कुपवाड़ा के माछिल में सेना ने खोला स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर, युवाओं में उत्साह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 27 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के दूरदराज़ क्षेत्र माछिल में एक स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया। इस केंद्र में आईटी लैब, वोकेशनल ट्रेनिंग, कालीन बुनाई, सिलाई और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। स्थानीय निवासियों ने सेना की इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया है।
केंद्र में क्या-क्या सुविधाएँ हैं
नए केंद्र में कंप्यूटर लैब, कालीन बुनाई केंद्र, सिलाई प्रशिक्षण और वाईफाई-सुविधायुक्त पुस्तकालय शामिल हैं। वोकेशनल और आईटी प्रशिक्षण एक ही छत के नीचे मिलने से माछिल के निवासियों को अब शिक्षा और कौशल के लिए लंबी दूरी तय कर कुपवाड़ा शहर नहीं जाना पड़ेगा। उद्घाटन समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों — महिलाएँ, युवा, बुज़ुर्ग — को शामिल किया गया।
स्थानीय युवाओं की प्रतिक्रिया
एक स्थानीय युवती ने कहा, 'मैं भारतीय सेना की बहुत आभारी हूँ। पहले यहाँ कुछ भी नहीं था। अब हमारे पास कालीन बुनाई केंद्र, कंप्यूटर और अन्य सुविधाएँ हैं, और हम नई-नई कलाएँ सीख पाएँगे। यहाँ माछिल से कुपवाड़ा जाने में काफ़ी वक़्त लगता था, घर वाले जाने भी नहीं देते थे। अब सेना की इस पहल से हम लोगों को काफ़ी कुछ सीखने को मिलेगा।'
एक अन्य युवती ने बताया कि कंप्यूटर और कालीन बुनाई की ट्रेनिंग के लिए पहले कुपवाड़ा तक जाना पड़ता था, लेकिन अब सेना की इस पहल से यह सुविधा सीधे गाँव में मिल रही है। एक स्थानीय युवक ने कहा कि इस केंद्र से उनकी माताएँ, बहनें और अन्य महिलाएँ सिलाई सीखकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
समुदाय पर असर
माछिल जैसे सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र में शैक्षिक और व्यावसायिक संसाधनों की भारी कमी रही है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि लाइब्रेरी में किताबों के साथ-साथ वाईफाई की सुविधा भी दी गई है, जिससे छात्र ऑनलाइन सामग्री तक पहुँच सकेंगे। एक अन्य निवासी ने कहा कि बच्चों ने कभी सोचा भी नहीं था कि कंप्यूटर जैसी तकनीक उनके गाँव में ही सीखने को मिलेगी।
सेना की सामाजिक भूमिका
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सेना की नागरिक-सहयोग गतिविधियाँ, जिन्हें 'ऑपरेशन सद्भावना' के तहत संचालित किया जाता है, लगातार विस्तार पा रही हैं। गौरतलब है कि सीमावर्ती ज़िलों में बुनियादी शिक्षा और कौशल अवसंरचना की कमी को दूर करने में सेना की ऐसी पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। इस केंद्र से माछिल क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या
स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि इस केंद्र के ज़रिये युवा न केवल कौशल अर्जित करेंगे, बल्कि रोज़गार के नए अवसर भी तलाश पाएँगे। सेना की यह पहल माछिल जैसे अन्य सुदूर क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।