29 अक्टूबर 2026
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असम में बाल विवाह पर बड़ी कार्रवाई: धुबरी जिले में 70 लोग हिरासत में, कई स्थानों पर छापेमारी

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असम में बाल विवाह पर बड़ी कार्रवाई: धुबरी जिले में 70 लोग हिरासत में, कई स्थानों पर छापेमारी

सारांश

असम के धुबरी जिले में पुलिस ने बाल विवाह के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए 70 लोगों को हिरासत में लिया। वकील जाकिर हुसैन के अनुसार जागरूकता की कमी इसकी मुख्य वजह है — गिरफ्तारी ज़रूरी है, पर असली लड़ाई शिक्षा और जागरूकता के मैदान में होनी होगी।

मुख्य बातें

असम पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को धुबरी जिले में बाल विवाह के विरुद्ध अभियान में 70 लोगों को हिरासत में लिया।
कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई; कुछ आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।
जिला अदालत के अधिवक्ता जाकिर हुसैन ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी एक प्रमुख कारण है।
यह अधिनियम 1 नवंबर 2007 से पूरे देश में लागू है, फिर भी उल्लंघन जारी हैं।
विशेषज्ञों ने गिरफ्तारी के साथ-साथ जागरूकता अभियान और शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।

असम पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को धुबरी जिले में बाल विवाह के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान के तहत 70 लोगों को हिरासत में लिया और कई स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार जाँच अभी जारी है और हिरासत में लिए गए कुछ आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने मंगलवार को धुबरी जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में एक साथ छापेमारी कर 70 आरोपियों को पकड़ा। इनमें से अधिकांश पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत मामले दर्ज हैं। कुछ आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि शेष की जाँच चल रही है।

जिला न्यायालय में पैरवी करने वाले अधिवक्ता जाकिर हुसैन ने बताया कि 'बुधवार तक उनके पास इस मामले में 2 मुवक्किल आ चुके हैं और वे जमानत अर्जी दाखिल करेंगे।' उन्होंने जमानत मिलने की उम्मीद जताई।

वकील की प्रतिक्रिया और कानूनी पहलू

अधिवक्ता हुसैन ने कहा कि असम सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है और बाल विवाह पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 को 1 नवंबर 2007 को पूरे देश में लागू किया गया था, फिर भी आम जनता में इसके प्रति जागरूकता की कमी बनी हुई है।

उन्होंने कहा, 'पूर्व में जितने भी बाल विवाह हुए हैं, वे इरादतन नहीं हुए होंगे — ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा के कारण लोग इस कानून से अनजान हैं।' हुसैन ने सरकार, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से कानूनी जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया।

समस्या की जड़ें: ग्रामीण इलाके और अशिक्षा

अधिवक्ता हुसैन के अनुसार बाल विवाह की अधिकांश घटनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आती हैं, जहाँ साक्षरता दर अपेक्षाकृत कम है। उनका मानना है कि जागरूकता के अभाव में परिवार अनजाने में इस कानून का उल्लंघन कर देते हैं।

गौरतलब है कि असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार बाल विवाह के विरुद्ध लगातार अभियान चला रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बाल विवाह के आँकड़े राष्ट्रीय औसत से अधिक बताए जाते रहे हैं।

बच्चों के भविष्य पर असर

अधिवक्ता हुसैन ने रेखांकित किया कि बाल विवाह के कारण लड़के और लड़कियों दोनों का भविष्य प्रभावित होता है। कम उम्र में विवाह से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है।

आलोचकों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी से यह समस्या नहीं सुलझेगी — दीर्घकालिक समाधान के लिए शिक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और व्यापक जागरूकता अभियान आवश्यक हैं।

क्या होगा आगे

हिरासत में लिए गए आरोपियों के मामले अब जिला न्यायालय में विचाराधीन हैं। जाँच एजेंसियाँ अन्य संदिग्ध मामलों की पड़ताल जारी रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 'अज्ञानता' में यह किया, तो सवाल उठता है कि क्या दंड से पहले जागरूकता की ज़िम्मेदारी राज्य की नहीं थी? अधिनियम को लागू हुए लगभग दो दशक हो चुके हैं, फिर भी ग्रामीण असम में यह जानकारी नहीं पहुँची — यह प्रशासनिक विफलता है। गिरफ्तारियाँ संख्या में प्रभावशाली दिख सकती हैं, पर बिना शिक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण के, यह चक्र नहीं टूटेगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के धुबरी में बाल विवाह पर क्या कार्रवाई हुई?
असम पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को धुबरी जिले में बाल विवाह के खिलाफ छापेमारी कर 70 लोगों को हिरासत में लिया। कुछ आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है और जाँच जारी है।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम कब लागू हुआ था?
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में संसद द्वारा पारित किया गया और 1 नवंबर 2007 को पूरे देश में प्रभावी हुआ। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में कानून के प्रति जागरूकता की कमी बनी हुई है।
वकील जाकिर हुसैन ने इस मामले में क्या कहा?
जिला न्यायालय के अधिवक्ता जाकिर हुसैन ने कहा कि सरकार की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अधिकांश उल्लंघन जानबूझकर नहीं, बल्कि जागरूकता के अभाव में हुए हैं। उन्होंने सरकार और सामाजिक संगठनों से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
असम में बाल विवाह की समस्या कहाँ अधिक है?
अधिवक्ता हुसैन के अनुसार बाल विवाह की ज़्यादातर घटनाएँ ग्रामीण इलाकों में होती हैं, जहाँ साक्षरता दर कम है और कानून की जानकारी सीमित है। अशिक्षा को इस समस्या का एक प्रमुख कारण बताया गया है।
हिरासत में लिए गए आरोपियों का आगे क्या होगा?
हिरासत में लिए गए 70 आरोपियों के मामले अब जिला न्यायालय में विचाराधीन हैं। अधिवक्ता जाकिर हुसैन के अनुसार जमानत अर्जियाँ दाखिल की जाएंगी और जमानत मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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