अमेरिकी कब्जे से मुक्त जहाज के 20 ईरानी नाविक तेहरान पहुँचे, तीन देशों की कूटनीति रंग लाई
सारांश
मुख्य बातें
तेहरान में 21 मई 2025 को 20 ईरानी नाविक अपने देश वापस लौटे — वे उस जहाज के चालक दल के सदस्य थे जिसे अमेरिकी बलों ने 19 अप्रैल को ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह के निकट रोककर जब्त कर लिया था। ईरान, पाकिस्तान और सिंगापुर के विदेश मंत्रालयों के बीच हुए गहन कूटनीतिक समन्वय के बाद यह वापसी संभव हो पाई। नाविक इस्लामाबाद के रास्ते स्वदेश लौटे।
मुख्य घटनाक्रम
19 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बलों ने एक छोटे कंटेनर जहाज को रोककर अपने नियंत्रण में ले लिया था। यह जहाज इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (IRISL) समूह से संबद्ध था, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंध पहले से लागू हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जहाज के चालक दल ने लगभग 6 घंटे तक दी गई कई चेतावनियों का पालन नहीं किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई। सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा था कि ईरानी ध्वज वाले इस जहाज को बताया गया था कि वह अमेरिकी 'नाकाबंदी' के नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
जहाज पर कुल 31 चालक दल के सदस्य थे — 20 ईरानी और 11 पाकिस्तानी नागरिक। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ये सभी सिंगापुर के आसपास के समुद्री क्षेत्र में फँसे हुए थे।
तीन देशों की कूटनीति
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पाकिस्तान और सिंगापुर के अपने समकक्षों के साथ इस मुद्दे पर लगातार संवाद जारी रखा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया कि यह रिहाई तीनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच "गहन परामर्श" के बाद संभव हुई। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में बहु-देशीय कूटनीतिक समन्वय निर्णायक भूमिका में रहा।
वापसी का मार्ग
नाविकों को पहले सिंगापुर से बैंकॉक (थाईलैंड) लाया गया, फिर वहाँ से इस्लामाबाद (पाकिस्तान) पहुँचाया गया। इसके बाद 20 ईरानी नाविकों को तेहरान भेज दिया गया। 11 पाकिस्तानी चालक दल के सदस्यों की वापसी की प्रक्रिया भी इसी समन्वय के तहत पूरी की गई।
व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता और तनाव एक साथ जारी हैं। IRISL पर अमेरिकी प्रतिबंध वर्षों से लागू हैं और इस जहाज की जब्ती उसी व्यापक नीति का हिस्सा बताई जा रही है। गौरतलब है कि ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर में ऐसी समुद्री कार्रवाइयाँ पहले भी होती रही हैं, जो क्षेत्रीय देशों को कूटनीतिक मध्यस्थ की भूमिका में ला देती हैं।
आगे क्या
नाविकों की सुरक्षित वापसी के बाद जहाज की स्थिति और उस पर लगे प्रतिबंध-उल्लंघन के आरोपों का क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला अमेरिका-ईरान संबंधों और समुद्री कानून के व्यापक ढाँचे में महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।