'पेड्डी' विवाद पर अनु अग्रवाल बोलीं — एक्टर्स को 'ना' कहने की हिम्मत रखनी चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
'आशिकी' फेम अभिनेत्री अनु अग्रवाल ने राम चरण और जान्हवी कपूर अभिनीत फिल्म 'पेड्डी' को लेकर छिड़े ऑब्जेक्टिफिकेशन विवाद पर अपनी बात रखी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के ज़रिए कहा कि यह बहस उन्हें 30 साल पहले लिए गए अपने उस फैसले की याद दिलाती है, जब उन्होंने महिला किरदारों के वस्तुकरण के चलन के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लिया था।
अनु अग्रवाल ने क्या कहा
अनु अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'पेड्डी' को लेकर चल रही चर्चा ने उन्हें बरसों पहले लिए एक अहम फैसले की याद दिला दी। उन्होंने आज के दर्शकों की सराहना करते हुए कहा कि वे आवाज उठा रहे हैं और महिला किरदारों में ज़्यादा सम्मान की माँग कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह जिम्मेदारी केवल दर्शकों या फिल्ममेकर्स की नहीं, बल्कि अभिनेताओं की भी है।
उन्होंने कहा, 'आशिकी' के बाद उन्होंने तय किया था कि कोई भी फिल्म साइन करने से पहले पूरी कहानी सुनेंगी। उस दौर में महिलाओं को सिर्फ वस्तु की तरह पेश करना आम बात थी और उन्होंने उस चलन के खिलाफ काम करने का फैसला किया। उन्होंने स्वीकार किया कि इसी वजह से वे धीरे-धीरे फिल्मों से दूर होती चली गईं।
युवा एक्टर्स से अपील
अनु अग्रवाल ने नई पीढ़ी के अभिनेताओं से अपील की कि वे स्क्रिप्ट ध्यान से सुनें, सवाल पूछें और यदि कोई भूमिका सम्मान से समझौता करती हो तो 'ना' कहने की हिम्मत रखें। उनका मानना है कि कहानियाँ तब बदलेंगी जब दर्शक बेहतर माँगेंगे — लेकिन तब भी बदलेंगी जब अभिनेता खुद ऐसी भूमिकाओं में हिस्सा लेने से इनकार करेंगे।
'पेड्डी' विवाद की पृष्ठभूमि
फिल्म 'पेड्डी' रिलीज़ के बाद से विवादों में घिरी हुई है। जान्हवी कपूर के किरदार 'अचियम्मा' के कुछ दृश्यों को ऑब्जेक्टिफिकेशन यानी महिलाओं के वस्तुकरण के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना के बाद फिल्म के निर्देशक बुची बाबू सना ने माफी माँगी और विवादित दृश्यों को एडिट करने का ऐलान किया।
निर्देशक ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा कभी किसी महिला पात्र का अपमान करना नहीं था, लेकिन दर्शकों की असहजता का वे सम्मान करते हैं।
व्यापक बहस और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मनोरंजन उद्योग में महिला किरदारों की गरिमा को लेकर बहस तेज़ हो रही है। अनु अग्रवाल जैसी अनुभवी अभिनेत्री का यह बयान इस बहस में एक महत्त्वपूर्ण आवाज़ जोड़ता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी फिल्म के दृश्यों पर इस तरह का विवाद खड़ा हुआ हो — लेकिन इस बार अभिनेत्रियों का सार्वजनिक रूप से सामने आना उद्योग के भीतर बदलाव की माँग को नई ऊर्जा दे रहा है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या 'पेड्डी' के विवाद से मिला सबक बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा दोनों में स्क्रिप्ट चयन की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।