24 सितंबर 2026
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चुनाव आयोग सत्ता का गुलाम, अधिकारियों को जेल हो: शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत

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चुनाव आयोग सत्ता का गुलाम, अधिकारियों को जेल हो: शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग को 'सत्ता का गुलाम' बताते हुए अधिकारियों को जेल भेजने की माँग की। महाराष्ट्र-बंगाल में दोबारा चुनाव, बैलेट पेपर की वापसी और किसानों को राहत के लिए 5 अक्टूबर की डेडलाइन — विपक्ष का बहुमोर्चा हमला।

मुख्य बातें

अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग को 'सत्ता का गुलाम' बताया और आयोग के अधिकारियों को जेल भेजने की माँग की।
उद्धव ठाकरे की माँग — महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव हों और अगला मतदान बैलेट पेपर से हो।
आखिरी दो घंटों में 42 लाख मतों पर पारदर्शिता की माँग; सीसीटीवी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील।
सावंत ने सरकार को 5 अक्टूबर 2026 तक सूखाग्रस्त किसानों को राहत देने की चेतावनी दी; विफलता पर सड़क आंदोलन का ऐलान।
आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे मामले में निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आयोग सत्ता पक्ष के दबाव में काम करता है और उसके अधिकारियों को जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) फैसले, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति, आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे मामले और राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका सहित कई अहम मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।

चुनाव आयोग पर सीधा हमला

सावंत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग 'सत्ता का गुलाम' है और उससे निष्पक्षता की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर पत्रकार परिषद में माँग रखी है। सावंत ने यह भी कहा कि आयोग के अधिकारियों को जेल जाना चाहिए — यह उनका पहला बयान नहीं है, बल्कि वे पहले भी यही रुख अपना चुके हैं।

उन्होंने एसआईआर पर आयोग के उस बयान पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि प्रक्रिया सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के बाद शुरू हुई। सावंत ने कहा कि यदि मतदान केंद्रों पर भीड़ और मतदान प्रक्रिया से संबंधित सीसीटीवी रिकॉर्ड आयोग के पास था, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि आयोग का आचरण भ्रष्ट है और जनता के मन में लगातार सवाल उठ रहे हैं।

आखिरी दो घंटों में मतदान और पश्चिम बंगाल ईवीएम विवाद

सावंत ने चुनाव के दौरान आखिरी दो घंटों में 42 लाख लोगों के मतदान करने के सवाल का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान ईवीएम में आग लगने की कथित घटना का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद संबित पात्रा पर निशाना साधा।

सावंत ने पात्रा से पूछा कि उन्होंने उस मामले में जाँच की माँग क्यों नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित भ्रष्टाचार पकड़े जाने के डर से मशीन को ही जला दिया गया। पात्रा को उन्होंने 'सत्ता पक्ष का समर्थक' बताते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की तरफ से वकालत करते हैं।

महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव और बैलेट पेपर की माँग

सावंत ने स्पष्ट किया कि उद्धव ठाकरे ने माँग की है कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराए जाएँ। उनके अनुसार, जहाँ-जहाँ चुनाव हुए हैं, वहाँ पुनर्मतदान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगला चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से कराया जाना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों का एक बड़ा तबका लगातार ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है। गौरतलब है कि यह माँग नई नहीं है, लेकिन एसआईआर विवाद के बाद इसे नए सिरे से उठाया गया है।

महाराष्ट्र सूखा: 5 अक्टूबर तक की चेतावनी

महाराष्ट्र में सूखे और किसानों की दयनीय स्थिति पर सावंत ने कहा कि वे खुद 28 और 29 सितंबर को प्रभावित इलाकों का दौरा करने जा रहे हैं। पार्टी के विधायक और उपनेता भी किसानों के बीच जाकर रैलियाँ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सरकार की आँखें खोलना है।

सावंत ने सरकार को 5 अक्टूबर 2026 तक की समयसीमा दी और कहा कि यदि तब तक किसानों को मदद नहीं मिली, तो शिवसेना (यूबीटी) सड़क पर उतरेगी। उन्होंने माना कि मुख्यमंत्री भी अब दौरे कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी सहायता की तत्काल जरूरत है।

आईआईटी बॉम्बे छात्र मामला और राहुल गांधी पर टिप्पणी

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे मामले पर सावंत ने कहा कि वे इसे केवल जातिगत चर्चा के दायरे से अलग नज़रिए से देखते हैं। उन्होंने माँग की कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच हो, और यदि जाँच में जातिगत अत्याचार या अन्याय सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के देशव्यापी प्रभाव की बात कही — सावंत ने कहा कि कांग्रेस नेता ऐसा कहेंगे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता गलत कामों के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं, और जंतर-मंतर से उठी छात्रों की आवाज़ अब देशभर में पहुँच रही है — जिसकी गूंज आगे और बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एसआईआर विवाद ने विपक्ष को एक ठोस मुद्दा थमा दिया है। असली सवाल यह है कि 42 लाख मतों वाले सीसीटीवी रिकॉर्ड को सार्वजनिक न करने का कोई संस्थागत कारण है या नहीं — यदि नहीं, तो आयोग की चुप्पी आरोपों को और बल देती है। किसानों को 5 अक्टूबर की डेडलाइन राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है, लेकिन महाराष्ट्र में सूखे की ज़मीनी हकीकत को नकारा नहीं जा सकता। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इन सभी मुद्दों — आयोग, ईवीएम, जातिगत न्याय, किसान — को एक साथ उठाना शिवसेना (यूबीटी) की व्यापक 'बहुमोर्चा' रणनीति का हिस्सा है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग को 'सत्ता का गुलाम' बताया और कहा कि आयोग के अधिकारियों को जेल भेजा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि आयोग का आचरण भ्रष्ट है और सीसीटीवी रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य सार्वजनिक न करना इसका प्रमाण है।
शिवसेना (यूबीटी) की दोबारा चुनाव की माँग क्या है?
उद्धव ठाकरे की माँग है कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराए जाएँ। इसके साथ ही अगला चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से कराने की भी माँग की गई है।
महाराष्ट्र सूखे पर अरविंद सावंत ने क्या कहा?
सावंत ने सरकार को 5 अक्टूबर 2026 तक किसानों को राहत देने की चेतावनी दी है और कहा कि यदि तब तक मदद नहीं मिली तो शिवसेना (यूबीटी) सड़क पर उतरेगी। वे खुद 28 और 29 सितंबर को प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे मामले पर सावंत का क्या कहना है?
सावंत ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। यदि जाँच में जातिगत अत्याचार या अन्याय सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।
संबित पात्रा को लेकर अरविंद सावंत ने क्या कहा?
सावंत ने भाजपा सांसद संबित पात्रा को 'सत्ता पक्ष का समर्थक' बताया। उन्होंने पात्रा से पूछा कि पश्चिम बंगाल में ईवीएम में आग लगने की कथित घटना पर उन्होंने जाँच की माँग क्यों नहीं की।
राष्ट्र प्रेस
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