4 अगस्त 2026
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अल्लामा मोहम्मद इकबाल की पुण्यतिथि: 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' के रचनाकार

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अल्लामा मोहम्मद इकबाल की पुण्यतिथि: 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' के रचनाकार

सारांश

अल्लामा मोहम्मद इकबाल, जिनकी रचनाओं ने भारतीय राष्ट्रवाद को प्रेरित किया, आज भी याद किए जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ और 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' गीत आज भी लोगों को प्रेरित करता है। आइए जानते हैं उनके जीवन और कार्यों के बारे में।

मुख्य बातें

अल्लामा इकबाल का जन्म 9 नवंबर 1877 को हुआ।
उन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' गीत लिखा।
वे पाकिस्तान के आध्यात्मिक पिता माने जाते हैं।
उनकी रचनाएँ भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक हैं।
इकबाल की कविताएँ आज भी प्रेरणा देती हैं।

मुंबई, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है...' यह प्रेरणादायक पंक्तियां उर्दू व फारसी के महान शायर अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने लिखी थीं।

पाकिस्तान में जन्मे इस प्रतिभाशाली शायर ने धर्म से परे जाकर भारत और भगवान राम को पवित्रता, बहादुरी और प्रेम के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी एक प्रसिद्ध कविता 'लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद' आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।

उर्दू, अरबी और फारसी साहित्य के इस महान हस्ती का जन्म भारत के सियालकोट में एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार में हुआ था। जन्म के समय भारत और पाकिस्तान एक ही देश थे, इसलिए उनकी लेखनी में हमेशा भारत का गौरव और उर्दू का संगम देखने को मिलता है। मोहम्मद इकबाल की कविताओं में प्रेम और आत्मविश्वास की झलक मिलती है, लेकिन उनके प्रारंभिक लेखन में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह भी शामिल था।

हालांकि उन्होंने अपने शुरुआती जीवन में केवल उर्दू में कविताएं लिखीं, लेकिन 1903 में उन्होंने दर्शनशास्त्र, अंग्रेजी साहित्य और अरबी भाषा का अध्ययन किया और ओरिएंटल कॉलेज में अरबी शिक्षक के रूप में कार्य किया। 1908 में उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में डिग्री प्राप्त की और म्यूनिख यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की। इसके बाद वे एक वकील बनकर भारत लौटे।

उनका प्रसिद्ध गीत 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' भी उनके द्वारा लिखा गया था। 15 अगस्त 1947 को जब देश को स्वतंत्रता मिली, तब इसी गीत को संसद भवन में गाया गया। भारत-पाकिस्तान विभाजन के संदर्भ में भी उनका विचार था कि देश को दो भागों में बांट दिया जाना चाहिए। 29 दिसंबर 1930 को इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के 25वें अधिवेशन में मोहम्मद इकबाल को अध्यक्ष चुना गया, जहां उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को मुस्लिम लीग में शामिल होने के लिए प्रेरित कर अलग राष्ट्र की मांग की थी।

इकबाल को पाकिस्तान का आध्यात्मिक पिता माना जाता है। उन्होंने अपनी शायरी के माध्यम से मुसलमानों में इस्लाम के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य किया। उन्होंने अपने भारत में पंजाब को भी पाकिस्तान में मिलाने की बात कही थी। कहा जाता है कि उनकी राष्ट्रवादी सोच समय के साथ कठोर कट्टरपंथ में बदल गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल्लामा मोहम्मद इकबाल का जन्म कब हुआ था?
अल्लामा मोहम्मद इकबाल का जन्म 9 नवंबर 1877 को सियालकोट, भारत में हुआ था।
क्या अल्लामा इकबाल ने पाकिस्तान के निर्माण में भूमिका निभाई थी?
हाँ, उन्होंने मुस्लिम लीग के अधिवेशन में अलग राष्ट्र की मांग को समर्थन दिया था और पाकिस्तान के आध्यात्मिक पिता माने जाते हैं।
'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' गीत कब लिखा गया था?
'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' गीत 1904 में लिखा गया था और यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बना।
इकबाल की प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?
इकबाल की प्रमुख रचनाओं में 'शikwa', 'Jawab-e-Shikwa', और 'Bang-e-Dra' शामिल हैं।
इकबाल को किस साहित्यिक शैली में जाना जाता है?
इकबाल को उर्दू और फारसी शायरी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए जाना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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