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असम में बाल विवाह के खिलाफ सख्त अभियान: 5 साल में 12,196 मामले, 11,196 गिरफ्तार

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असम में बाल विवाह के खिलाफ सख्त अभियान: 5 साल में 12,196 मामले, 11,196 गिरफ्तार

सारांश

असम सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ नया गहन अभियान छेड़ा है — पाँच साल में 12,196 मामले और 11,196 गिरफ्तारियाँ इस लड़ाई की तीव्रता बताती हैं। 1 नवंबर को महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हुए सरकार कानूनी कार्रवाई को शिक्षा और सशक्तिकरण से जोड़ रही है।

मुख्य बातें

असम सरकार ने 20 अगस्त 2026 को बाल विवाह के विरुद्ध विशेष गहन अभियान की घोषणा की।
पिछले 5 वर्षों में राज्य में 12,196 मामले दर्ज, 11,196 लोग गिरफ्तार ।
सरकार ने 1 नवंबर को उन्मूलन प्रयासों का महत्वपूर्ण पड़ाव घोषित किया।
अभियान 'बोर असम' के संस्थापक चाओलुंग सिउ-का-फा की विरासत से प्रेरित।
कानूनी प्रवर्तन के साथ-साथ शिक्षा, सशक्तिकरण और आजीविका पहलों को भी जोड़ा जा रहा है।

असम सरकार ने 20 अगस्त 2026 को बाल विवाह के विरुद्ध एक विशेष गहन अभियान की घोषणा की, जिसके तहत असम पुलिस राज्यभर के जिलों में प्रवर्तन कार्रवाई तेज करेगी। सरकार ने 1 नवंबर को इस प्रथा के उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में घोषित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में राज्य में बाल विवाह के 12,196 मामले दर्ज हुए और 11,196 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

अभियान की पृष्ठभूमि और प्रेरणा

राज्य सरकार ने इस अभियान को 'बोर असम' के संस्थापक और ऐतिहासिक नायक चाओलुंग सिउ-का-फा की विरासत से जोड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सामाजिक सुधार एजेंडा महिलाओं और बच्चों के लिए न्याय सुनिश्चित करने और नए अवसर सृजित करने के व्यापक उद्देश्य से प्रेरित है। सरकार ने इस अभियान को औपचारिक रूप से 'असम में बाल विवाह का अंत' नाम दिया है।

मुख्य घटनाक्रम और आंकड़े

असम सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते पाँच वर्षों में 12,196 मामले दर्ज किए गए, जबकि 11,196 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। यह संख्या दर्शाती है कि राज्य में बाल विवाह अभी भी एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में असम सरकार ने इस मुद्दे पर लगातार सख्त रुख अपनाया है और यह नया अभियान उसी कड़ी की अगली कड़ी है।

बाल विवाह के दुष्परिणाम

अधिकारियों के अनुसार, बाल विवाह से लड़कियों को कई गंभीर नुकसान उठाने पड़ते हैं — शिक्षा में बाधा, कम उम्र में गर्भधारण, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और आर्थिक अवसरों में कमी इनमें प्रमुख हैं। राज्य सरकार ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि लड़कियों की स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सामाजिक-आर्थिक अवसर देना इस अभियान का अभिन्न हिस्सा है।

सरकार की रणनीति

इस विशेष अभियान का उद्देश्य केवल कानूनी प्रवर्तन तक सीमित नहीं है। सरकार कानूनी कार्रवाई को शिक्षा, सशक्तिकरण और आजीविका-संबंधी पहलों के साथ जोड़ रही है, ताकि समुदायों को इस प्रथा को स्वेच्छा से अस्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। असम पुलिस जिलों में प्रवर्तन तेज करने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चला रही है।

आगे की राह

इस गहन अभियान से राज्य में बाल विवाह की घटनाओं में और कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। 1 नवंबर की निर्धारित समय-सीमा को सरकार ने एक प्रतीकात्मक पड़ाव के रूप में चिह्नित किया है, जिसके बाद प्रवर्तन के परिणामों की समीक्षा की जाएगी। असम सरकार का लक्ष्य महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण को एक साथ सुनिश्चित करते हुए इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

196 गिरफ्तारियाँ — लेकिन असली सवाल यह है कि इन गिरफ्तारियों के बाद सजा की दर और पुनरावृत्ति की दर क्या रही। केवल गिरफ्तारी की संख्या सामाजिक बदलाव का पैमाना नहीं हो सकती, जब तक कि समुदाय स्तर पर मानसिकता न बदले। 1 नवंबर की समय-सीमा एक प्रतीकात्मक कदम है, लेकिन स्थायी परिवर्तन के लिए शिक्षा और आर्थिक अवसरों में निवेश की जवाबदेही भी उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में बाल विवाह के खिलाफ अभियान में अब तक क्या हुआ?
असम सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में राज्य में बाल विवाह के 12,196 मामले दर्ज किए गए और 11,196 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 20 अगस्त 2026 को एक नए विशेष गहन अभियान की घोषणा की गई है।
असम सरकार ने 1 नवंबर को क्यों महत्वपूर्ण पड़ाव घोषित किया?
राज्य सरकार ने 1 नवंबर को बाल विवाह उन्मूलन प्रयासों की समीक्षा और प्रवर्तन के परिणामों को मापने के लिए एक प्रतीकात्मक लक्ष्य तिथि के रूप में घोषित किया है। यह तिथि 'बोर असम' के संस्थापक चाओलुंग सिउ-का-फा की विरासत से भी जुड़ी है।
बाल विवाह से लड़कियों को क्या नुकसान होता है?
अधिकारियों के अनुसार, बाल विवाह से लड़कियों की शिक्षा बाधित होती है, कम उम्र में गर्भधारण के स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं और आर्थिक अवसर सीमित हो जाते हैं। यही कारण है कि सरकार इसे केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण का मुद्दा मानती है।
असम का यह अभियान पहले के प्रयासों से कैसे अलग है?
नया अभियान केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है — इसमें शिक्षा, सशक्तिकरण और आजीविका पहलों को कानूनी प्रवर्तन के साथ जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य समुदायों को इस प्रथा को स्वेच्छा से अस्वीकार करने के लिए प्रेरित करना है।
असम में बाल विवाह की स्थिति कितनी गंभीर है?
राज्य के कुछ हिस्सों में बाल विवाह अभी भी एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनी हुई है। पाँच वर्षों में 12,196 दर्ज मामले इस समस्या की व्यापकता को दर्शाते हैं, हालाँकि हाल के वर्षों में सरकारी सख्ती के बाद जागरूकता बढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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