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डीके शिवकुमार का 'कृतज्ञता की दीवार' ऐलान: जनहित में जमीन देने वालों को मिलेगा स्थायी सम्मान

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डीके शिवकुमार का 'कृतज्ञता की दीवार' ऐलान: जनहित में जमीन देने वालों को मिलेगा स्थायी सम्मान

सारांश

बेंगलुरु में केम्पेगौड़ा जयंती पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 'आभार दीवार' की घोषणा की — जनहित में जमीन देने वालों को स्थायी सम्मान देने की यह पहल एस.एम. कृष्णा की 10-लेन सड़क से शुरू होगी, जिसे आगे 123 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 27 जून 2026 को बेंगलुरु में 'आभार दीवार' (कृतज्ञता की दीवार) बनाने की घोषणा की।
जनहित परियोजनाओं — सड़क, स्कूल, झील, औद्योगिक क्षेत्र — के लिए स्वेच्छा से जमीन देने वाले मालिकों के नाम इस दीवार पर दर्ज होंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम.
कृष्णा के नाम पर 10-लेन सड़क का उद्घाटन; इसे 11 किमी से बढ़ाकर 123 किमी के कॉरिडोर में विस्तारित किया जाएगा।
BDA ने 15 लाख पौधे लगाए; बेंगलुरु विश्वविद्यालय में केम्पेगौड़ा स्टडी सेंटर के लिए 9.5 एकड़ जमीन आवंटित।
हुथ्रिदुर्गा में ₹10 करोड़ का विकास कार्यक्रम; हेब्बल के पास टनल रोड निर्माण जल्द शुरू होगा।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 27 जून 2026 को बेंगलुरु में घोषणा की कि राज्य सरकार उन भूमि मालिकों के सम्मान में 'आभार दीवार' (कृतज्ञता की दीवार) का निर्माण करेगी, जो स्वेच्छा से सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन समर्पित करते हैं। बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) द्वारा विकसित केम्पेगौड़ा लेआउट में आयोजित 517वीं केम्पेगौड़ा जयंती समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल उन लोगों के त्याग को स्थायी रूप से दर्ज करेगी जिन्होंने सड़क, स्कूल, झील और औद्योगिक क्षेत्र जैसी परियोजनाओं के लिए जमीन दी।

क्या है 'आभार दीवार' योजना

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि जो भूमि मालिक बिना किसी आपत्ति के जन-कल्याणकारी परियोजनाओं — जैसे औद्योगिक क्षेत्र, स्कूल, झील और सड़क निर्माण — के लिए अपनी जमीन सौंपते हैं, उनके नाम इस दीवार पर अंकित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "इसके जरिए इन जमीन मालिकों के त्याग को याद किया जाएगा।" यह पहल उस 10-लेन वाली एस.एम. कृष्णा सड़क के किनारे शुरू होगी, जिसका उद्घाटन उसी दिन किया गया।

एस.एम. कृष्णा सड़क और भविष्य की योजनाएं

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा के नाम पर बनी 10-लेन सड़क का उद्घाटन किया गया, जो फिलहाल 11 किलोमीटर लंबी है। आगे चलकर इसे 123 किलोमीटर के कॉरिडोर के रूप में विस्तारित किया जाएगा। इसके साथ ही, हेब्बल के पास एक छोटी टनल रोड का निर्माण कुछ दिनों में शुरू होने की बात उन्होंने कही, और बेंगलुरु की यातायात भीड़ कम करने के लिए एक बड़ी टनल रोड की योजना भी बताई।

हरित बेंगलुरु और केम्पेगौड़ा की विरासत

शिवकुमार ने घोषणा की कि BDA की ओर से 15 लाख पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने बेंगलुरु के हर स्कूल को एक-एक इलाका संभालकर बच्चों से पेड़ लगवाने और उनकी देखभाल करवाने के कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा। इस संदर्भ में GBA द्वारा एक प्रतियोगिता आयोजित करने की भी बात कही गई। उन्होंने याद दिलाया कि एस.एम. कृष्णा के कार्यकाल में बाल गंगाधरनाथ स्वामीजी ने 5 करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया था।

केम्पेगौड़ा स्टडी सेंटर और अन्य विकास कार्य

बेंगलुरु विश्वविद्यालय में केम्पेगौड़ा स्टडी सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने अपने चुनाव क्षेत्र में 9.5 एकड़ जमीन इस केंद्र के लिए दी है। इसके अलावा, हुथ्रिदुर्गा में ₹10 करोड़ का विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शिवकुमार ने कहा कि केंगेरी और येलाहंका जैसे शहर भी भूमि अधिग्रहण की नींव पर बने हैं, और मंत्री परमेश्वर तुमकुरु में एक टाउनशिप बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

शिवकुमार का दर्शन: इतिहास बनाना

उपमुख्यमंत्री ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा, "अंबेडकर ने कहा है कि जो इतिहास भूल जाता है, वह इतिहास नहीं बना सकता। इतिहास पढ़ने या याद रखने से ज्यादा, मुझे इतिहास बनाना पसंद है।" उन्होंने उन सभी भूमि दाताओं को नमन करते हुए कहा कि जन्म और मृत्यु के बीच जो त्याग किया जाता है, वही व्यक्ति की असली पहचान बनता है। आने वाले दिनों में 'आभार दीवार' की यह पहल राज्यभर की परियोजनाओं में लागू की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या प्रतीकात्मक सम्मान उस आर्थिक क्षति की भरपाई कर सकता है जो भूमि अधिग्रहण में अक्सर होती है। कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण विवाद नए नहीं हैं — केंगेरी और येलाहंका जैसे उदाहरण खुद शिवकुमार ने गिनाए। यह पहल तब अधिक विश्वसनीय होगी जब इसके साथ उचित मुआवजे और पारदर्शी प्रक्रिया की गारंटी भी हो। 123 किलोमीटर के कॉरिडोर की महत्वाकांक्षा और हेब्बल टनल रोड की घोषणाएं बेंगलुरु की यातायात समस्या का समाधान सुझाती हैं, पर क्रियान्वयन की समयसीमा और बजट का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'आभार दीवार' या 'कृतज्ञता की दीवार' क्या है?
यह कर्नाटक सरकार की एक पहल है जिसमें सार्वजनिक परियोजनाओं — जैसे सड़क, स्कूल, झील या औद्योगिक क्षेत्र — के लिए स्वेच्छा से जमीन देने वाले मालिकों के नाम एक स्थायी दीवार पर अंकित किए जाएंगे। इसकी घोषणा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 27 जून 2026 को केम्पेगौड़ा जयंती समारोह में की।
यह दीवार सबसे पहले कहाँ बनेगी?
पहली 'आभार दीवार' बेंगलुरु में पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा के नाम पर बनी 10-लेन सड़क के किनारे बनाई जाएगी। शिवकुमार ने कहा कि आगे यह पहल राज्यभर की सभी प्रमुख परियोजनाओं में लागू की जाएगी।
एस.एम. कृष्णा सड़क को 123 किलोमीटर तक कैसे बढ़ाया जाएगा?
फिलहाल यह 10-लेन सड़क 11 किलोमीटर लंबी है। शिवकुमार ने घोषणा की कि इसे भविष्य में 123 किलोमीटर के पूर्ण कॉरिडोर के रूप में विस्तारित किया जाएगा, हालांकि विस्तार की समयसीमा और बजट का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
बेंगलुरु में टनल रोड की क्या योजना है?
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि हेब्बल के पास एक छोटी टनल रोड का निर्माण कुछ दिनों में शुरू होगा। इसके अलावा बेंगलुरु की यातायात भीड़ कम करने के लिए एक बड़ी टनल रोड की भी योजना बनाई गई है, जिसके लिए अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की जाएगी।
केम्पेगौड़ा स्टडी सेंटर कहाँ और कैसे बनेगा?
केम्पेगौड़ा स्टडी सेंटर बेंगलुरु विश्वविद्यालय में स्थापित किया जाएगा। मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने इसके लिए अपने चुनाव क्षेत्र में 9.5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है।
राष्ट्र प्रेस
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