अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से की मुलाकात, द्विपक्षीय साझेदारी मजबूत करने पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। यह बैठक किर्गिजस्तान की स्वतंत्रता दिवस की 35वीं वर्षगांठ और विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन के अवसर पर हुई।
मुलाकात में क्या हुआ
नई दिल्ली में तैनात अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि सर्जियो गोर ने बैठक के बाद कहा, 'बिश्केक में किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति जापारोव से मुलाकात की। हमारे पास दोनों देशों के लिए मिलकर काम करने के कई बेहतरीन अवसर हैं।' गोर ने यह भी बताया कि अमेरिका अगले महीने राष्ट्रपति जापारोव की संभावित अमेरिका यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर विस्तृत चर्चा हुई। व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।
मध्य एशिया में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता
इस दौरे को मध्य एशिया में अमेरिका की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्य नहीं है, फिर भी वह इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है। किर्गिजस्तान SCO का सदस्य देश है, जिसमें चीन और रूस की केंद्रीय भूमिका है।
यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन मध्य एशियाई देशों के साथ सीधी कूटनीतिक कड़ी बनाने की कोशिश में है। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा क्षेत्र में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की व्यापक अमेरिकी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
व्यापक भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
कथित तौर पर पिछले साल तियानजिन में हुए SCO सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीरें अमेरिका में व्यापक चर्चा का विषय बनी थीं। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा ने वॉशिंगटन में असहजता पैदा की थी।
आलोचकों ने यह भी आरोप लगाया था कि ट्रंप की नीतियों के कारण भारत अमेरिका से दूर होता जा रहा है। स्वयं ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में खो दिया है।
आगे क्या होगा
राष्ट्रपति जापारोव की अमेरिका यात्रा आने वाले महीने में अपेक्षित है, जहाँ दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी को औपचारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत होने की संभावना है। यह यात्रा मध्य एशिया और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।