28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमित मालवीय का 'एक्स' पोस्ट: 'चीते की चाल, बाज की नजर पर संदेह नहीं' — BJP का मोदी को लेकर संदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमित मालवीय का 'एक्स' पोस्ट: 'चीते की चाल, बाज की नजर पर संदेह नहीं' — BJP का मोदी को लेकर संदेश

सारांश

BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय का 'चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार' वाला एक्स पोस्ट सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना भी राजनीतिक संदेश की तरह पढ़ा जा रहा है — धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष के हमले के बीच यह पोस्ट BJP की डिजिटल रणनीति का हिस्सा लग रही है।

मुख्य बातें

अमित मालवीय ने 28 जुलाई 2026 को एक्स पर लिखा: 'चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते।' पोस्ट में PM मोदी या किसी विवाद का सीधा उल्लेख नहीं, फिर भी इसे मोदी नेतृत्व के समर्थन में पढ़ा जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष सरकार पर दबाव में झुकने का आरोप लगा रहा है।
एक दिन पहले मालवीय ने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के नेताओं के जश्न मनाने के वीडियो पर सवाल उठाए थे।
मालवीय ने कहा कि ईमानदारी से आंदोलन में शामिल छात्रों को पूछने का अधिकार है कि उनकी भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल तो नहीं हुआ।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 28 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक छोटा लेकिन चर्चित पोस्ट किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। उनका यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है।

मालवीय का पोस्ट और उसका संदर्भ

मालवीय ने एक्स पर लिखा: 'चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते, कभी भी मात दे सकती है।' इस पोस्ट में न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया गया और न ही किसी चल रहे विवाद का सीधा उल्लेख किया गया। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे मोदी की रणनीतिक नेतृत्व क्षमता पर BJP की ओर से अटूट भरोसे की अभिव्यक्ति के रूप में देखा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्ट में इस्तेमाल किए गए तीन प्रतीक — चीते की फुर्ती, बाज की दूरदर्शिता और पेशवा बाजीराव की तलवारबाजी — एक साथ तीव्रता, दीर्घकालिक सोच और निर्णायक कार्रवाई का बोध कराते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह पोस्ट विपक्ष के उस आख्यान को काटने की कोशिश है, जिसमें सरकार को दबाव में झुकता हुआ दिखाया जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जोड़कर देखा जा रहा है

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका करार दिया है। उनका दावा है कि सरकार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लगातार विरोध के आगे झुकने को मजबूर हुई। विपक्ष यह भी तर्क दे रहा है कि यह इस्तीफा जनता और राजनीतिक दबाव का परिणाम है। मालवीय के पोस्ट की टाइमिंग को देखते हुए राजनीतिक जानकार इसे इन्हीं दावों का परोक्ष जवाब मान रहे हैं।

छात्र आंदोलन पर मालवीय की पूर्व टिप्पणी

एक दिन पूर्व भी मालवीय ने एक्स पर एक और चर्चित पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने छात्र आंदोलन और उसके नेताओं के जश्न मनाने के वीडियो पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था कि जब किसी आंदोलन की नैतिक नींव छात्रों की आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं पर आधारित बताई जाती है, तब उसके तुरंत बाद नाच-गाने और जश्न के दृश्य कई लोगों को असंवेदनशील लग सकते हैं।

मालवीय ने उल्लेख किया था कि विजेता दहिया के मंच पर डांस का वीडियो वायरल होने के बाद अब अभिजीत दिपके के समूह से जुड़े लोगों — जिनमें सौरव, रांका और अन्य बताए जा रहे हैं — के जश्न मनाने के वीडियो भी सामने आए हैं। उन्होंने पूछा था कि इन तस्वीरों और वीडियो से उन हजारों युवाओं को क्या संदेश जाएगा जो जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक गंभीर आंदोलन का हिस्सा बनने पहुँचे थे।

छात्रों के 'गुमराह' होने की आशंका

मालवीय ने अपने पोस्ट में कहा कि अब कई छात्रों को यह महसूस हो सकता है कि उन्हें गुमराह किया गया। उनके अनुसार, जो आंदोलन छात्रों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता था, वह इन वीडियो के आधार पर आत्ममंथन की जगह जश्न के साथ समाप्त होता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से आंदोलन में शामिल हुए छात्रों को यह पूछने का अधिकार है कि कहीं उनकी भावनाओं का इस्तेमाल किसी राजनीतिक अभियान के लिए तो नहीं किया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

मालवीय के दोनों पोस्ट ने BJP समर्थकों और विपक्ष के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस को जन्म दिया है। विपक्षी नेताओं ने इसे 'विचलित करने की रणनीति' करार दिया है, जबकि BJP के नेता इसे सरकार की दृढ़ता का प्रमाण बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि BJP अपनी डिजिटल संचार रणनीति के जरिए विपक्षी आख्यान को सीधे चुनौती देने में पहले से कहीं अधिक सक्रिय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि विपक्ष ठोस राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला दे रहा है। छात्र आंदोलन पर मालवीय की टिप्पणी भी दोधारी है — वे जश्न के वीडियो पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की नैतिकता को कठघरे में खड़ा करते हैं, लेकिन मूल शिक्षा सुधार की माँगों पर कोई जवाब नहीं देते। यह BJP की डिजिटल संचार शैली की ताकत भी है और सीमा भी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित मालवीय का 'चीते की चाल, बाज की नजर' वाला पोस्ट किस संदर्भ में आया?
यह पोस्ट 28 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आया, जब विपक्ष सरकार पर दबाव में झुकने का आरोप लगा रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे PM मोदी के नेतृत्व पर BJP की ओर से भरोसे की परोक्ष अभिव्यक्ति माना है।
क्या मालवीय ने अपने पोस्ट में PM मोदी का नाम लिया?
नहीं, मालवीय ने अपने पोस्ट में न PM मोदी का नाम लिया और न किसी चल रहे विवाद का सीधा उल्लेख किया। बावजूद इसके, पोस्ट की टाइमिंग और भाषा को देखते हुए राजनीतिक जानकारों ने इसे मोदी की रणनीतिक क्षमता के समर्थन में संदेश के रूप में पढ़ा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का क्या रुख है?
विपक्षी दलों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार के लिए राजनीतिक झटका बताया है। उनका दावा है कि सरकार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लगातार विरोध और जन दबाव के आगे पीछे हटने को मजबूर हुई।
मालवीय ने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
मालवीय ने एक दिन पहले के पोस्ट में कहा कि आंदोलन नेताओं के जश्न मनाने के वीडियो उन छात्रों के साथ असंवेदनशीलता दर्शाते हैं, जिनकी आत्महत्या को आंदोलन की नैतिक नींव बताया गया था। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से आंदोलन में शामिल छात्रों को यह पूछने का अधिकार है कि उनकी भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल तो नहीं हुआ।
BJP की इस डिजिटल रणनीति को कैसे देखा जा रहा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि BJP अपने आईटी सेल के जरिए विपक्षी आख्यान को सीधे चुनौती देने में पहले से अधिक सक्रिय हो गई है। मालवीय जैसे नेताओं के परोक्ष लेकिन सटीक पोस्ट इस रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले