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आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में जारी किया स्मारक डाक टिकट, 5 राष्ट्रीय पहलें लॉन्च

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आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में जारी किया स्मारक डाक टिकट, 5 राष्ट्रीय पहलें लॉन्च

सारांश

आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल — और यह सिर्फ उत्सव नहीं था। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन द्वारा स्मारक डाक टिकट जारी करना और 500 स्टार्टअप्स से लेकर 2030 तक 1 लाख टन प्लास्टिक कटौती तक की पाँच पहलें यह संकेत देती हैं कि संगठन आध्यात्म से आगे राष्ट्र-निर्माण की भूमिका में कदम रख रहा है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 29 मई 2025 को बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग की 45वीं वर्षगांठ पर स्मारक डाक टिकट जारी किया।
पाँच नई राष्ट्रीय पहलें लॉन्च — यूथ करियर एक्सीलेंस, ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स, इनोवेशन इनक्यूबेशन, कॉन्शियसनेस स्टडीज और इको शांति शामिल।
इको शांति पहल का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 1 लाख टन सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोग कम करना।
इनक्यूबेशन कार्यक्रम के तहत 500 स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और प्रारंभिक फंडिंग देने का संकल्प।
एक महीने के उत्सव में देश-विदेश से 678 विशिष्ट अतिथि शामिल हुए; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी उत्सव के दौरान उपस्थित रहे।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग अब 182 देशों में सक्रिय है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 29 मई 2025 को बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में 'द आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन' की 45वीं वर्षगांठ पर एक स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया और पाँच नई राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया। यह समारोह लगभग एक महीने तक चले उत्सव का समापन-दिवस था, जिसमें देश-विदेश से 678 विशिष्ट अतिथि सम्मिलित हुए।

पाँच नई राष्ट्रीय पहलें: क्या है खास

समारोह में जिन पाँच पहलों का शुभारंभ किया गया, वे शिक्षा, नवाचार, पर्यावरण और मानव विकास को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं। यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम के अंतर्गत युवाओं को सिविल सेवा और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स पूर्वी ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शिक्षा और शोध से जोड़ेगी।

आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इनक्यूबेशन के तहत 500 स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और प्रारंभिक फंडिंग उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल चेतना, मानसिक स्वास्थ्य और मानव क्षमता पर शोध को बढ़ावा देगा। वहीं, इको शांति पहल के अंतर्गत 2030 तक प्रतिवर्ष कम से कम 1 लाख टन सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोग घटाने का संकल्प लिया गया है।

उपराष्ट्रपति का संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, 'आज हम एक ऐसे महान विचार का उत्सव मना रहे हैं जिसने दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि आर्ट ऑफ लिविंग 182 देशों में मौजूद है — यह पूरी मानवता को जोड़ने का काम कर रहा है।'

उन्होंने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की सादगी और व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा, '45 साल पहले एक ऐसे विचार के साथ यह यात्रा शुरू हुई थी, जिसमें माना गया कि आंतरिक शांति ही बाहरी सद्भाव की नींव है। आज संघर्ष और अनिश्चितता के दौर में गुरुदेव लोगों को शांति, जागरूकता और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा दे रहे हैं।'

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का संदेश

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि आज की दुनिया में 'ध्यान' केवल विलासिता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा, '192 देशों द्वारा वर्ल्ड मेडिटेशन डे घोषित किया जाना इस बात का संकेत है कि ध्यान अब स्वस्थ, खुशहाल और तनावमुक्त जीवन के लिए जरूरी माना जा रहा है।'

गुरुदेव ने कहा, 'जीवन में हमेशा तीन चीजें साथ रहनी चाहिए — ज्ञान, ध्यान और संगीत।' उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को साकार करने का आह्वान करते हुए एक ऐसी दुनिया की परिकल्पना रखी जहाँ भय, तनाव और नफरत का कोई स्थान न हो।

राज्यपाल और अन्य गणमान्यों की उपस्थिति

कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लिए यह गर्व की बात है कि इस वैश्विक आंदोलन की जड़ें राज्य से जुड़ी हैं। उन्होंने गुरुदेव के शांति प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय से चले आ रहे कई संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि लगभग एक महीने तक चले इस उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित देश के अनेक राजनीतिक नेता, उद्योगपति, खिलाड़ी, शिक्षाविद, धार्मिक गुरु, राजनयिक और कलाकार शामिल हुए।

उपराष्ट्रपति ने अपने दौरे के दौरान श्री श्री गुरुकुलम का भ्रमण किया, छात्रों से मुलाकात की और विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। उन्होंने श्री श्री गौशाला का भी दौरा किया, जहाँ करीब 1,600 देशी गायें हैं। समारोह में आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोग्राम का प्रदर्शन भी एक विशेष आकर्षण रहा, जिसमें बच्चों ने अपनी प्रशिक्षित सहज क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

आगे की राह

फाउंडेशन की पाँचों नई पहलें आने वाले वर्षों में शिक्षा, उद्यमिता और पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी पहुँच विस्तारित करेंगी। 2030 तक 1 लाख टन प्लास्टिक कटौती का लक्ष्य और 500 स्टार्टअप्स को समर्थन देने की योजना यह दर्शाती है कि संगठन अब सामाजिक-आध्यात्मिक दायरे से आगे बढ़कर व्यावहारिक राष्ट्र-निर्माण में भागीदारी की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी स्वतंत्र निगरानी का ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब नागरिक समाज संगठनों से जवाबदेही की माँग बढ़ रही है — ऐसे में इन पहलों की पारदर्शी रिपोर्टिंग ही इनकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर्ट ऑफ लिविंग की 45वीं वर्षगांठ समारोह में क्या हुआ?
29 मई 2025 को बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने स्मारक डाक टिकट जारी किया और पाँच नई राष्ट्रीय पहलें लॉन्च कीं। यह एक महीने तक चले उत्सव का समापन कार्यक्रम था जिसमें 678 विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।
आर्ट ऑफ लिविंग की पाँच नई पहलें कौन-सी हैं?
पाँच पहलें हैं — यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम, फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इनक्यूबेशन (500 स्टार्टअप्स के लिए), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल, और इको शांति। इनका उद्देश्य शिक्षा, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और मानव विकास को बढ़ावा देना है।
इको शांति पहल का लक्ष्य क्या है?
इको शांति पहल का उद्देश्य सिंगल यूज प्लास्टिक को समाप्त करना है। इसके तहत 2030 तक प्रतिवर्ष कम से कम 1 लाख टन प्लास्टिक उपयोग घटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आर्ट ऑफ लिविंग कितने देशों में सक्रिय है?
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के अनुसार, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन अभी 182 देशों में सक्रिय है। उन्होंने यह भी बताया कि 192 देशों द्वारा वर्ल्ड मेडिटेशन डे घोषित किया जाना ध्यान की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
समारोह में कौन-कौन से प्रमुख लोग शामिल हुए?
एक महीने तक चले इस उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत सहित राजनीतिक नेता, उद्योगपति, खिलाड़ी, शिक्षाविद, धार्मिक गुरु और राजनयिक शामिल हुए। समापन समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि रहे।
राष्ट्र प्रेस
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