28 जुलाई 2026
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सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावे को भारत ने नकारा, MEA बोला- आतंकवाद फैलाने वाला देश सांस्कृतिक विरासत का हकदार नहीं

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सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावे को भारत ने नकारा, MEA बोला- आतंकवाद फैलाने वाला देश सांस्कृतिक विरासत का हकदार नहीं

सारांश

भारत ने सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावे को 'महज दिखावा' बताते हुए खारिज किया और पीओजेके चुनावों को 'अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश' करार दिया। JAAC के लॉन्ग मार्च में कम से कम 20 मौतों की खबर के बीच MEA ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर भी तीखा हमला बोला।

मुख्य बातें

MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 जुलाई 2026 को सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावों को 'केवल दिखावा' बताते हुए खारिज किया।
भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद और धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला देश बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर हक नहीं जता सकता।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने पाकिस्तान की पहचान को सिंधु नदी से जोड़ा था, जिसे भारत ने नकारा।
भारत ने पीओजेके में हो रहे विधानसभा चुनावों को 'दिखावटी प्रक्रिया' और अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश बताया।
JAAC के लॉन्ग मार्च के दौरान पीओजेके में कम से कम 20 लोगों की मौत की रिपोर्ट, कई नागरिक गंभीर रूप से घायल।
जायसवाल ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के कब्जे को 'अवैध' करार दिया।

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित द्वि-साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पाकिस्तान की ओर से सिंधु घाटी सभ्यता पर जताए जा रहे दावों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि जो देश दशकों से सीमा पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देता रहा है, वह किसी बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर अपना हक नहीं जता सकता।

पाकिस्तान का दावा और भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा था कि पाकिस्तान के लोगों की पहचान सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारों से जुड़ी है। इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने कहा, "जो देश दशकों से सीमा पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देता रहा है, वह किसी भी बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर अपना दावा नहीं कर सकता। अल्पसंख्यकों और उनके सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के मामले में उसका रिकॉर्ड बेहद खराब है, इसलिए इस तरह के प्रयास केवल दिखावा लगते हैं।"

जायसवाल ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और उनकी सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा को लेकर उसके 'बहुत खराब रिकॉर्ड' का विशेष उल्लेख किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है।

पीओजेके चुनाव पर भारत का कड़ा रुख

भारत ने उसी प्रेस वार्ता में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में कराए जा रहे विधानसभा चुनावों को भी 'दिखावटी चुनावी प्रक्रिया' करार दिया। जायसवाल ने कहा, "जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें वे इलाके भी शामिल हैं जो अभी पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं, भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं। यह दिखावटी चुनावी प्रक्रिया सिर्फ पाकिस्तान के अवैध कब्जे को छिपाने और वहाँ हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को ढकने की कोशिश है।"

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके में चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसक झड़पें, धाँधली के आरोप और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौत की घटनाएँ सामने आई हैं। गठबंधन में शामिल दलों ने एक-दूसरे पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।

पीओजेके में विरोध प्रदर्शन और मानवाधिकार उल्लंघन

जायसवाल ने पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शनों को पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम बताया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे आर्थिक शोषण, लोगों को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।"

रिपोर्टों के अनुसार, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के लॉन्ग मार्च के दौरान कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कथित तौर पर सोशल मीडिया पर आए कुछ वीडियो में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को नागरिकों पर गोली चलाते दिखाया गया है, हालाँकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गौरतलब है कि सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख पुरातात्विक स्थल — जैसे मोहनजोदड़ो और हड़प्पा — भले ही भौगोलिक रूप से आज के पाकिस्तान में स्थित हों, लेकिन यह सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप की साझी और बहुलतावादी विरासत का हिस्सा मानी जाती है। भारत का तर्क है कि इस विरासत पर दावा करने के लिए उसी बहुलतावाद को व्यवहार में उतारना ज़रूरी है, जिसका पाकिस्तान का रिकॉर्ड आलोचकों के अनुसार बेहद कमज़ोर रहा है।

आगे की दिशा

भारत के इस कड़े रुख से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा होने की आशंका है। पीओजेके में मानवाधिकार की स्थिति और वहाँ के चुनावों की विश्वसनीयता अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष एक अहम मुद्दा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या विरासत पर नैतिक अधिकार केवल वर्तमान नीतियों से तय होता है, या भौगोलिक और पुरातात्विक साक्ष्य भी उतने ही प्रासंगिक हैं। पीओजेके में JAAC के लॉन्ग मार्च और 20 मौतों की खबर मुख्यधारा की कवरेज में उचित जगह नहीं पा रही — यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंडे पर एक गंभीर चूक है। भारत का दोहरा मोर्चा — सांस्कृतिक दावे को नकारना और पीओजेके चुनावों को अवैध बताना — स्पष्ट रणनीतिक संदेश है, लेकिन इसकी असली परीक्षा वैश्विक मंचों पर होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावे को क्यों खारिज किया?
भारत ने कहा कि जो देश दशकों से सीमा पार आतंकवाद और धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देता रहा है, वह बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर हक नहीं जता सकता। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा के 'बेहद खराब रिकॉर्ड' का हवाला देते हुए इस दावे को 'केवल दिखावा' बताया।
पाकिस्तान ने सिंधु घाटी सभ्यता पर क्या दावा किया था?
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा था कि पाकिस्तान के लोगों की पहचान सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारों से जुड़ी हुई है। यह बयान 'साझी विरासत' के संदर्भ में दिया गया था।
पीओजेके चुनावों पर भारत का क्या रुख है?
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हो रहे विधानसभा चुनावों को 'दिखावटी प्रक्रिया' करार दिया। MEA के अनुसार, यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैधता देने और वहाँ हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
पीओजेके में JAAC के लॉन्ग मार्च में क्या हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के लॉन्ग मार्च के दौरान पीओजेके में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई और कई नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए। कथित तौर पर सोशल मीडिया पर आए वीडियो में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को नागरिकों पर गोली चलाते दिखाया गया है, हालाँकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भारत के अनुसार जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति क्या है?
भारत का स्पष्ट और अटल रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश — जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके भी शामिल हैं — भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं। MEA प्रवक्ता जायसवाल ने इस रुख को 28 जुलाई 2026 की प्रेस वार्ता में एक बार फिर दोहराया।
राष्ट्र प्रेस
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