असम में बाल विवाह पर बड़ी कार्रवाई: 524 गिरफ्तार, 441 मामले दर्ज; CM हिमंता ने दी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि राज्य में जारी बाल विवाह विरोधी अभियान के तहत अब तक 524 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 441 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह आँकड़े मंगलवार शाम 5 बजे तक के बताए और स्पष्ट किया कि इस अवैध प्रथा में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री की चेतावनी और एक्स पर ऐलान
सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हम इस जघन्य अपराध में शामिल किसी को भी नहीं बख्शेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि असम बाल विवाह से मुक्त हो।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई उन अटकलों से पहले ही शुरू हो गई है जिनमें अभियान का अगला चरण नवंबर में शुरू होने की बात कही जा रही थी।
अभियान का स्वरूप और कानूनी आधार
पुलिस ने विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु का उल्लंघन करने वाले और ऐसे विवाहों को संपन्न कराने या सुविधा प्रदान करने में कथित तौर पर शामिल व्यक्तियों को निशाना बनाया है। गिरफ्तारियाँ विभिन्न जिलों से हुई हैं, हालाँकि राज्य सरकार ने अब तक जिलावार विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब असम सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ इस तरह का अभियान छेड़ा हो। इससे पहले भी राज्य में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ हुई थीं, जिन पर मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष ने सवाल उठाए थे।
बाल विवाह के दुष्परिणाम: सरकार का पक्ष
असम सरकार लगातार यह तर्क देती आई है कि बाल विवाह नाबालिगों — विशेषकर लड़कियों — के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए गंभीर खतरा है। कम उम्र में विवाह से अल्प गर्भावस्था, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ और शिक्षा में बाधा उत्पन्न होती है। आँकड़ों के अनुसार असम में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है, जो इस अभियान को नीतिगत प्राथमिकता बनाती है।
आलोचना और संतुलित दृष्टिकोण
आलोचकों का कहना है कि केवल गिरफ्तारियों से इस सामाजिक समस्या की जड़ें नहीं उखाड़ी जा सकतीं — जागरूकता, शिक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण भी ज़रूरी हैं। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह चिंता भी जताई है कि बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ कभी-कभी उन परिवारों को भी प्रभावित करती हैं जो स्वयं गरीबी और सामाजिक दबाव के शिकार हैं।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री सरमा के बयान से संकेत मिलता है कि यह अभियान आने वाले हफ्तों में और तेज होगा। राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह जल्द ही जिलावार विस्तृत आँकड़े जारी करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ दीर्घकालिक सामाजिक सुधार के क्या कदम उठाए जाते हैं।