ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू से पहली बड़े पैमाने पर वन्यजीव मौत की पुष्टि, 74 मामले दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू के कारण वन्यजीवों की बड़े पैमाने पर मौत की पहली आधिकारिक पुष्टि हो गई है। वैज्ञानिक संस्था सीएसआईआरओ (CSIRO) ने जाँच के बाद स्थापित किया कि दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में मृत पाए गए ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न (समुद्री पक्षी) एच5एन1 वायरस से संक्रमित थे — और यह देश के इतिहास में इस वायरस से जुड़ी पहली आधिकारिक 'मास मॉर्टेलिटी' घटना है। कृषि मंत्री जूली कॉलिन्स ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आने वाले समय में वन्यजीवों को और अधिक नुकसान अपरिहार्य है।
मुख्य घटनाक्रम
सप्ताहांत के दौरान दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में हवाई सर्वेक्षण के दौरान 49 ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न मृत और 35 बीमार पाए गए। इन पक्षियों के नमूने सीएसआईआरओ को भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट एच5एन1 पॉजिटिव आई। इसके अलावा दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के रोब में एक सीगल भी इस वायरस से संक्रमित पाया गया है।
कृषि मंत्री जूली कॉलिन्स ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'दुर्भाग्य से हम जानते हैं कि एक बार एच5 बर्ड फ्लू वन्यजीवों और प्राकृतिक पर्यावरण में फैल जाए तो बड़ी संख्या में नुकसान को टालना संभव नहीं है — और अब हम वही देखना शुरू कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को आगे और अधिक प्रसार तथा वन्यजीवों के बड़े पैमाने पर प्रभावित होने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।
देशभर में संक्रमण का विस्तार
कॉलिन्स के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में अब तक एच5एन1 के 74 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। राज्यवार आँकड़े इस प्रकार हैं: दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में 54, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 10, विक्टोरिया में 7, न्यू साउथ वेल्स में 2 और क्वींसलैंड में 1 मामला। यह आँकड़ा बताता है कि वायरस का भौगोलिक प्रसार तेज़ी से बढ़ रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
पर्यावरण मंत्री मरे वॉट ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'जंगली पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता — यही वजह है कि संक्रमण नए इलाकों में फैल सकता है और भविष्य में भी बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौत की घटनाएँ सामने आ सकती हैं।' सरकार ने कहा है कि वह स्थानीय वन्यजीव आबादी की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और निगरानी तंत्र को मज़बूत करने पर काम कर रही है।
वन्यजीवों पर असर
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया को अब तक एच5एन1 के वैश्विक प्रसार से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के कई देशों में यह वायरस पहले ही लाखों पक्षियों की मौत का कारण बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री पक्षियों में संक्रमण की पुष्टि विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि ये प्रजातियाँ लंबी दूरी तय करती हैं और वायरस को नए क्षेत्रों में ले जा सकती हैं।
आगे क्या होगा
अधिकारियों ने कहा है कि वे ऑस्ट्रेलियाई वन्यजीवों में वायरस के प्रसार पर निरंतर निगरानी रखेंगे। सीएसआईआरओ द्वारा नमूनों की जाँच जारी है। फिलहाल सरकार ने आम नागरिकों को मृत या बीमार पक्षियों को न छूने और संदिग्ध मामलों की सूचना तुरंत अधिकारियों को देने की सलाह दी है।