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अमृत भारत स्टेशन योजना: PM मोदी करेंगे 75 पुनर्विकसित स्टेशनों का उद्घाटन, ₹1,570 करोड़ का कायाकल्प

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अमृत भारत स्टेशन योजना: PM मोदी करेंगे 75 पुनर्विकसित स्टेशनों का उद्घाटन, ₹1,570 करोड़ का कायाकल्प

सारांश

75 स्टेशन, 20 राज्य, ₹1,570 करोड़ — अमृत भारत स्टेशन योजना का नया चरण सिर्फ इमारतों का नवीनीकरण नहीं है। 110 साल पुराने जालंधर कैंट से लेकर हाई-टेक सिटी तक, यह ₹71,000 करोड़ की महत्वाकांक्षा का जीवंत प्रमाण है — जहाँ विरासत और आधुनिकता एक ही छत के नीचे मिलती हैं।

मुख्य बातें

PM मोदी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत 20 राज्यों में 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे।
इन स्टेशनों पर कुल ₹1,570 करोड़ खर्च हुए हैं; पूरी योजना का निवेश ₹71,000 करोड़ से अधिक है।
जालंधर कैंट स्टेशन ( 110 वर्ष पुराना ) का ₹125 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण; दोहरी ऊँचाई का एयर कॉनकोर्स और 4,855 वर्ग मीटर पार्किंग शामिल।
योजना के तहत देशभर में 1,340 से अधिक स्टेशनों की पहचान; हाल के चरणों में 122 स्टेशन पूरे।
हाई-टेक सिटी (तेलंगाना) स्टेशन का ₹26 करोड़ में आधुनिकीकरण; प्रतिदिन 3,000 यात्री और 62 ट्रेनें लाभान्वित।
दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएँ — रैंप, स्पर्शनीय मार्ग, लिफ्ट — सभी पुनर्विकसित स्टेशनों का अनिवार्य हिस्सा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के अंतर्गत 20 राज्यों में फैले 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करने वाले हैं, जिनमें पंजाब का ऐतिहासिक जालंधर कैंट स्टेशन भी शामिल है। इन स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर कुल ₹1,570 करोड़ की लागत आई है। यह उद्घाटन विश्व के सबसे बड़े स्टेशन पुनर्विकास कार्यक्रमों में से एक की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्य घटनाक्रम

दिसंबर 2022 में शुरू हुई इस योजना के तहत देशभर में 1,340 से अधिक रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास ₹71,000 करोड़ से अधिक के कुल निवेश से किया जा रहा है। हाल के चरणों में अब तक 122 स्टेशन पूरे हो चुके हैं। फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री ने 554 स्टेशनों की आधारशिला रखी थी और मई 2025 में 18 राज्यों में 103 पुनर्निर्मित स्टेशनों का उद्घाटन किया था।

जालंधर कैंट: विरासत और आधुनिकता का संगम

110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का ₹125 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण किया गया है। अब इसमें दोहरी ऊँचाई वाला एयर कॉनकोर्स, भारी स्टील की प्लेटफॉर्म छत, फिसलन-रोधी फर्श और ऊर्जा-कुशल एलईडी लाइटिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। शहर के दोनों ओर से प्रवेश की बेहतर कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित की गई है।

स्टेशन में 6 मीटर और 9 मीटर चौड़ाई वाले दो नए फुट ओवर ब्रिज (FOB), 200 मीटर प्लेटफॉर्म को कवर करने वाली 40 मीटर चौड़ी ट्रफ रूफ और 1,770 वर्ग मीटर में फैला 36 मीटर चौड़ा एयर कॉनकोर्स इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। एक नया दूसरा प्रवेश द्वार 300 वर्ग मीटर के स्टेशन भवन के साथ और 4,855 वर्ग मीटर का विशाल पार्किंग क्षेत्र यात्रियों की सुविधा को और बढ़ाता है।

अन्य प्रमुख स्टेशनों का कायाकल्प

दिल्ली के उत्तरी रेलवे जोन के अंतर्गत मोदी नगर रेलवे स्टेशन का ₹25.75 करोड़ की लागत से उन्नयन किया गया है। इसमें 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज, नए पार्किंग और आवागमन क्षेत्र, बेहतर प्रतीक्षा कक्ष और शौचालय ब्लॉक शामिल हैं। दिव्यांगजनों के लिए प्रवेश रैंप, स्पर्शनीय मार्ग, विशेष शौचालय, पानी के बूथ और दो लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

तेलंगाना के हाई-टेक सिटी रेलवे स्टेशन का ₹26 करोड़ की लागत से आधुनिकीकरण हुआ है। यह स्टेशन प्रतिदिन लगभग 3,000 यात्रियों की ज़रूरतें पूरी करता है और 62 ट्रेनों को सेवा प्रदान करता है। इसके अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, तेलंगाना और राजस्थान में ₹424.02 करोड़ की कुल लागत से 10 स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा हो चुका है।

योजना का दायरा और विशेषताएँ

यह योजना 'विरासत भी, विकास भी' के मार्गदर्शक सिद्धांत पर आधारित है। शामली, कुन्नूर, बालाघाट जंक्शन, कालका और माजबात जैसे पुनर्विकसित स्टेशन स्थानीय संस्कृति और विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रदर्शित करते हैं। स्टेशनों में भव्य प्रवेश द्वार, आधुनिक प्रतीक्षा कक्ष, लिफ्ट, एस्केलेटर, बेहतर यात्री सूचना प्रणाली, कार्यकारी लाउंज और 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' पहल के तहत स्थानीय उत्पादों के लिए समर्पित स्थान शामिल हैं।

यह योजना मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, बेहतर पहुँच और आसपास के शहरी क्षेत्रों के साथ एकीकरण को बढ़ावा देती है। 2026 के मध्य तक पुनर्विकास के लिए 1,338 से अधिक स्टेशनों की पहचान की जा चुकी है।

आगे की राह

अमृत भारत स्टेशन योजना वंदे भारत ट्रेनों और समर्पित माल गलियारों जैसी अन्य परिवर्तनकारी पहलों के अनुरूप है। लाखों दैनिक यात्रियों के लिए बेहतर आवागमन अनुभव सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह परियोजना 'अमृत काल' में भारत की वैश्विक मानकों की ओर यात्रा को भी दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ के इस विशाल कार्यक्रम की असली कसौटी यह है कि क्या बुनियादी ढाँचे की चमक यात्री अनुभव में टिकाऊ सुधार में बदलती है — या यह केवल उद्घाटन की राजनीति तक सीमित रहती है। 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' और दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएँ सराहनीय हैं, परंतु रखरखाव और संचालन की दीर्घकालिक जवाबदेही का ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है। जब तक स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र नहीं बनता, इन स्टेशनों की चमक कुछ वर्षों में फीकी पड़ने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमृत भारत स्टेशन योजना क्या है?
अमृत भारत स्टेशन योजना दिसंबर 2022 में शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रमुख रेलवे पुनर्विकास पहल है, जिसके तहत देशभर में 1,340 से अधिक स्टेशनों का ₹71,000 करोड़ से अधिक के निवेश से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। यह योजना मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाओं और स्थानीय विरासत के संरक्षण पर केंद्रित है।
इस बार कितने स्टेशनों का उद्घाटन होगा और किन राज्यों में?
PM मोदी इस चरण में 20 राज्यों में 75 पुनर्विकसित स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे, जिनकी कुल लागत ₹1,570 करोड़ है। इनमें पंजाब का जालंधर कैंट, दिल्ली का मोदी नगर और तेलंगाना का हाई-टेक सिटी स्टेशन प्रमुख हैं।
जालंधर कैंट स्टेशन में क्या नई सुविधाएँ जोड़ी गई हैं?
110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट स्टेशन का ₹125 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण हुआ है। इसमें दोहरी ऊँचाई का एयर कॉनकोर्स, 40 मीटर चौड़ी ट्रफ रूफ, दो नए फुट ओवर ब्रिज, 4,855 वर्ग मीटर का पार्किंग क्षेत्र और शहर के दोनों ओर से प्रवेश की सुविधा शामिल है।
इस योजना से आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?
पुनर्विकसित स्टेशनों पर आधुनिक प्रतीक्षा कक्ष, बेहतर शौचालय, लिफ्ट, एस्केलेटर, एयर कॉनकोर्स और यात्री सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएँ मिलेंगी। दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रैंप, स्पर्शनीय मार्ग और विशेष शौचालय भी अनिवार्य रूप से शामिल किए गए हैं।
अब तक इस योजना के तहत कितने स्टेशन पूरे हो चुके हैं?
हाल के चरणों में अब तक 122 स्टेशन पूरे हो चुके हैं। फरवरी 2024 में 554 स्टेशनों की आधारशिला रखी गई थी और मई 2025 में 18 राज्यों में 103 स्टेशनों का उद्घाटन किया गया था। 2026 के मध्य तक 1,338 से अधिक स्टेशनों की पहचान पुनर्विकास के लिए की जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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