अखिलेश यादव का ईडी कार्रवाई पर तंज: 'यूपी में छापे, कर्नाटक-महाराष्ट्र में नहीं'; राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भी हमला
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 8 जुलाई को केंद्र सरकार पर दोहरा हमला बोला — एक ओर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर और दूसरी ओर अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले पर। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर सीधे केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए।
ईडी छापेमारी पर अखिलेश का तंज
बुधवार को ईडी ने सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। इसी कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, 'छापा मारना चाहिए कर्नाटक और महाराष्ट्र में, मार रहे हैं यूपी में। जहाँ 'सीसी' का माल है, वहाँ नहीं जाते हैं, बस दिखावटी औपचारिकता निभाते हैं।' उनका आरोप था कि ईडी की कार्रवाई चुनिंदा और राजनीति से प्रेरित है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखा प्रहार
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा, दान और चंदे की अनियमितताओं की खबरें सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक सोमवार को हुई। बैठक में ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बताया कि नए महामंत्री की नियुक्ति तक कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अखिलेश यादव ने इस प्रकरण पर एक्स पर लिखा, 'अयोध्या के मंदिर से 'चढ़ावा, चंदा, दान चोरी' का समाचार समस्त विश्व में फैल चुका है। दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाला सनातन समाज भाजपा और उसके सहयोगियों के कृत्यों से हो रही बदनामी के कारण शर्मसार है। वे इसलिए भी आहत हैं कि उन्होंने भी मंदिर में दान-चंदा भेजा था या स्वयं आकर चढ़ाया था। इस प्रकरण से संपूर्ण विश्व का सनातन समाज आक्रोशित है, क्योंकि धर्म के साथ-साथ देश को भी भाजपाई अधर्मियों के कारण अपयश का सामना करना पड़ रहा है।'
निवेशकों पर असर का दावा
अखिलेश यादव ने आगे दावा किया कि इस विवाद से विदेशी निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया है। उन्होंने लिखा, 'दुनिया भर के निवेशक भी अब अपना हाथ खींच रहे हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि जिस सरकार ने अपने भगवान के दानपात्र तक को नहीं छोड़ा, वह कल हमारे निवेश को क्या छोड़ेगी। केंद्र सरकार ने अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक विश्वसनीयता पूरी तरह खो दी है।' गौरतलब है कि ये आरोप अखिलेश यादव के हैं और सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ट्रस्ट में आगे की प्रक्रिया
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बताया कि प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक समिति गठित की गई है। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की प्रक्रिया पर विचार होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक मामले राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र में आ गए हैं।