31 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सिंधु जल संधि: भारत ने 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' का फैसला खारिज किया, MEA बोला — वैधता नहीं मानते

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सिंधु जल संधि: भारत ने 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' का फैसला खारिज किया, MEA बोला — वैधता नहीं मानते

सारांश

भारत ने एक बार फिर सिंधु जल संधि पर तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को अवैध और अस्वीकार्य करार दिया। MEA का कहना है कि यह निकाय ही संधि का उल्लंघन करके बनाया गया था। पहलगाम हमले के बाद से निलंबित संधि पर भारत का रुख अटल है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 अगस्त को तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) के नवीनतम 'अवार्ड' को पूरी तरह खारिज किया।
भारत का स्पष्ट मत है कि COA का गठन ही सिंधु जल संधि (IWT) और विश्व बैंक की संधि-शर्तों का उल्लंघन है।
COA के किसी भी फैसले का भारत में चल रही जल-परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सिंधु जल संधि अनिश्चितकाल के लिए निलंबित है।
भारत ने इस संस्था के समक्ष कभी पेश न होने और भविष्य में भी न होने की नीति दोहराई।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 अगस्त को स्पष्ट बयान जारी कर कहा कि भारत तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) के ताज़ा फैसले को पूरी तरह अस्वीकार करता है, क्योंकि वह इस निकाय की कानूनी वैधता को ही मान्यता नहीं देता। सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर यह COA का नवीनतम 'अवार्ड' है, जिसमें अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति पर निर्णय सुनाया गया है।

भारत की आधिकारिक स्थिति

MEA के बयान में कहा गया कि यह तथाकथित COA विश्व बैंक की संधि-शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए गठित किया गया था। भारत ने इस संस्था के समक्ष कभी पेश होने से इनकार किया है और पूर्व में सुनाए गए सभी फैसलों को भी उतनी ही दृढ़ता से नकारा है। मंत्रालय ने कहा, 'भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि इस तथाकथित आर्बिट्रल संस्था का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है।'

संप्रभुता और परियोजनाओं पर असर

MEA ने स्पष्ट किया कि COA को भारत के संप्रभु निर्णयों पर कोई भी आदेश देने का अधिकार नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, इस निकाय के वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का भारत में चल रही जल-परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही, सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित रखने का भारत का निर्णय पूर्ववत लागू रहेगा।

पहलगाम हमले के बाद बदला संदर्भ

अप्रैल 2025 में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही अत्यंत तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि भारत ने तभी स्पष्ट कर दिया था कि 'खून और पानी साथ नहीं बह सकते।'

विवाद की पृष्ठभूमि

सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी, जो छह नदियों के जल-बँटवारे को नियंत्रित करती है। पाकिस्तान ने भारत की कुछ जल-परियोजनाओं को लेकर COA में मामला दायर किया था, जिसे भारत ने शुरू से ही अवैध प्रक्रिया करार दिया। यह COA का नवीनतम फैसला उसी विवाद की कड़ी है, जिसे भारत ने एक बार फिर दृढ़ता से नकार दिया है।

आगे क्या

भारत के इस कठोर रुख से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में COA की प्रक्रिया में भारत की भागीदारी की कोई संभावना नहीं है। सिंधु जल संधि का निलंबन तब तक जारी रहने की संभावना है, जब तक भारत-पाकिस्तान संबंधों में ठोस सुधार नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब द्विपक्षीय कूटनीतिक दायरे से बाहर निकलकर जटिल अंतरराष्ट्रीय कानूनी क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे एक जटिल प्रश्न खड़ा होता है — अंतरराष्ट्रीय जल-विवाद तंत्र में भागीदारी से इनकार करने पर वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति कितनी टिकाऊ है? पहलगाम हमले के बाद संधि-निलंबन नैतिक रूप से समझ में आता है, परंतु दीर्घकालिक जल-कूटनीति में यह शून्य किसे भरेगा, यह अनुत्तरित है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि 1960 की संधि के तहत विवाद-समाधान तंत्र स्वयं विश्व बैंक की मध्यस्थता पर निर्भर है — और यदि भारत उस तंत्र को ही अस्वीकार करता है, तो वैकल्पिक द्विपक्षीय रास्ते की रूपरेखा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) का सिंधु जल संधि से क्या संबंध है?
पाकिस्तान ने भारत की कुछ जल-परियोजनाओं को लेकर COA में मामला दायर किया था। भारत का कहना है कि इस निकाय का गठन ही 1960 की सिंधु जल संधि और विश्व बैंक की शर्तों का उल्लंघन करके हुआ है, इसलिए वह इसे कभी वैध नहीं मानता।
भारत ने सिंधु जल संधि कब और क्यों निलंबित की?
अप्रैल 2025 में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया। भारत ने तब कहा था कि 'खून और पानी साथ नहीं बह सकते।'
COA के फैसले का भारत की जल-परियोजनाओं पर क्या असर पड़ेगा?
MEA के अनुसार, COA के वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का भारत में चल रही जल-परियोजनाओं पर कोई कानूनी या व्यावहारिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत इस निकाय की संप्रभु निर्णयों पर अधिकारिता को पूरी तरह अस्वीकार करता है।
सिंधु जल संधि 1960 क्या है?
सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी। यह संधि सिंधु नदी तंत्र की छह नदियों — रावी, ब्यास, सतलुज, सिंधु, झेलम और चिनाब — के जल-बँटवारे को नियंत्रित करती है।
क्या भारत भविष्य में COA की प्रक्रिया में शामिल होगा?
MEA के बयान के अनुसार, भारत ने इस निकाय के समक्ष कभी पेश न होने की नीति बनाए रखी है और आगे भी इसके फैसलों को तवज्जो न देने का इरादा जताया है। फिलहाल भागीदारी की कोई संभावना नज़र नहीं आती।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 1 साल पहले