आसियान मंच पर पाकिस्तान के कश्मीर-सिंधु जल दुष्प्रचार को भारत ने किया खारिज, इशाक डार के बयान 'बेबुनियाद'
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने 23 जुलाई 2026 को मनीला में आयोजित आसियान रीजनल फोरम (ARF) की 33वीं बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार द्वारा कश्मीर और सिंधु जल संधि (IWT) पर दिए गए बयानों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें 'बेबुनियाद और अनुचित' करार दिया। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह पाकिस्तान की ओर से एक बहुपक्षीय मंच के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
प्रवक्ता जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 'भारत पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की ओर से दिए गए बेबुनियाद और अनुचित बयानों को पूरी तरह खारिज करता है। यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर बहुपक्षीय मंच का गलत इस्तेमाल किया है, ताकि झूठ फैलाया जा सके, सरकारी स्तर पर गलत जानकारी फैलाई जा सके और सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के अपने लंबे रिकॉर्ड से ध्यान हटाया जा सके।'
भारत ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश 'हमेशा से भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा रहे हैं, हैं और रहेंगे।' नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है।
सिंधु जल संधि पर भारत का रुख
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि (IWT) को फिलहाल निलंबित रखा गया है। यह निर्णय पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद को मिलते समर्थन के जवाब में लिया गया है, जिसमें पहलगाम में हुआ हमला भी शामिल है। भारत ने साफ किया कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद और स्थायी रूप से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता।
गौरतलब है कि IWT 1960 में हस्ताक्षरित हुई थी और दशकों तक दोनों देशों के बीच जल-बंटवारे का आधार रही है। इसका निलंबन द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान पर दुष्प्रचार के आरोप
प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि भारत पाकिस्तान की ओर से लगातार फैलाई जा रही सरकारी स्तर की गलत सूचनाओं की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अक्सर धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल करके, जैसे 'फितना अल-हिंदुस्तान', अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश करता है। भारत ने इसे पाकिस्तान सरकार की ओर से अपने अंदरूनी संकट और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क को पनाह देने में अपनी भूमिका से ध्यान हटाने की एक नाकाम कोशिश बताया।
जयशंकर की मनीला में भागीदारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मनीला में पिछले दो दिनों के दौरान आसियान-भारत बैठक, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान रीजनल फोरम में विदेश मंत्री स्तर की बैठकों में हिस्सा लिया। यह भागीदारी ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहलगाम हमले के बाद से गंभीर तनाव में हैं।
आगे क्या होगा
भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह पड़ोसी देशों पर आरोप लगाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग के बजाय अपने देश में मौजूद आतंकवादी ढाँचे को खत्म करने और अपने अंदरूनी हालात सुधारने पर ध्यान दे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक द्विपक्षीय वार्ता की संभावना न्यूनतम बनी रहेगी।