28 जून 2026
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अमित शाह का बड़ा बयान: डीबीटी से खत्म हुई लीकेज, पूर्वांचल में देखी थी गरीबी की असली तस्वीर

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अमित शाह का बड़ा बयान: डीबीटी से खत्म हुई लीकेज, पूर्वांचल में देखी थी गरीबी की असली तस्वीर

सारांश

गांधीनगर में पीएम फैमिली केयर ट्रैकर लॉन्च करते हुए अमित शाह ने दो बातें एक साथ कहीं — DBT ने वेलफेयर लीकेज खत्म की, और पूर्वांचल की गरीबी ने उन्हें असली वंचना का अर्थ सिखाया। यह बयान पुरानी सरकार पर सीधा निशाना भी है और नई डिजिटल वेलफेयर वास्तुकला का बचाव भी।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 28 जून 2026 को गांधीनगर में पीएम फैमिली केयर ट्रैकर पायलट परियोजना का शुभारंभ किया।
शाह ने कहा — DBT के ज़रिए अब पीएम मोदी का भेजा पूरा 1 रुपया सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँचता है, कोई लीकेज नहीं।
पूर्ववर्ती सरकार के दौर में 1 रुपए में से केवल 15 पैसे गरीबों तक पहुँचते थे — यह बात तत्कालीन प्रधानमंत्री ने स्वयं स्वीकार की थी।
शाह ने पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश) में देखी गरीबी का हवाला दिया — घर, बिजली, टॉयलेट, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव।
पीएम फैमिली केयर ट्रैकर माँओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण डेटाबेस को एकीकृत करने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

गृह मंत्री अमित शाह ने 28 जून 2026 को गांधीनगर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली ने कल्याणकारी योजनाओं में होने वाली लीकेज को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अब केंद्र का हर रुपया सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुँचता है। उन्होंने यह बात 'पीएम फैमिली केयर ट्रैकर' पायलट परियोजना के शुभारंभ के अवसर पर कही।

पूर्वांचल की गरीबी ने बदली सोच

शाह ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, "ऐसा नहीं है कि गुजरात में गरीबी नहीं है, लेकिन जब मैं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में गया, तो मैंने महसूस किया कि बहुत ज़्यादा गरीबी का असली मतलब क्या होता है।" उन्होंने बताया कि सरकार बदलने से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में भ्रमण के दौरान उन्होंने स्वयं यह हालात देखे थे।

शाह ने उस दौर की स्थिति का विवरण देते हुए कहा, "लोगों के पास घर नहीं थे। अगर घर नहीं होता, तो बिजली भी नहीं होती। अनगिनत घरों में टॉयलेट नहीं थे। जहाँ झोपड़ी भी थी, वहाँ अंदर पानी की सप्लाई नहीं थी। कई गरीब परिवारों की पहुँच से इलाज बाहर था और जब बच्चे बीमार पड़ते थे तो माँओं के पास अक्सर प्रार्थना करने के अलावा कोई चारा नहीं होता था।"

पुरानी सरकार पर निशाना: 1 रुपए में से 15 पैसे

शाह ने पूर्ववर्ती सरकार के दौर का हवाला देते हुए कहा कि एक समय देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया था कि दिल्ली से भेजा गया 1 रुपया गरीबों तक पहुँचते-पहुँचते केवल 15 पैसे रह जाता था और शेष 85 पैसे बिचौलियों की भेंट चढ़ जाते थे। उन्होंने इसे पुरानी वितरण व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने दृढ़ता से कहा, "आज केंद्रीय गृह मंत्री और एक सांसद के तौर पर मैं सबकी आँखों में आँखें डालकर कह सकता हूँ कि जब पीएम मोदी एक रुपए भेजते हैं, तो पूरा एक रुपया सीधे गरीब व्यक्ति के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होता है।"

पीएम फैमिली केयर ट्रैकर: डिजिटल निगरानी का नया मंच

28 जून को गांधीनगर में लॉन्च हुआ पीएम फैमिली केयर ट्रैकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो माँओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी और वितरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई कल्याणकारी डेटाबेस को एकीकृत करता है। यह परियोजना फिलहाल पायलट चरण में है।

शाह ने कहा कि DBT आर्किटेक्चर ने बिना किसी बिचौलिए के सीधे बैंक खातों में लाभ हस्तांतरित कर गरीब कल्याण का एक नया अध्याय लिखा है। मौजूदा वेलफेयर सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी सहायता बिना किसी लीकेज के सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुँचे।

आगे की राह

पीएम फैमिली केयर ट्रैकर के पायलट परिणामों के आधार पर इसे देशभर में विस्तारित किए जाने की संभावना है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब सरकार कल्याणकारी योजनाओं की अंतिम-छोर तक डिलीवरी को तकनीक के ज़रिए और अधिक पारदर्शी बनाने पर ज़ोर दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन DBT की सफलता के दावे को स्वतंत्र आँकड़ों की कसौटी पर भी परखना ज़रूरी है — क्योंकि कई अध्ययनों में DBT के लाभों के साथ-साथ बैंकिंग पहुँच और आधार-लिंकेज की खामियों से वंचित रहने वाले असली ज़रूरतमंदों की भी पहचान की गई है। पूर्वांचल का संदर्भ भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, परंतु यह सवाल भी उठता है कि उसी क्षेत्र में आज योजनाओं की ज़मीनी पहुँच कितनी है। पीएम फैमिली केयर ट्रैकर की असली परीक्षा पायलट के बाद के विस्तार और पारदर्शी डेटा-साझाकरण में होगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम फैमिली केयर ट्रैकर क्या है?
पीएम फैमिली केयर ट्रैकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो माँओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी और वितरण को बेहतर बनाने के लिए कई सरकारी कल्याण डेटाबेस को एकीकृत करता है। इसे 28 जून 2026 को गांधीनगर में पायलट के रूप में लॉन्च किया गया।
अमित शाह ने DBT को लेकर क्या दावा किया?
अमित शाह ने कहा कि DBT प्रणाली के लागू होने के बाद अब पीएम मोदी का भेजा हर रुपया बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीब लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँचता है। उन्होंने पुरानी व्यवस्था से तुलना करते हुए कहा कि पहले 1 रुपए में से केवल 15 पैसे ही गरीबों तक पहुँचते थे।
अमित शाह ने पूर्वांचल का ज़िक्र क्यों किया?
शाह ने बताया कि वर्तमान सरकार के सत्ता में आने से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के दौरे के दौरान उन्होंने खुद देखा था कि वहाँ के परिवारों के पास घर, बिजली, टॉयलेट, पाइप से पानी और स्वास्थ्य सुविधाएँ तक नहीं थीं। उन्होंने इसे गुजरात की तुलना में गरीबी की कहीं अधिक गंभीर तस्वीर बताया।
'1 रुपए में 15 पैसे' वाला संदर्भ क्या है?
यह संदर्भ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने माना था कि केंद्र से भेजा 1 रुपया गरीबों तक पहुँचते-पहुँचते केवल 15 पैसे रह जाता है। अमित शाह ने इसे DBT की सफलता के प्रमाण के रूप में पुरानी व्यवस्था से तुलनात्मक संदर्भ में उद्धृत किया।
पीएम फैमिली केयर ट्रैकर का अगला चरण क्या होगा?
फिलहाल यह परियोजना पायलट चरण में है। पायलट के परिणामों के आधार पर इसे देशभर में विस्तारित किए जाने की संभावना है, हालाँकि विस्तार की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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