अखिलेश के 'समाजवाद' पर राजभर ने कहा — पहले परिवारवाद छोड़ें, राम मनोहर लोहिया के आदर्शों का हवाला दिया।
मौलाना अरशद मदनी की आपत्ति पर भी राजभर ने वही सवाल दोहराया — सपा सरकार में जमीन ट्रांसफर क्यों नहीं हुई।
संसद में प्रस्तावित 'वंदे मातरम बिल' को राजभर ने 'अच्छी पहल' बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 20 जुलाई को लखनऊ में कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं यह चाहते हैं कि वरिष्ठ सपा नेता आजम खान राजनीतिक रूप से बर्बाद हो जाएं। रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी पर हुई बुलडोजर कार्रवाई पर अखिलेश यादव की टिप्पणी के जवाब में राजभर ने यह तीखा बयान दिया।

जौहर यूनिवर्सिटी और सरकारी जमीन का सवाल

राजभर ने सवाल उठाया कि जब अखिलेश यादव की सरकार पाँच साल सत्ता में रही, तब जनता के पैसे का उपयोग होने के बावजूद सरकारी जमीन जौहर यूनिवर्सिटी के नाम क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव खुद चाहते हैं कि आजम खान बर्बाद हो जाएं। जब उनकी अपनी सरकार सत्ता में थी और जनता के पैसे का इस्तेमाल हुआ था, तो सरकारी जमीन यूनिवर्सिटी के नाम क्यों नहीं ट्रांसफर की गई?'

यह ऐसे समय में आया है जब जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विपक्ष और धार्मिक संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

अखिलेश के 'समाजवाद' पर राजभर का पलटवार

अखिलेश यादव द्वारा समाजवाद की बात करने पर राजभर ने कहा, 'अगर वे समाजवाद की बात कर रहे हैं, तो उन्हें सबसे पहले परिवारवाद से बाहर निकलना पड़ेगा। उन्हें अपने ही परिवार के सदस्यों को टिकट न देकर इसकी शुरुआत करनी चाहिए।' उन्होंने राम मनोहर लोहिया का हवाला देते हुए कहा कि लोहिया के आदर्शों पर चलने का दावा करने से पहले व्यक्ति को अपने नाम से जातिसूचक शब्द हटा देने चाहिए, तभी वह सच्चा समाजवादी कहला सकता है।

मौलाना मदनी की आपत्ति पर राजभर का जवाब

मौलाना अरशद मदनी द्वारा रामपुर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई को गलत ठहराए जाने पर राजभर ने कहा, 'मैं मौलाना मदनी से पूछना चाहता हूं, जब पाँच साल तक अखिलेश यादव की सरकार सत्ता में थी, तब सरकारी जमीन शैक्षणिक संस्थान के नाम क्यों नहीं ट्रांसफर की गई?' गौरतलब है कि मदनी ने इस कार्रवाई को अल्पसंख्यक शिक्षा पर हमला बताया था।

पंचायत प्रशासकों और संसद सत्र पर राजभर का रुख

ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक बनाए जाने के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि संविधान के दायरे में रहते हुए त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था के तहत क्रमशः ग्राम पंचायतों, जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए। मानसून सत्र को लेकर उन्होंने कहा कि संसद सत्र देश की जनता के मुद्दों पर चर्चा और राष्ट्रहित में कानून बनाने के लिए बुलाए जाते हैं।

वंदे मातरम बिल और NEET विरोध पर बयान

संसद में प्रस्तावित 'वंदे मातरम बिल' को राजभर ने 'अच्छी पहल' बताया और कहा कि जो लोग 'वंदे मातरम' का विरोध करते हैं उनके लिए कानून होना चाहिए। NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि वहाँ छात्रों की आड़ में एक राजनीतिक दल का प्रचार किया जा रहा था और उनके अनुसार यह अनशन अपने आप समाप्त हो जाएगा। आने वाले दिनों में जौहर यूनिवर्सिटी मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह एनडीए के भीतर से सपा की आंतरिक दरारों को उजागर करने की सुनियोजित कोशिश है। अखिलेश-आजम के बीच की खटास कोई नई बात नहीं — सपा सरकार के दौरान ही यह संबंध तनावपूर्ण हो गए थे, और राजभर इसी का राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं। परिवारवाद पर हमला भी रणनीतिक है — यूपी में पिछड़े वर्गों को साधने की कोशिश में राजभर लोहिया की विरासत को अखिलेश से छीनने का प्रयास कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन का कानूनी पक्ष क्या है — वह बहस इन राजनीतिक बयानों की आड़ में दब रही है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाया?
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव स्वयं चाहते हैं कि आजम खान राजनीतिक रूप से बर्बाद हों। उन्होंने सवाल उठाया कि सपा के पाँच साल के शासन में जनता के पैसे से बनी जौहर यूनिवर्सिटी की सरकारी जमीन संस्थान के नाम क्यों नहीं ट्रांसफर की गई।
जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन का विवाद क्या है?
रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई की, जिसे विपक्ष और मौलाना अरशद मदनी ने गलत बताया। विवाद का केंद्र यह है कि यूनिवर्सिटी की जमीन सरकारी बताई जा रही है और उसे संस्थान के नाम ट्रांसफर नहीं किया गया था।
राजभर ने अखिलेश के समाजवाद पर क्या कहा?
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को समाजवाद की बात करने से पहले परिवारवाद छोड़ना होगा और अपने परिवार के सदस्यों को टिकट देना बंद करना होगा। उन्होंने राम मनोहर लोहिया का हवाला देते हुए कहा कि सच्चे समाजवादी को अपने नाम से जातिसूचक शब्द भी हटाना चाहिए।
मौलाना अरशद मदनी की आपत्ति पर राजभर ने क्या जवाब दिया?
मौलाना मदनी द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई को गलत बताए जाने पर राजभर ने उनसे भी वही सवाल पूछा — सपा सरकार के पाँच साल में सरकारी जमीन शैक्षणिक संस्थान के नाम क्यों नहीं ट्रांसफर हुई।
वंदे मातरम बिल पर राजभर का क्या रुख है?
राजभर ने संसद में प्रस्तावित वंदे मातरम बिल को 'अच्छी पहल' बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं, उनके लिए कानून होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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