अलवर अवतार सिंह हत्याकांड: पूर्व BJP जिला अध्यक्ष 'पाटा' समेत 9 दोषियों को उम्रकैद, ₹1 लाख जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के अलवर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने 19 जुलाई 2025 को अवतार सिंह हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिला अध्यक्ष इंदरजीत सिंह उर्फ 'पाटा' सहित नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा दी। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया और स्पष्ट किया कि जुर्माना न चुकाने पर कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मुख्य घटनाक्रम
यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेंद्र सिंह ने सुनाया। उम्रकैद की सजा पाने वाले नौ दोषियों में इंदरजीत सिंह उर्फ 'पाटा', अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवाचन सिंह, जसपाल सिंह, कुलवंत सिंह, अमन सिंह, हरविंदर सिंह और विश्वेंद्र सिंह शामिल हैं। फैसले के तुरंत बाद अदालत परिसर और पाटा गांव के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि
यह घटना 10 जून 2016 को अलवर जिले के नौगावां पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत पाटा गांव में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गांव के सरपंच चुनाव से उपजे राजनीतिक विवाद और पारिवारिक तनाव की परिणति इस हमले के रूप में हुई। आरोप है कि अभियुक्तों ने अवतार सिंह को घेरकर हथौड़ों, तलवारों, चाकुओं, लोहे के पाइपों, हॉकी स्टिक और लकड़ी की लाठियों से हमला किया। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद नौगावां पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया गया।
अभियोजन पक्ष के साक्ष्य
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों की गवाही, चिकित्सा व पोस्टमार्टम रिपोर्टों और जाँच के दौरान एकत्र दस्तावेजी साक्ष्यों पर भरोसा किया। बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की अपील की, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए सभी नौ अभियुक्तों को कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद पीड़ित के बेटे अजयपाल ने कहा कि 10 वर्षों से अधिक के इंतजार के बाद आखिरकार परिवार को न्याय मिला है। उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद कुछ दोषियों को जेल वैन में ले जाते समय मुस्कुराते और मूंछें घुमाते देखा गया — इस कथित व्यवहार की अदालत परिसर में उपस्थित लोगों ने कड़ी आलोचना की।
आगे क्या होगा
यह मामला अब उच्च न्यायालय में अपील के चरण में जा सकता है। गौरतलब है कि राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले इस हाई-प्रोफाइल मामले में नौ वर्षों से अधिक समय तक चले मुकदमे का यह फैसला राजस्थान की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।