12 जुलाई 2026
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अमृतसर केंद्रीय जेल में 'प्रोजेक्ट उड़ान' लॉन्च, 200 महिला बंदियों को मिलेगा सिलाई-कढ़ाई का कौशल प्रशिक्षण

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अमृतसर केंद्रीय जेल में 'प्रोजेक्ट उड़ान' लॉन्च, 200 महिला बंदियों को मिलेगा सिलाई-कढ़ाई का कौशल प्रशिक्षण

सारांश

अमृतसर केंद्रीय जेल की दीवारों के भीतर एक नई उड़ान की शुरुआत हुई — पीएचडीसीसीआई के 'प्रोजेक्ट उड़ान' के तहत 200 महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई और फैशन तकनीक का प्रशिक्षण मिलेगा, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर जीवन की नींव रख सकें।

मुख्य बातें

पीएचडीसीसीआई ने 12 जुलाई 2026 को केंद्रीय जेल, अमृतसर में 'प्रोजेक्ट उड़ान' की शुरुआत की।
कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया।
महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, टेक्सटाइल क्राफ्ट और आधुनिक फैशन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम में लगभग 200 महिला बंदियों ने भाग लिया।
राज्यपाल ने केंद्र को सिलाई मशीनें भेंट कीं और बंदियों से सीधे संवाद किया।
परियोजना पीएचडीसीसीआई, रीजनल फैशन टेक्स एंड टेक फोरम और स्टूडियो बाय हिमानी अरोड़ा के सहयोग से संचालित है।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने 12 जुलाई 2026 को केंद्रीय जेल, अमृतसर में महिला बंदियों के पुनर्वास के लिए 'प्रोजेक्ट उड़ान' की शुरुआत की। इस पहल के तहत स्थापित कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया, जिसमें लगभग 200 महिला बंदियों ने भाग लिया।

प्रोजेक्ट उड़ान क्या है

यह परियोजना पीएचडीसीसीआई के रीजनल फैशन टेक्स एंड टेक फोरम, पंजाब स्टेट चैप्टर और स्टूडियो बाय हिमानी अरोड़ा के संयुक्त सहयोग से तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य जेल में बंद महिलाओं को व्यावसायिक कौशल से लैस कर उन्हें रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के योग्य बनाना है।

रीजनल फैशन टेक्स एंड टेक फोरम की चेयर और 'प्रोजेक्ट उड़ान' की प्रमुख संचालक हिमानी अरोड़ा ने बताया कि महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, टेक्सटाइल क्राफ्ट और आधुनिक फैशन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'इस पहल का उद्देश्य केवल तकनीकी कौशल सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उद्यमिता की भावना विकसित करना भी है, ताकि वे भविष्य में स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।'

राज्यपाल का संबोधन और योगदान

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कार्यक्रम में कहा, 'किसी भी व्यक्ति के पुनर्वास का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा, कौशल विकास और श्रम की गरिमा है। उद्योग और सरकार के बीच बेहतर सहयोग से ऐसे स्थायी अवसर तैयार किए जा सकते हैं, जो समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।'

उन्होंने कौशल विकास केंद्र को सिलाई मशीनें भेंट कीं और महिला बंदियों से सीधे संवाद कर उन्हें प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कटारिया ने कहा कि सही मार्गदर्शन और कौशल के माध्यम से जीवन में नई शुरुआत संभव है।

उद्योग जगत की भागीदारी

पीएचडीसीसीआई के पंजाब स्टेट चैप्टर के चेयर करण गिल्होत्रा ने कहा कि इस कौशल विकास केंद्र का उद्देश्य महिला बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा, 'जेल से रिहा होने के बाद महिलाएं सम्मानपूर्वक अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें, इसी सोच के साथ यह परियोजना शुरू की गई है।'

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है। यह भारत में उद्योग-जेल साझेदारी का एक उल्लेखनीय उदाहरण है जहाँ निजी क्षेत्र सरकारी तंत्र के साथ मिलकर सामाजिक उत्तरदायित्व निभा रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति

इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह, केंद्रीय जेल अमृतसर के अधीक्षक राजीव कुमार अरोड़ा, पीएचडीसीसीआई के पदाधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समापन पर उप महानिरीक्षक (जेल) एस.एस. मान ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'प्रोजेक्ट उड़ान' महिला बंदियों के सफल पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आगे की राह

कार्यक्रम में शामिल लगभग 200 महिला बंदियों ने इस पहल को अपने भविष्य को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक प्रयास बताया। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षण के बाद कितनी महिलाएं रिहाई पर स्वरोजगार या नौकरी हासिल करने में सफल होती हैं — जो इस परियोजना की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में जेल-आधारित कौशल कार्यक्रमों का इतिहास बताता है कि प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की खाई अक्सर पाटी नहीं जाती। असली सवाल यह है कि रिहाई के बाद इन महिलाओं को बाज़ार से जोड़ने की क्या व्यवस्था है — क्या पीएचडीसीसीआई के सदस्य उद्योग इन्हें खरीदार या नियोक्ता के रूप में अपनाएंगे? बिना प्लेसमेंट या मार्केट-लिंकेज के, यह केंद्र एक और सुविधा बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है। परियोजना की सफलता का मापदंड उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि एक-दो साल बाद इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति होगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रोजेक्ट उड़ान' क्या है और इसे किसने शुरू किया?
'प्रोजेक्ट उड़ान' पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा केंद्रीय जेल, अमृतसर में शुरू की गई एक कौशल विकास परियोजना है, जिसका उद्देश्य महिला बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसे 12 जुलाई 2026 को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उद्घाटित किया।
इस परियोजना के तहत महिला बंदियों को कौन-सा प्रशिक्षण मिलेगा?
महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, टेक्सटाइल क्राफ्ट और आधुनिक फैशन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उद्यमिता की भावना विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम में कितनी महिला बंदियों ने भाग लिया?
12 जुलाई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 200 महिला बंदियों ने भाग लिया। उन्होंने इसे अपने भविष्य को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक प्रयास बताया।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस पहल पर क्या कहा?
राज्यपाल कटारिया ने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और श्रम की गरिमा किसी भी व्यक्ति के पुनर्वास का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कौशल विकास केंद्र को सिलाई मशीनें भेंट कीं और महिला बंदियों को प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
यह परियोजना किन संस्थाओं के सहयोग से चलाई जा रही है?
'प्रोजेक्ट उड़ान' पीएचडीसीसीआई के रीजनल फैशन टेक्स एंड टेक फोरम, पंजाब स्टेट चैप्टर और स्टूडियो बाय हिमानी अरोड़ा के संयुक्त सहयोग से संचालित है। हिमानी अरोड़ा इस परियोजना की प्रमुख संचालक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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