मीठी नदी निरीक्षण के बाद बोले राज्यमंत्री आठवले: मॉनसून से पहले सफाई पूरी होगी, मुंबई ड्रेनेज सुधार ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 29 मई को मुंबई की मीठी नदी का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों को बताया कि नदी की सफाई का काम इस वर्ष भी जारी है और मॉनसून शुरू होने से पहले यह कार्य पूरा कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने मुंबई की जल निकासी व्यवस्था में आमूल सुधार की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
मीठी नदी और बाढ़ की समस्या
आठवले ने कहा कि अत्यधिक वर्षा होने पर मीठी नदी में बाढ़ आ जाती है, जिससे आसपास की बस्तियों के निवासियों को भारी कठिनाई उठानी पड़ती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) प्रतिवर्ष नदी की सफाई करती है और इस वर्ष भी यह कार्य प्रगति पर है। महानगरपालिका के अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि सफाई समय पर पूरी की जाएगी।
ड्रेनेज सिस्टम सुधार की माँग
राज्यमंत्री ने कहा कि मुंबई में भारी बारिश के दौरान हर इलाके में जलभराव हो जाता है, जो एक गंभीर समस्या है। उनके अनुसार, यदि शहर में दो बड़े ड्रेनेज सिस्टम स्थापित किए जाएँ तो सड़कों पर पानी नहीं टिकेगा और जलनिकासी तेज़ी से हो सकेगी। उन्होंने इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता बताई।
कर्नाटक की राजनीति पर प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से सिद्दारमैया के संभावित इस्तीफे पर पूछे गए सवाल पर आठवले ने कहा कि कांग्रेस ने सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री बनाया था और अब शायद पार्टी किसी अन्य नेता को यह पद देना चाहती है। उन्होंने कहा, 'जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे हमारी ओर से शुभकामनाएँ हैं।'
मतदाता सूची और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
एक दिन पूर्व विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर आठवले ने कहा था कि न्यायालय ने चुनाव आयोग (ECI) को मतदाता सूची को सटीक और स्वच्छ बनाए रखने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम दो या तीन बार दर्ज नहीं होना चाहिए और दिवंगत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाए जाने चाहिए। उनके अनुसार, इन पहलुओं की समीक्षा के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग की कार्यवाही को उचित ठहराया है।
आगे की राह
मुंबई में मॉनसून आमतौर पर जून के पहले सप्ताह तक दस्तक देता है, ऐसे में मीठी नदी की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए समय सीमित है। BMC और संबंधित एजेंसियों पर अब यह दबाव है कि वे निर्धारित समय में कार्य पूरा करें ताकि बाढ़ की पुनरावृत्ति से बचा जा सके।