असम में गैंडों का अवैध शिकार शून्य: CM हिमंत बिस्वा सरमा का दावा, कांग्रेस काल में 40-45 सालाना मरते थे
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 24 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि राज्य में पिछले तीन वर्षों में एक सींग वाले गैंडे (ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनोसिरस) के अवैध शिकार का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। उनके अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में हर वर्ष औसतन 40 से 45 गैंडे अवैध रूप से मारे जाते थे।
मुख्यमंत्री का दावा और आंकड़े
सरमा ने कहा, 'यहां कांग्रेस की पिछली सरकारों के समय हर वर्ष औसतन 40-45 गैंडे मारे जाते थे। यह आधिकारिक तौर पर दर्ज संख्या है। हो सकता है कि और भी गैंडे मारे गए हों, जो दर्ज नहीं किए गए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 2014 के बाद से अवैध शिकार की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई और अधिकांश वर्षों में या तो कोई मामला सामने नहीं आया या महज एक-दो घटनाएं हुईं, जो अब पूरी तरह शून्य हो गई हैं।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार, वन अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय समुदायों को दिया। उन्होंने कहा, 'यह संरक्षण की एक बहुत बड़ी कामयाबी है और मुझे लगता है कि दुनिया में कहीं और ऐसी कामयाबी नहीं मिली है।'
वैश्विक संदर्भ में असम का महत्त्व
22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day) पर सरमा ने असम के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा था कि राज्य में ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनोसिरस की दुनिया भर की आबादी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा पाया जाता है। यह तथ्य असम को वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के नक्शे पर एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान देता है।
गौरतलब है कि यह प्रजाति दशकों तक अवैध शिकार और आवास के नुकसान के कारण संकटग्रस्त रही है। ऐसे में राज्य स्तर पर दर्ज शिकार-शून्य वर्षों की यह श्रृंखला संरक्षण नीति की दृष्टि से उल्लेखनीय मानी जा रही है।
गैंडों की बढ़ती आबादी
असम वन विभाग के आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, राज्य के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों — काजीरंगा, मानस, ओरंग और पोबितोरा — में गैंडों की संयुक्त आबादी 1999 में 1,672 थी, जो 2018 में बढ़कर 2,652 हो गई। यह वृद्धि दर्शाती है कि दीर्घकालिक संरक्षण प्रयास जनसंख्या पुनर्निर्माण में कारगर रहे हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सराहना
असम के गैंडा संरक्षण कार्यक्रम को हाल के वर्षों में व्यापक प्रशंसा मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन ने इस लुप्तप्राय प्रजाति की रक्षा के लिए राज्य के प्रयासों की सराहना की है। यह प्रशंसा भारत की अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता प्रतिबद्धताओं के लिहाज़ से भी महत्त्वपूर्ण है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री सरमा का यह दावा राजनीतिक रूप से भी प्रासंगिक है, क्योंकि उन्होंने इसे सीधे कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल से जोड़ा है। आलोचक यह भी देखेंगे कि क्या 'दर्ज मामलों की अनुपस्थिति' और 'वास्तविक शिकार की अनुपस्थिति' के बीच अंतर को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जा सकता है। बहरहाल, यदि यह प्रवृत्ति बनी रहती है, तो असम का मॉडल वैश्विक वन्यजीव संरक्षण नीति के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन सकता है।