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अलवर अवतार सिंह हत्याकांड: पूर्व BJP जिला अध्यक्ष 'पाटा' समेत 9 दोषियों को उम्रकैद, ₹1 लाख जुर्माना

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अलवर अवतार सिंह हत्याकांड: पूर्व BJP जिला अध्यक्ष 'पाटा' समेत 9 दोषियों को उम्रकैद, ₹1 लाख जुर्माना

सारांश

राजस्थान के अलवर में 2016 के अवतार सिंह हत्याकांड में 9 साल बाद न्याय मिला — पूर्व BJP जिला अध्यक्ष 'पाटा' समेत नौ दोषियों को उम्रकैद। सरपंच चुनाव विवाद से उपजे इस मामले में 22 गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर फैसला आया।

मुख्य बातें

अलवर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेंद्र सिंह ने अवतार सिंह हत्याकांड में 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दोषियों में पूर्व BJP जिला अध्यक्ष इंदरजीत सिंह उर्फ 'पाटा' भी शामिल हैं; प्रत्येक पर ₹1 लाख जुर्माना लगाया गया।
घटना 10 जून 2016 को पाटा गांव, नौगावां में सरपंच चुनाव विवाद के बाद हुई थी।
अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों की गवाही और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।
पीड़ित के बेटे अजयपाल ने 10 वर्षों बाद न्याय मिलने पर न्यायपालिका का आभार जताया।

राजस्थान के अलवर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने 19 जुलाई 2025 को अवतार सिंह हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिला अध्यक्ष इंदरजीत सिंह उर्फ 'पाटा' सहित नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा दी। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया और स्पष्ट किया कि जुर्माना न चुकाने पर कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मुख्य घटनाक्रम

यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेंद्र सिंह ने सुनाया। उम्रकैद की सजा पाने वाले नौ दोषियों में इंदरजीत सिंह उर्फ 'पाटा', अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवाचन सिंह, जसपाल सिंह, कुलवंत सिंह, अमन सिंह, हरविंदर सिंह और विश्वेंद्र सिंह शामिल हैं। फैसले के तुरंत बाद अदालत परिसर और पाटा गांव के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि

यह घटना 10 जून 2016 को अलवर जिले के नौगावां पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत पाटा गांव में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गांव के सरपंच चुनाव से उपजे राजनीतिक विवाद और पारिवारिक तनाव की परिणति इस हमले के रूप में हुई। आरोप है कि अभियुक्तों ने अवतार सिंह को घेरकर हथौड़ों, तलवारों, चाकुओं, लोहे के पाइपों, हॉकी स्टिक और लकड़ी की लाठियों से हमला किया। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद नौगावां पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया गया।

अभियोजन पक्ष के साक्ष्य

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों की गवाही, चिकित्सा व पोस्टमार्टम रिपोर्टों और जाँच के दौरान एकत्र दस्तावेजी साक्ष्यों पर भरोसा किया। बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की अपील की, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए सभी नौ अभियुक्तों को कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद पीड़ित के बेटे अजयपाल ने कहा कि 10 वर्षों से अधिक के इंतजार के बाद आखिरकार परिवार को न्याय मिला है। उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद कुछ दोषियों को जेल वैन में ले जाते समय मुस्कुराते और मूंछें घुमाते देखा गया — इस कथित व्यवहार की अदालत परिसर में उपस्थित लोगों ने कड़ी आलोचना की।

आगे क्या होगा

यह मामला अब उच्च न्यायालय में अपील के चरण में जा सकता है। गौरतलब है कि राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले इस हाई-प्रोफाइल मामले में नौ वर्षों से अधिक समय तक चले मुकदमे का यह फैसला राजस्थान की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि 2016 की घटना में न्याय मिलने में नौ वर्ष लगे — जो भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में लंबित मामलों की गहरी समस्या को रेखांकित करता है। बचाव पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय में अपील की संभावना को देखते हुए, पीड़ित परिवार के लिए यह अंतिम न्याय अभी दूर हो सकता है। दोषियों का जेल वैन में मुस्कुराना — और उस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया — यह दर्शाता है कि कानूनी जीत और सामाजिक न्याय की अनुभूति के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अवतार सिंह हत्याकांड क्या है?
यह 10 जून 2016 को राजस्थान के अलवर जिले के पाटा गांव में हुई हत्या का मामला है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सरपंच चुनाव विवाद के बाद आरोपियों ने अवतार सिंह पर हथियारों से हमला किया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
किन लोगों को उम्रकैद की सजा मिली है?
नौ दोषियों में पूर्व BJP जिला अध्यक्ष इंदरजीत सिंह उर्फ 'पाटा' , अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवाचन सिंह, जसपाल सिंह, कुलवंत सिंह, अमन सिंह, हरविंदर सिंह और विश्वेंद्र सिंह शामिल हैं। सभी को ₹1 लाख जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
अदालत ने किस आधार पर दोषसिद्धि की?
अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की नरमी की अपील को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेंद्र सिंह ने अस्वीकार करते हुए सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया।
हत्या की वजह क्या बताई गई है?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सरपंच चुनाव से उपजी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और पारिवारिक तनाव इस हमले की मूल वजह रही। आरोप है कि आरोपियों ने हथौड़ों, तलवारों, चाकुओं, लोहे के पाइपों और लाठियों से हमला किया।
पीड़ित परिवार ने फैसले पर क्या कहा?
पीड़ित के बेटे अजयपाल ने कहा कि 10 वर्षों से अधिक के इंतजार के बाद परिवार को न्याय मिला है और उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। अब यह मामला उच्च न्यायालय में अपील के चरण में जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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